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गाजीपुर: शहीदों के प्रतिमा पर माल्यार्पण कर लिया गया एकता व अखंडता का संकल्प

गाजीपुर न्यूज़ टीम, गाजीपुर आज देश के दो महान क्रांतिकारी चन्द्रशेखर आजाद व बाल गंगाधर तिलक जी की जयंती पीजी कालेज परिसर में स्थापित चन्द्रशेखर आजाद की प्रतिमा पर माल्यर्पण कर उनकी जीवनी पर प्रकाश डाल कालेज के विद्यार्थियों व शिक्षकों ने देश की आजादी एकता व अखण्डता की रक्षा का संकल्प लिया। इस अवसर पर कालेज के प्रचार्य डॉ अशोक सिंह जी ने कहा कि बाल गंगाधर तिलक जी का जन्म 23 जुलाई 1856 व चन्द्रशेखर आजाद जी का जन्म 23 जुलाई 1906 को हुआ था, दोनों का मानना था कि आजादी के लिये बलिदान आवश्यक है। सन 1922 में गांधी जी द्वारा असहयोग आंदोलन को अचानक बन्द कर देने के कारण चन्द्रशेखर जी की विचारधारा में बदलाव आया और वे क्रांतिकारी गतिविधियों से जुड़ कर हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन के सक्रिय सदस्य बन गए। इस संस्था के माध्यम से उन्होंने राम प्रसाद बिसिमल के नेतृत्व में 09 अगस्त 1925 को काकोरी कांड किया और फरार हो गए। 

भूगोल विभाग के प्रमुख बालेश्वर सिंह जी ने बताया कि जब 15 साल के आजाद को जज के सामने पेश किया गया तो उन्होंने ने जज के नाम पूछने पर कहा कि मेरा नाम आजाद है, मेरे पिता का नाम स्वतंत्रता है ओर मेरा पता जेल है इससे जज भड़क गया और आजाद को 15 बेतों की सजा सुनाई गई। यही से उनका नाम पड़ा आजाद। छात्र नेता गर्वजीत सिंह कक्कू ने बाल गंगाधर तिलक जी के जीवनी पर प्रकाश डाला तिलक ने अंग्रेजी में मराठा दर्पण व मराठी में केसरी नाम से दो दैनिक समाचार पत्र शुरू किए जो जनता में बहुत लोकप्रिय हुआ। तिलक ने अंग्रजी शासन की कुरता और भारतीय संस्कृति के प्रति हीन भावना की बहुत आलोचना की। उन्होंने मांग की अंग्रेज सरकार तुरन्त भारतीयों को पूर्ण स्वराज दे । 

उनके समाचार पत्र केसरी में छपने वाले लेखों की वजह से कईं बार जेल जाना पड़ा। छात्र नेता शंशाक तिवारी ने कहा कि तिलक भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में शामिल तो हुए लेकिन जल्द ही कांग्रेस के नरम रवैये के विरुद्ध हो गए, 1907 में कांग्रेस गरम दल और नरम दल में विभाजित हो गई। गरम दल में तिलक के साथ लाला लाजपत राय और विपिन चन्द्र पाल शामिल थे। इन तीनो को लाल- बाल-पाल के नाम से जाना जाने लगे। छात्र नेता ब्रजेश सिंह शेरू ने कहा कि छात्रों की महापुरुषों की जीवनी पढ़ उनके दिये गए मार्ग पर चलना चाहिए व उपदेशो को जीनव में स्मरण करना चाहिए। 

ये महापुरषो ने हमे अपने प्राणों का आहुति देकर आजादी दिलवाई है। इस अवसर पर कालेज के शिक्षकगण विजय कुमार सिंह, डॉ राघवेंद्र पाठक जी, डीके सिंह जी, श्रीकांत पांडेय, डॉ यशवंत सिंह पुस्तकालय मंत्री प्रमोद कुशवाहा राहुल मौर्य, प्रियेश चन्दन सिंह, दुष्यंत सिंह, विक्रांत मौर्य, अभिनंदन केसरी, दीपक उपाध्याय, अभिनव राय, अभिषेक मदेशीय, हिमालय जयसवाल, सत्यम राय, शिवम पांडेय, दीपक पाल, हिमांशु गुप्ता आदि लोग मौजूद रहे।

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