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गाजीपुर: संसाधनों की कमी से जूझ रहे नियम पालन कराने वाले विभाग

गाजीपुर न्यूज़ टीम, गाजीपुर यातायात नियमों के पालन कराने में संसाधनों की कमी बड़ा रोड़ा है। यह इससे जुड़े विभागीय अधिकारियों के हाथ को बांध दे रही है। परिवहन विभाग हो या यातायात पुलिस इनके पास समुचित संसाधन व मैन पावर न होने से यातायात नियमों के उल्लंघन पर पूरी तरह से रोक नहीं लग पा रही है। 

परिवहन विभाग के पास कोई तकनीकी सहायक नहीं होने से किसी तरह काम चलाया जा रहा है। इसके साथ ही प्रदूषण जांच व फिटनेस व फिटनेस किट नहीं रहने की वजह से गाड़ियों का परीक्षण सही ढंग से नहीं हो पाता है। कोई कर्मचारी काम भी नहीं करना चाह रहा है। विभागीय कर्मचारी व अधिकारी भी किसी तरह काम चला लेते हैं। ऐसे में खटारा गाड़ियों का भी फिटनेस कागज में सही हो जाता है। 

जांच के दौरान कागज सही पाया जाता है मजबूरन खटारा वाहनों को छोड़ना अधिकारियों की मजबूरी हो जाती है। यही हाल यातायात पुलिस का भी है। इनके पास भी उचित संसाधनों की कमी है। इसकी वजह से यातायात पुलिस का भी हाथ बंधा रहता है। 

यातायात पुलिस को भी कम कर्मचारियों के सहारे ही यातायात नियमों का पालन कराना पड़ता है। शहर के कुछ ही चिन्हित चौराहे व तिराहे हैं जहां यातायात पुलिस की ड्यूटी लगी होती है। कई चौराहों पर तो होमगार्ड के जरिये काम चलाया जाता है। पूरे जनपद में कहीं भी इलेक्ट्रानिक ¨सग्नल नहीं होने की वजह से भी वाहन चालकों द्वारा खुलेआम यातायात नियमों की धज्जियां उड़ाई जाती हैं। 

वाहन चालक भयमुक्त होकर गाड़ियों को दौड़ाते हैं। इसके वजह से रोज शहर में कहीं न कहीं जाम लग जाता है। शहर में 25 कर्मचारियों के सापेक्ष महज 9 यातायात पुलिस कर्मी इतनी बड़ी ट्रैफिक का मोर्चा संभाले हुए हैं।

ड्राइविंग लाइसेंस में आनलाइन परीक्षा का झाम
ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने के लिए लोगों को पापड़ बेलना पड़ रहा है। इसके लिए पहले आन लाइन आवेदन करना है। उसके 48 घंटे बाद कार्यालय में हार्ड कापी लेकर जाना पड़ता है। कार्यालय में आवेदक को आनलाइन परीक्षा होती है। उसमें आवेदक को पास करना जरूरी होता है। परीक्षा पास करने के बाद ही लाइसेंस जारी किया जाता है।

फेल होने पर लाइसेंस की प्रक्रिया को रोक दिया जाता है। आवेदक को पुन: परीक्षा के लिए बुलाया जाता है। ऐसे में जिनको कम्प्यूटर का ज्ञान नहीं होता है उनका लाइसेंस नहीं बन पाता है। उनको कार्यालय की परिक्रमा करनी पड़ती है। कई लोग तो दलालों के चंगुल में फंस जाते हैं।

दलाल उनकी पाकेट ढीली करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ते हैं। उनको महीनों दौड़ाते हैं। लोग थक हारकर घर बैठ जाते हैं और बिना लाइसेंस गाड़ी चलाने में ही अपनी भलाई समझ लेते हैं। खैर आनलाइन प्रक्रिया के वजह से भ्रष्टाचार पर काफी अंकुश लगा है।

भवन है मगर कोई नहीं बैठता
यातायात पुलिस का कार्यालय विशेश्वरगंज पुलिस चौकी के सामने है मगर उसमें वर्षों से ताला लगा है। यातायात पुलिस सड़क पर काम करती है और ड्यूटी समाप्त होने के बाद घर चली जाती है। वहीं एआरटीओ विभाग किराये के भवन में चलता है।

यातायात प्रभारी बोले
यातायात नियमों के पालन के लिए रोज अभियान चलाकर लोगों जानकारी दिया जा रहा है। जो लोग उल्लंघन करते पाए जाते हैं उनके खिलाफ कार्रवाई की जाती है। कर्मचारियों की कमी जरूर है लेकिन पूरे मनोयोग से काम करके नियमों का पालन कराया जाता है। सुधीर कुमार त्रिपाठी, यातायात प्रभारी

ड्राइविंग लाइसेंस के लिए आनलाइन प्रक्रिया पारदर्शिता के लिए की गई है। जिनको कम्प्यूटर का ज्ञान नहीं है वह सहायता के लिए विभाग से किसी कर्मचारी को अपने साथ लेकर परीक्षा में बैठ कर परीक्षा दे सकते हैं। वह प्रश्नों का मौखिक उत्तर दे सकते हैं। फिटनेस किट और आरओ के न रहने से परेशानी होती है। फिर भी यातायात नियमों का पालन कराने का पूरा प्रयास रहता है। विनय कुमार, एआरटीओ

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