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गाजीपुर: गाजीपुर संसदीय में मनोज सिन्हा पीछे, बसपा के अफजाल अंसारी लगातार आगे

गाजीपुर न्यूज़ टीम, गाजीपुर संसदीय सीट के लिए सुबह 8 बजे से मतगणना शुरू हो चुकी है। जंगीपुर मंडी परिसर में बने स्ट्रांग रूम में मतगणना हो रही है। पहला ईवीएम खुलते ही भाजपा को झटका लगा है। दोपहर डेढ़ बजे तक बसपा के अफजाल अंसारी भाजपा के मनोज सिन्हा से आगे चल रहे थे। भाजपा के मनोज सिन्हा को 74748 मत, बसपा के अफजाल अंसारी को 93316 वोट और कांग्रेस के अजीत कुशवाहा को 3600 मत मिले।

गाजीपुर की कुल 7 विधानसभा सीटों की मतगणना चक्रवार होगी, जिनमें सिर्फ 5 ही गाज़ीपुर लोकसभा में है जबकि यहां की दो विधानसभा बलिया लोकसभा में है। जखनियां- 36 चक्र, जमानियां- 31 चक्र, सैदपुर – 29 चक्र, जंगीपुर – 28 चक्र, सदर – 27 चक्र मतगणना होगी। बलिया की जहूराबाद – 31 चक्र और मुहम्मदाबाद – 34 चक्र मतगणना होगी।

परमवीर चक्र विजेता वीर अब्दुल हमीद की धरती गाजीपुर को सेना को सबसे ज्यादा सैनिक देने वाला जिला भी माना जाता है। इस धरती का अपना मिजाज है। अपना तेवर है। उसी तरह के तेवर वाले नेताओं को ही चुनना भी यहां का तेवर ही कहा जा सकता है। पहले लोकसभा चुनाव से लेकर 2014 तक अपने तेवरों को लेकर विख्यात नेताअों ने ही सांसद के रूप में गाजीपुर का प्रतिनिधित्व किया है। यहां से सांसद रहे विश्वनाथ सिंह गहमरी का तेवर इतिहास में दर्ज हुआ तो मनोज सिन्हा ने तीन बार जीतने के साथ ही गाजीपुर को विश्व के फलक पर स्थापित करने में भूमिका निभाई।

बाहुबलियों के क्षत्रपों से जुड़ी यह सीट हमेशा ताकतवर नेताओं के कब्जे में रही है। कभी सत्ता की हनक तो कभी काम के बल पर नेता सदन पहुंचे। कम्युनिष्ठों का गढ़ माने जाने वाला कब समाजवादी हो चला पता ही नहीं चला। फिर समाजवादी लहर में कई साल तक साइकिल रफ्तार में चलती रही। हालांकि बीच में दो बार मनोज सिन्हा भगवा दल से चुनाव जीते और 2019 में मोदी लहर के साथ तीसरी बार सदन पहुंचे।

मनोज सिन्हा से पहले सपा के राधे मोहन सिंह, अफज़ल अंसारी, पूर्व कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश सिंह गाजीपुर से चुने गए। इससे पहले भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के सांसद विश्वनाथ गहमरी ने पूर्वांचल की दशा पर सदन में ऐतिहासिक भाषण देकर सबका ध्यान खींचा। जगदीश कुशवाहा निर्दलीय लड़कर संसद पहुंचे। ज़ैनुल बशीर को भी जनता ने दो बार मौका दिया और संसद भेजा। भाकपा से दो बार सांसद बने प्रखर नेता सरजू पांडे ने सदन में अपनी धाक जमाई। समूचे पूर्वांचल में राजनीतिक प्रेरणास्रोत सरजू पांडे से पीएम नेहरू भी प्रभावित रहते थे। पहले सांसद हुए हर प्रसाद पाण्डेय ने दो बार अपना परचम लहराया। इन सभी ने क्षेत्र के तमाम मुद्दे प्रमुखता से उठाए।

ऐसा रहा राजनेताओं का चुनावी सफर
1951 के चुनाव में कांग्रेस के हर प्रसाद सिंह अपने निकटतम प्र्रतिद्वंदी विश्वनाथ सिंह गहमरी के मुकाबले 3376 मतों के अंतर से चुनाव जीते थे। उन्हें 52809 तथा विश्वनाथ सिंह गहमरी का 49433 मत प्राप्त हुए थे। इसके बाद 1957 में कांग्रेस के हर प्रसाद दोबारा 9876 मतों से बाजी मारने में सफल हुए और लगातार दूसरी बार विश्वनाथ सिंह गहमरी को हार का मुंह देखना पड़ा। हर प्रसाद को 61523 तथा विश्वनाथ सिंह गहमरी का 41647 मतों से संतोष करना पड़ा था। 1962 में कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में विश्वनाथ सिंह गहमरी मैदान में उतरे और अपने निकटतम प्रतिद्वंदी सीपीआई के हर प्रसाद सिंह के मुकाबले 36863 मतों के अंतर से चुनाव जीत गए। उन्हें 77046 तथा हर प्रसाद को 40183 ही मत मिले।

