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गाजीपुर: जिस कार्य से तन-मन वाणी शुद्ध हो जाये वही है पूजा- महामंडलेश्वार स्वामी भवानीनंदन यति

गाजीपुर न्यूज़ टीम, गाजीपुर जखनियां क्षेत्र के सिद्धपीठ हथियाराम के पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर स्वामी भवानीनंदन यति जी महाराज बुधवार की देर शाम रामहित यात्रा के दौरान तमाम साधु सन्तों व श्रद्धालुओं के साथ परसपुर बुढानपुर स्थित शिवमंदिर पहुंचे जहां उन्होंने परम्परागत सन्ध्या आरती पूजन कर रात्रि प्रवास किया। गुरुवार की सुबह शिवमंदिर पर सिद्धपीठ की परम्परागत हरिहरात्मक पूजन के बाद शिष्य श्रद्धालुओं की अपार भीड़ को प्रवचन के माध्यम से श्री यति जी महाराज ने सम्बोधित करते हुए कहाकि शिष्य श्रद्धालुओं के कल्याण सन्त महात्माओं के चरण नही आचरण ग्रहण करने में ही सम्भव है। पूजा शब्द पर प्रकाश डालते हुए बताया कि जिस कार्य को करने से तन, मन और वाणी शुद्ध हो वही पूजा है। अच्छे विचार से किए गए भगवान की आराधना मंगलकारी होती है, जिस प्रकार अच्छे विचार से की गई आराधना से परिवार विकासोन्मुख होता है वही जिस परिवार में सहमत नहीं होती, विश्वास नहीं होता उस परिवार में समृद्धि नही होती है। 

उन्होंने बताया कि जिस कार्य में अपवित्रता आती है उसे पूजा नहीं कहते और असहाय और गरीबों को सहयोग देने से शांति मिलती है। आराधना का कर्म करने से पूर्व भावनाएं पवित्र हो जाती है। गरीब निर्मल असहाय का सहयोग भी पूजा की श्रेणी में ही आता है। धर्म के द्वारा पुण्य की पूंजी बढ़ाई जा सकती है। निर्मल और पवित्र मन से भक्ति करने से भगवान के चरणों में स्थान पाया जा सकता है।  यह संसार प्रभु ने केवल खेल के लिए नहीं बनाया। इस संसार में ईश्वर, जीव और प्रकृति तीन सत्ताएं हैं। 

इनमें ईश्वर तो सबका अधिष्ठाता, सर्वज्ञ, सर्वशक्ति संपन्न है, अतः पूर्ण होने से वह दोषरहित है, पूर्ण विकसित है, परंतु जीवात्मा सदोष है, अवनत भी है, अल्पज्ञ है और उसे विकास की दिशा में चलना है। वास्तव में जीव स्वतंत्र है और उसकी आवश्यकताएं भी हैं। परमेश्वर पूर्णकाम है, जीव पूर्णकाम नहीं है, उसे पूर्ण कामता या सुख या आनंद की आवश्यकता है। यह सृष्टि प्रभु ने जीव के विकास के लिए ही बनाई है। 

इस अवसर पर आचार्य रामानंद जी ने कहाकि जीव आत्मा को परमात्मा का मिलन गुरुकृपा से ही सम्भव हो सकता है। उन्होंने बताया कि सन्त महात्मा ईश्वर के चलते फिरते विग्रह होते हैं। आप सभी शौभाग्यशाली हैं जिन्हें सिद्धपीठ का सानिध्य प्राप्त हुआ है, जहाँ आज भी शिष्य कल्याण हेतु स्वयं गाँव मे आपके बीच मे प्रवास को आते हैं। जिसे भक्ति का एक बार स्वाद मिल गया, वह भगवान की भक्ति में दिन-रात लीन हो जाता है। जिस क्षण व्यक्ति हृदय से भगवान से जुड़ जाता है, उसी क्षण से वह प्रसन्नचित हो जाता है। 

इसीलिए कहा गया है कि भगवान के श्रीचरणों में ही सारे समस्याओं का हल है। इस अवसर पर उग्रसेन सिंह, अशोक सिंह “प्रधान”, तेजबहादुर सिंह, राजेश सिंह, अनिल कुमार सिंह, कौशलेंद्र सिंह, अभिषेक कुमार, हरिशंकर पांडेय, एडवोकेट शिवानन्द सिंह, हरिद्वार सिंह, जगदीश सिंह, मोहन भारती सहित सैकड़ों लोग मौजूद रहे।

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