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गाजीपुर - भगवान राम के जन्म होते ही अयोध्या में गूंज उठा जय श्री राम

गाजीपुर। अति प्राचीन रामलीला कमेटी हरिशंकरी के तत्वाधान में लीला के दूसरे दिन रविवार की शाम 7 बजें से स्थानीय मुहल्ला हरिशंकरी स्थित श्रीराम चबूतरा पर वन्देवाणी विनायकऊ आदर्श रामलीला मण्डल के कलाकारों द्वारा श्रीराम जन्म व ताड़काबध लीला का मंचन किया गया। लीला के माध्यम से बताया गया कि जब भी असुरों का अत्याचार बढ़ता है तब भगवान पृथ्वी पर अवतार लेकर आसुरी शक्तियों का नाश तथा ‘ऋषि-मुनियों के रक्षार्थ के लिए पृथ्वी पर आना पड़ता है। 

इसी क्रम में बताते है कि एकबार राजा दशरथ अपने मंत्री सुमन्त के साथ बैठकर अपने राज्य का हालचाल ले रहे थें तो मंत्री ने राज्य का कुशलक्षेम ठीक ही बताया था। इसके बाद उन्हे पुत्रहीन होने की चिन्ता सता रही थी। इसके बाद वे कुलगुरू वशिष्ठ के आश्रम पर जाकर पुत्रहीन होने के सम्बन्ध में व्यथा सुनाई। सारी बातो को सुनते ही गुरू वशिष्ठ ने कहा कि हे राजन धरहू, धीर होई है, सूत चारी, त्रिभुवन विदित भगत भय हारी। हे राजन आप धर्य रखे भगवान सूर्य की कृपा से आपकी मनोकामना अवश्य पूरी होगी। इसके बाद गुरूदेव के आदेश के अनुसार महाराज दशरथ ऋषि के आश्रम पर पहुंच कर अपनी सारी व्यथा सुना दी। 

श्रृंगी ऋषि ने महाराज दशरथ से कहा कि हे राजन आप अपने राज्य में जाकर पुत्र कामेष्टि यज्ञ की तैयारी कराये। इतना सूनने के बाद राजा अपने राज्य में आकर के यज्ञ की सारी तैयारियां कराये। इसी बीच श्रृंगी ऋषि आकर के यज्ञ सकुशल सम्पन्न कराया। इसके बाद अग्निदेव हवन कुंड से प्रकट हो करके महाराज दशरथ को कटोरे भरे खीर को महाराज दशरथ को देते हुए कहा कि आप इसे अपने रानियों में वितरण कर दे। राजा दशरथ महारानी कौशिल्या के कक्ष में आकर दोनों रानियों में खीर वितरण किया। दोनो रानियों ने मिलकर महारानी सुमित्रा को अपने अपने हिस्से से दे दिया। तब तीनों रानियों ने महाराज को प्रणाम करके खीर को ग्रहण किया। उधर महाराज दशरथ अपने कक्ष में पुत्र के अभाव में विचरण करते रहे इसी बीच दासियों ने महाराज के कक्ष में आकर के पुत्र होने की सूचना देती है। 

महाराज इतना सूनते ही दास और दासियों को हीरे जवाहरात लुटाया। इसी क्रम में अयोध्या के नर-नारियों ने ‘‘जुग जुग जियसू ललनवा भवन क भाग जागल हो‘‘ सम्बन्धित शोहर एवं मांगलिक गीत महाराज के पास आकर के सूनाया। उधर देवतागण श्रीराम के जन्म की सूचना पाकर आयोध्या में आकर भय प्रकट कृपाला, दीन दयाला कौशल्या हितकारी सम्बन्धि स्तुति करके अपने धाम के लिए प्रस्थान कर गये। जब महर्षि विश्वामित्र ने रामजन्म की सूचना सूने तो वे महाराज दशरथ से यज्ञ हवन सम्पन्न कराने के लिए राम-लक्ष्मण को मांगा। 

महाराज ने राम-लक्ष्मण को विश्वामित्र के साथ यज्ञ रक्षा के लिए भेजते है। रास्ते में उन्होने घोर जंगल में एक पदचिन्ह देखा, उसके बारे में गुरू विश्वामित्र से पुछा तो गुरूदेवन ने बताया कि हे राम यही ताड़का वन है। जो पदचिन्ह तुम देख रहे हो वह ताड़का राक्षसी का पदचिन्ह् है। इसके बाद उन्होने श्रीराम से कहा कि इसका वध करा डालों श्रीराम ने गुरूदेव के आज्ञानुसार लड़का का वध किया। 

इस दृश्य को देखकर दर्शक भावविभोर हो गये और जय श्रीराम के नारे लगाने लगे। इस मौके पर अध्यक्ष दीनानाथ गुप्ता, उपाध्यक्ष श्री प्रकाश चन्द्र श्रीवास्तव, विनय कुमार सिंह, मंत्री ओमप्रकाश तिवारी बच्चा, संयुक्त मंत्री लक्ष्मीनारायण, उपमंत्री लव कुमार त्रिवेदी उर्फ बड़ें महाराज, कार्यवाहक प्रबन्धक बीरेश राम वर्मा,कोषाध्यक्ष अभय कुमार अग्रवाल, विजय कुमार मोदनवाल, अनुज अग्रवाल आदि उपस्थित थे।

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