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गाजीपुर: मुख्यमंत्री के नाम गाजीपुर के ‘मालवीय’ की चिट्ठी

राजेश्वर प्रसाद सिंह
गाजीपुर न्यूज़ टीम, गाजीपुर प्रमुख समाजसेवी, वकील, वयोवृद्ध नागरिक एवं गाजीपुर के ‘मालवीय’ कहे जाने वाले राजेश्वर प्रसाद सिंह की दिली इच्छा है कि गाजीपुर के लोगों को देश के दूसरे महानगरों के लिए हवाई मार्ग की सुविधा उपलब्ध हो। इसके लिए उन्होंने मंगलवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को चिट्ठी प्रेषित की। उसमें उन्होंने लिखा- मैं गाजीपुर जनपद का 96 वर्षीय समाजसेवी, वकील व् वयोवृद्ध नागरिक हूं। 

गाजीपुर में अंग्रेजी शासन के दौरान दो हवाई अड्डे अंधऊ व शाहबाज कुली की स्थापना हुई थी। शाहबाज कुली हवाई अड्डा पूरी तरह से बंद हो चूका है लेकिन अंधऊ हवाई अड्डे का उपयोग वीवीआईपी के आने जाने के लिए किया जाता है। गाजीपुर के लोगों को हवाई यात्रा के लिए 90 किलोमीटर दूर वाराणसी जाना पड़ता है, जिससे गाजीपुर के सामान्य- जन को बहुत दिक्कतों का सामना करना पड़ता है, जिसके कारण यहाँ आने जाने वाले पर्यटकों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है| यह देखते हुए कि हवाई यात्रा करने वालों की संख्या दिन-प्रतिदिन बढती जा रही है। 

आपसे निवेदन है की अन्धऊ हवाई अड्डे को पुनःशुरू कर दिया जाए तो गाजीपुर ही नहीं बल्कि आसपास के जनपद के लोग भी लाभान्वित होंगे और यह पर्यटन की दृष्टि से भी अत्यंत लाभकारी होगा। आपसे गाजीपुर के लिए बहुत कुछ नया करने की अपेक्षा है। हमें भरोसा है कि आप गाजीपुर के नागरिकों के हित में अन्धऊ हवाई अड्डा शुरू करने के लिए आप आवश्यक कदम उठाएंगे। अत: गाजीपुर जनपद के नागरिकों की ओर से मेरा विनम्र निवेंदन है की अंधऊ हवाई अड्डा को जल्द शुरू करवाने की महती कृपा करें।-भवदीय, राजेश्वर प्रसाद सिंह, संस्थापक व पूर्व सचिव/प्रबंधक स्नातकोत्तर महाविदालय, गाजीपुर एवं चेयरमैनकृषि विज्ञान केंद्र, पीजी कॉलेज एवं टेरी, पीजी कॉलेज

कौन हैं राजेश्वर प्रसाद सिंह
अगर राजेश्वर प्रसाद सिंह को गाजीपुर का मालवीय कहा जाए तो कोई अतिश्योक्ति नहीं। बल्कि दोनों में कई समानताएं भी मिलती हैं। पं.मदन मोहन मालवीय भी वकालत के पेशे से जुड़े थे और राजेश्वर प्रसाद सिंह भी गाजीपुर के काबिल वकीलों में कभी शुमार रहे हैं। मालवीयजी भारतीय संस्कृति, संस्कार से परिपूर्ण एक विश्वविद्यालय का सपना देखे। इधर राजेश्वर प्रसाद सिंह भी सबसे पिछड़े जिले गाजीपुर में उच्च शिक्षा की जरूरत समझे। मालवीयजी ने बीएचयू की स्थापना के लिए राजा-रजवाड़ों और सेठ-साहुकारों से चंदा मांगे। राजेश्वर प्रसाद सिंह डिग्री कॉलेज बनाने के लिए जगह-जगह नाटक का मंचन कर सहयोग राशि बटोरे। आज दोनों महापुरुषों की कृतियां उनकी सोच और संकल्प को लेकर अपनी जगह खड़ी हैं। 

सैदपुर के रामपुर में सन् 1923 में जन्मे राजेश्वर बाबू के पिता सरजू सिंह भी वकील थे और जिला पंचायत के पहले चेयरमैन बने थे। राजेश्वर बाबू भी इलाहाबाद विश्वविद्यालय से वकालत की डिग्री लेकर आए और जिला न्यायालय में प्रैक्टिस शुरू किए। साथ ही समाज सेवा में भी सक्रिय हुए। 1952 में उन्होंने विचार-विमर्श संस्था बनाई। उस वक्त गाजीपुर में उच्च शिक्षा के लिए कोई संस्थान नहीं था। 

राजेश्वर बाबू को लगा कि गाजीपुर को विकास की मुख्यधारा में तभी लाना संभव होगा जब उच्च शिक्षा संस्थान की स्थापना की जाए। उन्होंने इसकी पहल अपनी संस्था से करने का निर्णय किया। इसके लिए मुहिम शुरू हुई। नाटकों का मंचन कर सहयोग राशि जुटाई गई और 1957 में डिग्री कॉलेज धरातल पर आया। 

आज यह कॉलेज पीजी कॉलेज के रूप में पूर्वांचल में अपनी अलग पहचान रखता है। शिक्षा के प्रसार के प्रति राजेश्वर बाबू वहीं नहीं रुके। राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित शिक्षक रामसिंगार सिंह से वह संपर्क किए। उसका परिणाम आदर्श इंटर कॉलेज के रूप में सामने आया। फिर राजेश्वर बाबू ने शहर के नामी होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ.बागची की सलाह पर होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज की नींव रखी। 

हालांकि बाद में इस कॉलेज को प्रदेश सरकार ने अपने प्रबंधन में ले लिया। राजेश्वर बाबू जानते थे कि व्यक्ति के विकास में खेलकूद की भी अहमियत है। उन्होंने गोराबाजार में नेहरू स्टेडियम उपलब्ध कराया। उस स्टेडियम में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी तक आईं। दैविक आपदा के वक्त जरूरतमंदों की सेवा की ललक में राजेश्वर बाबू ने ददरीघाट में समाज सेवी संस्था विकास निगम की स्थापना की। 

आगे चलकर उसमें पुस्तकालय भी खोला गया लेकिन शिक्षा के प्रसार की उनकी मुहिम जारी रही। तकनीकी शिक्षा के लिए उन्होंने पीजी कॉलेज में तकनीकी शिक्षा एवं शोध संस्थान की स्थापना की। उसके पहले कृषि विज्ञान केंद्र की शुरुआत हुई। अब राजेश्वर बाबू की अवस्था करीब 96 वर्ष की हो चुकी है। आंखों की रोशनी चुकने लगी है लेकिन वह आज भी अपने हाथों स्थापित संस्थानों की प्रगति, उपलब्धि की रिपोर्ट हर रोज लेते हैं। 

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