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राज्यपाल ने BHU के विज्ञान संकाय में आंगनबाड़ी प्रशिक्षण शिविर का किया उद्घाटन

गाजीपुर न्यूज़ टीम, वाराणसी. रविवार को वाराणसी पहुंची राज्‍यपाल आनंदी बेन पटेल ने सोमवार सुबह बीएचयू के विज्ञान संकाय में आंगनबाड़ी प्रशिक्षण शिविर का उद्घाटन किया। प्रशिक्षण शिविर का उद्घाटन करने के बाद उन्‍होंने सभा को संबाेधित भी किया। इससे पूर्व सुबह 9.10 बजे राज्‍यपाल सर्किट हाउस से कार्यक्रम स्‍थल के लिए निकलीं और सुबह दस बजे बीएचयू विज्ञान संकाय में आंगनबाड़ी प्रशिक्षण शिविर का उद्घाटन किया। वहीं दोपहर में सर्किट हाउस में एमएसएमई और साड़ी उद्योग से जुड़े लोगों के साथ बैठक भी करेंगी। दोपहर 12.20 से लंच और रेस्ट के लिए रिजर्व रहेगा। जबकि शाम 6.30 से 7.30 बजे तक विद्या भारती के प्रमुख कार्यकर्ताओं और प्रशिक्षिकाओं के साथ बैठक भी करेंगी।  

आंगनबाड़ी से निखरेगा बच्चों का भविष्य

बीएचयू में आज बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग द्वारा आयोजित आंगनबाड़ी प्रशिक्षण कार्यक्रम में राज्यपाल आनंदी बेन पटेल ने कहा कि विद्या भारती द्वारा पूरा आयोजन हो रहा है, जिसकी तैयारी में वाराणसी जिलाधिकारी की टीम पिछले छह माह से लगी हुई है। इसकी प्रेरणा हमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिली है। आंगनबाड़ियों को जनशक्ति कैसे मिले उसी पर यह कार्यक्रम हो रहा है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ट्रेनिंग से डरते हैं, परिवार में लोग क्या कहेंगे। जब बच्चों व किशोरियों के साथ काम करते हैं तो कुछ सीखना पड़ेगा। हम भी मंत्री थे तो साल भर सब कुछ छोड़कर ट्रेनिंग में जाना पड़ता था, तब जाकर आंगनवाड़ी का आधार मजबूत होता था। नई शिक्षा नीति में 5+4+4+4 की बात कही गई है, इसमें पहले पांच साल में तीन साल आंगनवाड़ी के लिए है। बच्चा घर में जो भी गलती-सही कार्य करेगा वह आंगनवाड़ी में भी करेगा। हमारे बच्चों में बेहतर और दोष क्या है इसका पता आंगनवाड़ी से ही चल सकता है और इसी आधार पर उनका भविष्य निखारा जा सकता है।


हमें सैलरी नहीं भारत का भविष्य गढ़ने के अनुसार से काम करना होगा

हमारे कई अलग-अलग के त्यौहार आते हैं मगर राखी तैयार कराने पर हमें काम करना चाहिए, जो कि बेचकर लाभ अर्जित कर सकते हैं। वहीं रक्षा बंधन पर जाकर यदि 10 लोगों को राखी बांध दी जाए तो उससे भी धन अर्जित किया जा सकता है। विभिन्न त्योहारों, जयंती और मौसम की कैलेंडरिंग तैयार कर बच्चों को उत्पाद व चित्रकला बनाने का प्रशिक्षण देना चाहिए। उदाहरण स्वरूप गांधी जयंती आने से पहले बच्चों को बापू की चित्रकारी बनानी सिखानी चाहिए, जिससे दो अक्टूबर को एक्जीबिशन लगाकर बच्चों को प्रोत्साहित किया जा सके और इससे वह अपनी प्रतिभा को निखार सकेंगे। राज्यपाल ने कहा कि हमें सैलरी के अनुसार से काम नहीं करना है, हमें भारत का भविष्य गढ़ना है। इन बच्चों को हम तैयार करेंगे तो वे ही देश के उज्ज्वल सितारे बनेंगे। 14-15 साल के बच्चों को विशेष ध्यान हम देशवासियों को देना होगा, जरूरी हो कि पांचवी कक्षा तो मातृभाषा में शिक्षा अनिवार्य होनी चाहिए, जैसा कि हमारी शिक्षा नीति में निर्धारित किया गया है।

 
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