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गाजीपुर: वैष्णो संप्रदाय के महान संतों की एक टूट गई, नहीं रहे रेंगा कुटी के महंथ यमुना दास जी महाराज

गाजीपुर न्यूज़ टीम, गाजीपुर बाराचवर वैष्णो संप्रदाय के महान संतों की लंबी श्रृंखला की एक कड़ी टूट गई। रेंगा कुटी के महंथ श्री श्री 1008 यमुना दास जी महाराज अब नहीं रहे। उनकी आयु 116 वर्ष थी। गुरुवार की रात वह ब्रह्मलीन हुए। कुछ दिनों से महाराज जी अस्वस्थ चल रहे थे। यह खबर कुछ ही देर में पूरे इलाके में फैल गई। कुटी के अनुवाई और श्रद्धालुओं का तांता लग गया। यमुना दास जी महाराज श्री गांधी इंटर कॉलेज शेरपुर ढोटारी के संस्थापक प्रबंधक थे। 

महाराज जी की बैकुंठ धाम की यात्रा शुक्रवार की दोपहर एक बजे बिच्छू बसाव मठ के गुरु महाराज ने रेगा कुटी पहुंचकर विधि विधान से वैदिक मत्रों के साथ शुरू कराई। महाराज जी के उत्तराधिकारी गिरवर दास लाल बाबा के नेतृत्व में रेंगा कुटी से निकली यह यात्रा हर हर महादेव के गूंज के साथ इंटर कॉलेज शेरपुर ढोटारी पहुंची। वहां प्रधानाचार्य छविनाथ मिश्र के नेतृत्व में विद्यालय परिवार ने पार्थिव शरीर पर पुष्पांजलि अर्पित की। फिर लखनेश्वर डीह किला पर भी कुछ देर के लिए यात्रा रुकी। 

जहां भक्तों ने महाराज जी के पार्थिव शरीर पर श्रद्धा सुमन अर्पित किए। उसके बाद यात्रा रसड़ा, फेफना होते हुए बक्सर(बिहार) के रामरेखा घाट पर पहुंची और पूरे विधि विधान के साथ महाराज जी को जल समाधि दी गई। महाराज जी का जन्म सन् 1903 में बक्सर के रेका गांव में हुआ था। वह संस्कृति और व्याकरण के प्रकांड विद्वान थे। महाराज जी के गंगा में जल समाधि में भाग लेने के बाद सत्यदेव ग्रुप ऑफ कॉलेज के प्रबंध निदेशक और महाराज जी के शिष्य डॉ.सानंद सिंह ने अपने गुरु के निधन पर गहरा शोक जताया। 

उन्होंने कहा कि उनके पिता स्व.डॉ.सत्यदेव सिंह तथा माता स्व.सावित्री देवी भी महाराज जी के शिष्य थे। महाराज जी के जाने से उनके लाखों भक्तों, शिष्य शोक में हैं। वह अपने भक्तों, शिष्यों के लिए एक अभिभावक के रूप में थे। बराबर हर किसी को जरूरत पड़ने पर उचित मार्ग दर्शन करते थे। यही वजह है कि उनके शिष्य आज जहां भी हैं वह फल-फूल रहे हैं।

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