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गाजीपुर: जिला जेल में करीब तीन घंटे तक कैदियों ने किया बवाल, तोड़फोड़ और आगजनी के साथ बंदी रक्षक को बनाए रखे बंधक

गाजीपुर न्यूज़ टीम, गाजीपुर जिला जेल में गुरुवार की शाम बवाल हो गया। एक बैरक के दबंग कैदियों ने बंदी रक्षक सहित दो को बंधक बना लिया। साथ ही बैरक में रखे कंबल, दरी वगैरह फूंक दिए। सीसीटीवी कैमरा तोड़ दिए। इससे भी संतोष नहीं हुआ तो वह थोड़ी दूर स्थित रसोई घर में भी वह घुसे और ईंधन गैस के दो सिलेंडर सहित रोटी बनाने वाली मशीन को भी आग के हवाले कर दिए। साथ ही बंदी रक्षक श्रीराम तथा सीसीटीवी कैमरा लगा रहे मैकेनिक को बंधक बना लिए। जेल कर्मियों पर पथराव भी किए। डीएम के बालाजी, एसपी यशवीर सिंह सहित सभी आला अफसरान मय फोर्स जेल में पहुंचे। करीब तीन घंटे की मशक्कत के बाद कैदियों को काबू में किया गया। इस मामले में जेलर सतीश चंद्र त्रिपाठी ने कुख्यात बंदी परमवीर सिंह तथा विकाश खरवार सहित 15 कैदियों के खिलाफ शहर कोतवाली में तहरीर दी है। घटना की शुरुआत शाम करीब तीन बजे हुई। बंदी रक्षक श्रीराम मैकेनिक को लेकर बैरक नंबर पांच में टीवी कैमरे लगवा रहे थे। इस पर दबंग कैदियों ने आपत्ति की। वह लामबंद होकर बंदी रक्षक से उलझ गए। उसके बाद उन्हें और साथ के मैकेनिक को अंदर खींच कर ले गए और सर्किल में ताला जड़ दिए। यह खबर लगते ही जेल कैंपस में खलबली मच गई। पगली घंटी बजी। सारे जेल कर्मी मौके की ओर लपके। तब कैदियों की ओर से तोड़फोड़, आगजनी, पथराव शुरू हो गया। जेल प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी भी होने लगी। कुछ कैदी जेल की चाहरदीवारी और पेड़ पर चढ़ गए।

हालात बेकाबू होते देख जेल अधिकारियों ने सूचना प्रशासन को दी। एडीएम राकेश कुमार, एएसपी द्वय चंद्र प्रकाश तथा प्रदीप कुमार, एसडीएम सदर शिव शरणरप्पा, एसडीएम जमानियां विनय कुमार गुप्त मय फोर्स जेल में पहुंचे। कैदियों को वह समझाना शुरू किए लेकिन कैदी डीएम तथा एसपी बुलाने की मांग करने लगे। उसी बीच फायर ब्रिगेड की गाड़ी भी बुला ली गई। फायर ब्रिगेड के जवान आग बुझाने में जुट गए। अंत में डीएम तथा एसपी शाम करीब पांच बजे जेल में पहुंचे। कैदियों ने जेल प्रशासन की मनमानी का आरोप लगाया। कहा कि उन्हें नियम के तहत न भोजन परोसा जाता है न चिकित्सकीय सुविधा मिलती है। उल्टे चेकिंग तथा तलाशी के नाम पर नाहक उनका उत्पीड़न किया जाता है। कैदियों ने इस बाबत शिकायत पत्र भी डीएम को सौंपा। डीएम ने इस मामले की जांच करा कर दोषी जेल कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई का भरोसा दिए। उसके बाद कैदी शांत हुए और बंदी रक्षक सहित दोनों बंधकों मुक्त किया। हालांकि प्रशासन गैस कटर, सर्चलाइट का भी इंतजाम कर लिया था। ताकि जरूरत पड़ने पर इनका भी इस्तेमाल किया जा सके। बवाल में बैरक पांच के अलावा दो, चार तथा सात नंबर बैरक के कैदी शामिल थे। जेल अधिकारियों के अनुसार इस बवाल के पीछे परमवीर सिंह तथा विकाश खरवार का दिमाग था। विकाश खरवार गाजीपुर का कुख्यात बदमाश है तो परमवीर सिंह को बागपत जेल से बलिया भेजा गया था। वहां से कुछ ही दिन पहले उसकी शिफ्टिंग गाजीपुर जेल में हुई थी। वह न्यायिक हिरासत में आने से पहले उस पर ढाई  लाख रुपये का ईनाम घोषित था। दरअसल बागपत जेल में माफिया डॉन मुन्ना बजरंगी की हत्या के बाद परमवीर को वहां हटाया गया था। जेलर ने बताया का आईजी जेल चंद्रप्रकाश के आदेश पर बीते 13 अगस्त से सभी बैरकों में सीसीटीवी कैमरे लगाए जा रहे हैं। फिर 14 लाख रुपये मूल्य की मोबाइल फोन ट्रैकर भी आया है। उससे जेल में मोबाइल फोन के अवैध इस्तेमाल पर अंकुश लगा है। इससे कैदी बौखला गए हैं। आईजी जेल के ही आदेश पर बैरकों की सघन तलाशी भी शुरू है। इसी क्रम में जेलर बैरक दो, चार, पांच तथा सात की तलाशी लेकर जैसे ही वह जेल अस्पताल पहुंचे कि उधर उन बैरकों के कैदियों ने बवाल शुरू कर दिया। बवाल के लिए मुख्य रूप से जिम्मेदार परमवीर सिंह तथा विकाश खरवार को बैरक बदल कर विशेष सुरक्षा में कर दिया गया है। जेल से बाहर निकलने के बाद डीएम के बालाजी ने मौजूद मीडिया कर्मियों से कहा कि फायरिंग वगैरह की घटना नहीं हुई है। उनका कहना था कि कैदियों की नाराजगी जेल की व्यवस्था को लेकर थी। कैदियों की ओर से मिले शिकायती पत्र के आधार पर जांच कराई जाएगी।

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