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गाजीपुर: मंडी इंस्पेक्टर के खिलाफ गुस्सा, किसानों ने दिया धरना

गाजीपुर न्यूज़ टीम, गाजीपुर जमानियां एक ओर प्रदेश सरकार किसानों के हित की बात कर रही है और दूसरी ओर नीचे के कर्मचारी किसानों के शोषण पर आमादा हैं। ऐसे ही एक मामले को लेकर गुस्साए चितावनपट्टी के किसान बुधवार की सुबह तहसील मुख्यालय पर धऱना दिए। उनका कहना था कि मंगलवार की सुबह वह अपना धान बेचने बिहार जा रहे थे। उसी बीच दिलदारनगर क्षेत्र के मिर्चा गांव के पास उन्हें जबरिया रोका गया। दिलदारनगर कृषि मंडी समिति के इंस्पेक्टर अंशुमान सिंह ने मंडी शुल्क की मांग की। उसके बाद किसानों से 15 हजार रुपये दिए लेकिन उनको रसीद मात्र आठ हजार 943 रुपये की दी गई। आपत्ति करने पर उन्हें डरा-धमका कर भगा दिया गया। 

धरने की अगुवाई जिला पंचायत सदस्य बसंत यादव ने की। इस सिलसिले में गाजीपुर न्यूज़ ने एसडीएम सत्यप्रकाश मिश्र से चर्चा की। उन्होंने कहा कि किसानों से पूरे घटनाक्रम की लिखित शिकायत मय शपथ लिया गया है। इस मामले की जांच कराई जाएगी। एक सवाल पर उन्होंने इस बात से इन्कार किया कि सरकारी केंद्रों पर धान की खरीद नहीं होने से जमानियां के किसान बिहार जाने को मजबूर हो रहे हैं। उनका कहना था कि सरकारी केंद्रों पर नियमानुसार धान की खरीद हो रही है लेकिन किसान अपना धान कहां बेचेंगे। इस निर्णय के लिए वह स्वतंत्र हैं। 

वैसे एसडीएम ने यह भी बताया कि चतुर व्यापारी किसानों का धान खरीद कर ज्यादा मुनाफा कमाने की गरज में मंडी शुल्क की चोरी से परहेज नहीं करते और जब पकड़े जाते हैं तो वह अपने करीबी किसानों को आगे करते हैं। किसानों से मंडी शुल्क नहीं वसूला जाता। एसडीएम के इस कथन से यह भी सवाल है कि अगर वाकई में चित्रकोनी के वह किसान थे तब मंडी शुल्क देने को सहज तैयार कैसे हुए। फिर यह भी पता चला है कि मंडी इंस्पेक्टर ने जब उन्हें रोका तो धान ही नहीं गेहूं भी किसानों के पास था।

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