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गाजीपुर: आक्रोश नामक उपन्यास का किया विमोचन

गाजीपुर न्यूज़ टीम, गाजीपुर हिन्दी के मूर्धन्य कवि और भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित डा. केदारनाथ सिंह ने कहा कि रामावतार का उपन्यास ‘आक्रोश’ युवा पीढ़ी की भीषण यातनाओं की महागाथा है। इस कृति में समाधान नहीं दिया है, यह बहुत अच्छी बात है। कथाकार को समाधान देना भी नहीं चाहिए। यह काम पाठकों पर छोड़ देना चाहिए। वह यहां ‘समकालीन सोच’ परिवार की ओर से कल शाम गौतमबुद्ध कालोनी में आयोजित पुस्तक विमोचन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे। 

उन्होंने कहा कि इसमें युवा पीढ़ी की यातनाओं, समस्याओं और संवेदनाओं का जीवन्त चित्रांकन और रेखांकन है। रामावतार का पिछला उपन्यास भी मुझे बहुत अच्छा लगा था। अध्यक्षता कर रहे समाजवादी चिन्तक डा. पी.एन. सिंह ने कहा कि मेरे कहने पर रामावतार ने यह उपन्यास दो प्लाटों का लिखा है। विवेकी राय के बाद रामावतार ने अपने को उपन्यासकार के रूप में स्थापित करने में सफलता प्राप्त की है। 

इनसे हिन्दी जगत को बहुत अपेक्षाएं हैं । यह निरन्तर लिख रहे हैं और अच्छा लिख रहे हैं। अब तक आपके एक दर्जन उपन्यास प्रकाशित हो चुके हैं। ‘गाजीपुर समाचार’ के सम्पादक कमलाशंकर यादव ने कहा कि प्रसिद्ध साहित्यकार विवेकी राय की अंतिम इच्छा के रूप में उनके सुझाव पर लिखा गया यह उपन्यास भाषा की दृष्टि से जैनेन्द्र और सच्चाइयों की संवेदनात्मक दृष्टि से भीष्म साहनी के प्रसिद्ध उपन्यास ‘तमस’ की याद दिलाता है। डा. समरबहादुर सिंह ने कहा कि ‘आक्रोश’ प्रेमचन्द के ‘गोदान’ और ‘रंगभूमि’ की तरह दो प्लाटों का बेहद खूबसूरत उपन्यास है। 

अपनी मनोवैज्ञानिक दृष्टि, युवा पीढ़ी के प्रति गहन संवेदना और चुश्त संवाद के कारण यह उपन्यास आदि से अंत तक पाठकों को बांधे रहता है। समारोह के संचालक कवि एवं नाटककार डा. गजाधर शर्मा गंगेश ने विषय प्रवर्तन करते हुए कहा कि कथाकार रामावतार ने अपने उपन्यास में समकालीन यथार्थ को हर संभव आयाम में देखने और दिखाने का प्रयास किया है। 

लेखक का मत है कि युवा पीढ़ी की समस्या का समाधान स्थानीय और व्यवस्था दोनों स्तरों पर खोजे जाने चाहिए। कथाकार रामावतार ने उपन्यास की पृष्ठभूमि पर प्रकाश डालते हुए सबके प्रति आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर धर्मनारायण मिश्र, डा. बद्रीसिंह,  अमितेश, संजय कुमार,  डा. हारून रशीद खां, अनिल कुमार शर्मा, गंगाधर सिंह, रामनगीना कुशवाहा, प्रमोद कुमार राय आदि प्रमुख लोग उपस्थित थे।

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