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गाजीपुर बहादुरगंज में भाजपा की गुटबंदी! पार्टी उम्मीदवार बन गईं निर्दल

बाराचवर। कॉडर की पार्टी भाजपा में गुटबंदी किस सीमा तक है। इसका प्रत्यक्ष प्रमाण बहादुरगंज नगर पंचायत में है। चेयरमैन पद के लिए पार्टी की घोषित उम्मीदवार सोनी प्रजापति पत्नी अरविंद इस गुटबंदी की शिकार हो गईं। उन्हें आखिर तक पार्टी का सिंबल नहीं मिला। जाहिर है कि इस दशा में उनको निर्दल उम्मीदवार की हैसियत से चुनाव लड़ना पड़ेगा। यह प्रकरण पार्टी में चर्चा का विषय बना हुआ है।

बताया जा रहा है कि सहयोगी पार्टी भासपा के गठबंधन धर्म तोड़ने के बाद भाजपा बहादुरगंज में चेयरमैन पद पर अपना उम्मीदवार देने का फैसला की। इसके लिए अन्य नगर निकायों के उम्मीदवारों के साथ बहादुरगंज के लिए भी पार्टी सिंबल बहादुरगंज नगर पंचायत संयोजक डॉ.अशोक राय को सौंप दिया गया। तब पार्टी उम्मीदवार तय नहीं की थी। कहा गया कि ऊपर से नाम आने के बाद उसके नाम से सिंबल जारी कर दिया जाए। पार्टी अंतिम दौर में सोनी प्रजापति का नाम घोषित की। नामांकन के अंतिम दिन सोमवार को जिलाध्यक्ष भानुप्रताप सिंह ने निर्देश दिया कि सिंबल सोनी प्रजापति को सौंप दिया जाए।

ताकि वह नामांकन के वक्त उसे जमा कर सकें। नामांकन का समय बीतता रहा। संयोजक डॉ.अशोक राय मय सिंबल लापता हो गए। जिलाध्यक्ष ने बहादुरगंज नगर पंचायत के पार्टी प्रभारी जितेंद्र नाथ पांडेय को फोन किया। वह मरदह से बहादुरगंज डॉ.अशोक राय की क्लीनिक पर पहुंचे। वहां से उनके घर गए लेकिन डॉ.अशोक राय का पता नहीं चला। घरवालों ने बताया कि किसी पेसेंट को लेकर मऊ चले गए हैं। बावजूद श्री पांडेय वहीं उनका इंतजार करने लगे। मजे की बात कि नामांकन का वक्त शाम तीन बजे खत्म हो गया। तभी डॉ.अशोक नाटकीय तरीके से अपने घर लौट आए। उनसे सिंबल लेकर श्री पांडेय नामांकन स्थल कासिमाबाद पहुंचे लेकिन तब तक घड़ी में शाम के चार बज चुके थे।

एसडीएम विजय शंकर तिवारी ने राज्य निर्वाचन आयोग का हवाला देते हुए सिंबल लेने से साफ मना कर दिया। साथ ही पार्टी की घोषित उम्मीदवार सोनी को निर्दल उम्मीदवारों की सूची में डाल दिया। पार्टी में सवाल उठ रहा है कि डॉ.अशोक राय ने ऐसा क्यों किया। चर्चा है कि दरअसल वह और उनके गुट के लोग सोनी प्रजापति के बजाय गिरीश रंजन शर्मा की पत्नी राजश्री को टिकट दिलाना चाहते थे। राजश्री से उन लोगों ने नामांकन भी करा दिया था लेकिन पार्टी नेतृत्व ने उनको टिकट नहीं दिया। इस खुन्नस में पार्टी की अधिकृत उम्मीदवार को भी सिंबल नहीं देने का खेल कर दिया गया।

इसके लिए न सिर्फ ऊपर के नेतृत्व को बल्कि नगर पंचायत के पार्टी प्रभारी जितेंद्र नाथ पांडेय को भी अंधेरे में रखा गया। इस संबंध में गाजीपुर न्यूज़ ने पार्टी जिलाध्यक्ष भानुप्रताप सिंह से चर्चा की। उन्होंने कहा कि संयोजक को अचानक काम आ गया। लिहाजा वक्त पर पार्टी उम्मीदवार सोनी प्रजापति का सिंबल जमा नहीं हो पाया लेकिन पार्टी की वही उम्मीदवार हैं और अपने प्रचार अभियान में वह पार्टी का झंडा, बैनर इस्तेमाल करने की हकदार हैं। उनके प्रचार अभियान में पार्टी का कॉडर पूरे दमखम और ईमानदारी के साथ लगेगा। इधर राजनीतिक प्रेक्षकों का कहना है कि भाजपा जिलाध्यक्ष भले सोनी प्रजापति के साथ एकजुटता की बात कहें लेकिन चुनाव मैदान में राजश्री की मौजूदगी और पार्टी की गुटबंदी क्या गुल खिलाएगी। यह परिणाम आने पर ही पता चलेगा।

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