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गाजीपुर: मुन्ना बजरंगी मर्डर लाश की फोटो वायरल करने का क्या था मकसद

गाजीपुर न्यूज़ टीम, गाजीपुर पुलिस चाहे जो कहे। उसकी जांच रिपोर्ट में जो आए लेकिन अंडरवर्ल्ड यह मानने को कतई तैयार नहीं है कि बागपत जेल में माफिया डॉन मुन्‍ना बजरंगी की हत्‍या महज इत्तेफाक रही। जहां घटना से कई दिन पहले से ही मुन्ना बजरंगी की पत्नी सीमा सिंह हत्या की साजिश की आशंका जताती रही हैं वहीं घटना के बाद अंडरवर्ल्ड के जानकार भी पूरी तरह इसे प्लांड मर्डर बता रहे हैं। उनका कहना है कि जेल में पिस्टल का पहुंचना और फिर हत्या के बाद मुन्ना बजरंगी के शव की फोटो का वायरल होना यह मर्डर प्लान का ही हिस्सा है। मुन्ना बजरंगी की मौत सुनिश्चित करने के लिए कथित हत्यारे माफिया सुनील राठी ने पिस्टल की एक पूरी मैगजीन खत्म कर दी। 

दरअसल यूपी एसटीएफ संग सितंबर १९९८ में दिल्ली के पास हुई मुठभेड़ में मुन्ना बजरंगी के शरीर में पुलिस की सात गोलियां लगी थीं। पुलिस उसे शवगृह भेज दी थी लेकिन वह वहां जिंदा निकला था। इस लिए उसे लकी माना जाता था। संभव हो कि हत्या का प्लान बनाने वालों ने यह तय कर लिया था कि चाहे जैसे मुन्ना बजरंगी को जिंदा नहीं बचने देना है। शायद यही वजह है कि कथित हत्यारे ने उसे उठने तक का मौका नहीं दिया। उसके बाद भी कथित हत्यारे के पास मैगजिन में २२ कारतूस बचे थे। मतलब अगर उसकी मौत की पुष्टि नहीं होती तो संभव था कि फिर कथित हत्यारा वह शेष गोलियां भी उस पर झोंकता। बाद में पुलिस ने पिस्तौल तथा वह सारे कारतूस जेल के गटर से बरामद की। 

पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार नौ गोलियां उसके शरीर से आर-पार निकल गईं थीं। सभी गोलियां बिल्कुल सटा कर मारी गई थीं। इसकी पुष्टि गोलियों के घाव किनारे काले निशानों से हुई। उसके सिर में ऐेसे छह निशान थे। सिर के आगे बाईं ओर दो और दाएं एक बड़ा निशान था जबकि सिर के पिछले हिस्से में दाएं दो व बाएं एक निशान था। बताया जा रहा है कि मुन्ना बजरंगी की हत्या में जिस पिस्टल का इस्तेमाल हुआ वह मेरठ से खरीदा गया था। हालांकि पुलिस की ओर से अभी ऐसा कुछ नहीं बताया गया है लेकिन यह सवाल मुन्ना बजरंगी की सुनियोजित हत्या की ओर जरूर इशारा कर रहे हैं कि वह पिस्टल जेल में पहुंची कैसे। हत्या सोमवार की सुबह करीब छह बजे हुई। 

उसके तीन दिन पहले प्रशासनिक अधिकारियों ने बागपत जेल का औचक निरीक्षण किया था। तब जेल के अंदर किसी तरह की आपत्तिजनक वस्तु मिलने से इन्कार किया था। फिर गौर करने की बात है कि मुन्ना बजरंगी की हत्या के बाद उसकी लाश की फोटो सोशल मीडिया पर वायरल होने लगी। क्या मौके पर पहले से मौजूद मोबाइल फोन से वह फोटो ली गई। क्या उसे वायरल करने का मकसद हत्या की प्लानिंग में शामिल लोगों को मुन्ना बजरंगी की मौत की पुष्टि कराना था। वैसे दो वीडियो क्लिप भी वायरल हो रहे हैं। यह वीडियो क्लिप रविवार की देर शाम उस वक्त का है जब झांसी जेल से मुन्ना बजरंगी को बागपत जेल पहुंचाया गया है। पहले वीडियो में एक गाड़ी जेल के बाहर वाले दरवाजे से अंदर जाती दिखती है और दूसरे में मुन्ना बजरंगी पुलिस घेरे में है। उसके साथ उसके लोग भी हैं। उसी क्रम में मुन्ना बजरंगी एक से तौलियानुमा कोई सफेद कपड़ा लेता है। फिर वह जेल के अंदर जाता दिखता है। वीडियो में मुन्ना बजरंगी के चहरे पर दहशत दिखती है। वह वीडियो किसने बनाई।

अंडरवर्ल्ड के लोगों का कहना है कि संभव हो कि मुन्ना बजरंगी के लोगों ने ही वह वीडियो बनाई हो। हालांकि मुन्ना बजरंगी की हत्या करने की बात माफिया सुनील राठी कबूल लिया है। पुलिस को वह यही बताया है कि मुन्ना बजरंगी ने उसे मोटा कहा था। इसी बात को लेकर उनका झगड़ा हुआ और मुन्ना बजरंगी ने पिस्टल निकाल कर उस पर तान दिया था। तब वह अपनी जान बचाने की गरज में पिस्टल छीन कर उस पर पूरी मैगजीन खाली कर दिया था लेकिन उसके इस कथन पर किसी को यकीन नहीं हो रहा है। जांच के बाद ही हकीकत सामने आएगी। 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी जेल में पिस्टल और हत्या को गंभीर मानते हुए पूरे प्रकरण की न्यायिक जांच का निर्देश दिया है। मालूम हो कि एक रंगदारी के मामले में बागपत कोर्ट में पेश करने के लिए मुन्ना बजरंगी को झांसी जेल से बागपत पहुंचाया गया था लेकिन ऐन पेशी के दिन ही सुबह उसे जेल में ही भून दिया गया। उसकी हत्या और उसके बाद के घटनाक्रमों में गाजीपुर के लोगों की भी खासी दिलचस्पी है। 29 नवबंर 2005 को गाजीपुर के भांवरकोल थाने के बसनिया चट्टी पर उसने  मुहम्मदाबाद के तत्कालीन भाजपा विधायक कृष्णानंद राय सहित उनके साथ के छह लोगों को एक साथ मार डाला था। इतना ही नहीं गाजीपुर में भी उसकी पहचान वालों की लंबी सूची रही है। गाजीपुर में ठेके-पट्टे के साथ ही पंचायत स्तरीय चुनावों में भी उसकी दिलचस्पी रही है।

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