सबसे रोचक चुनाव 1967 के चुनावी अखाड़े में सरजू पांडेय ने पहली दफा इस सीट पर सीपीआई का खाता खोला और अपने निकटतम प्रतिद्वंदी पूर्व सांसद विश्वनाथ सिंह गहमरी के मुकाबले वह 3240 मतोें के अंतर से चुनाव में बाजी मारी। उन्हें 94266 तथा पूर्व सांसद गहमरी को 91026 ही मत मिला।

1971 में इस सीट पर दूसरी बार भी सीपीआई का ही कब्जा हो गया और सरजू पांडेय 65493 मतों के अंतर से चुनाव जीत गए। उन्हें 135703 तथा उनके निकटतम प्रतिद्वंदी रहे श्रीनारायण सिंह को 70210 ही मत प्राप्त हुआ। 1977 में इस सीट पर जनता पार्टी का कब्जा हो गया। जनता पार्टी से गौरी शंकर राय सांसद चुन लिए गए। उन्हें 195268 तथा निकटतम प्रतिद्वंदी रहे कांग्रेस के जैनुल बशर को 100913 ही मत मिला। यानी गौरीशंकर राय 94355 मतों के अंतर से चुनाव जीत गए।

इसी प्रकार 1980 और 1984 में कांग्रेस के जैनुल बशर क्रमश: 5291 तथा 70561 मतों के अंतर से चुनाव जीतने में सफल रहे। 1980 में उन्हें 125297 तथा निकटतम प्रतिद्वंदी पूर्व सांसद सरजू पांडेय को 120006 मत मिला। 1984 में जैनुल बशर को 167194 तथा निकटतम प्रतिद्वंदी रहे लोकदल के जगदीश कुशवाहा 96633 मत मिला था।

1991 में सीपीआई का फिर से इस सीट पर दबदबा कायम हो गया। सीपीआई के विश्वनाथ शास्त्री 32294 मतों के अंतर से चुनाव जीत गए। उन्हें 191339 तथा निकटतम प्रतिद्वंदी रहे भाजपा के मनोज सिन्हा को 159045 मतों से ही संतोष करना पड़ा था।

1996 में भाजपा के मनोज सिन्हा ने इस सीट पर अपनी हार का बदला ले लिया। वह 27174 मतों के अंतर से चुनाव जीते। उन्हें 275706 तथा दूसरे स्थान पर रहे बसपा के युनूस को 170207 ही मत मिला। 1998 में सपा से ओमप्रकाश सिंह 17173 मतों के अंतर से चुनाव जीत गए। उन्हें 265705 तथा दूसरे स्थान पर रहे भाजपा के पूर्व सांसद मनोज सिन्हा को 248532 मतों से ही संतोष करना पड़ा।

पांच साल बाद 1999 में हुए चुनाव में भाजपा के मनोज सिन्हा फिर इसी सीट पर बाजी मार गए। इस बार वह 11033 मतों के अंतर से चुनाव जीते। उन्हें 240592 तथा सपा के ओमप्रकाश सिंह को 229559 ही मत मिला। 2009 में सपा से राधेमोहन सिंह तथा सपा छोड़कर बसपा में शामिल हुए पूर्व सांसद अफजाल अंसारी के बीच मुकाबला हुआ। इसमें सपा के राधेमोहन सिंह 69309 मतों के अंतर से बाजी मार गए। उन्हें 379233 तथा उनके निकटतम प्रतिद्वंदी रहे बसपा के अफजाल अंसारी को 309924 मत पाकर हार का मुंह देखना पड़ा। 2014 में भाजपा प्रत्याशी मनोज सिन्हा फिर जीते।

सबसे अधिक मतों से अब तक जीते अफजाल अंसारी
गाजीपुर। वर्ष 1951 से अब तक के चुनावी इतिहास में गाजीपुर लोकसभा सीट पर सबसे अधिक वोटों से सपा से अफजाल अंसारी जीते। सांसद रह चुके भाजपा के मनोज सिन्हा को हार का सामना करना पड़ा। वर्ष 2004 के चुनाव में अफजाल अंसारी ने उन्हें करारी शिकस्त देते हुए 226777 मतों से पराजित किया था। यह रिकार्ड बन गया और अब तक कोई इसे तोड़ नहीं सका। वर्ष 2004 में गाजीपुर सीट पर सपा और भाजपा के बीच सीधी टक्कर हुई थी। सपा प्रत्याशी अफजाल अंसारी को 415687 मत मिले थे जबकि भाजपा के पूर्व सांसद मनोज सिन्हा को महज 188910 ही मत प्राप्त हुए थे। लिहाजा उन्हें 226777 मतों से उन्हें सबसे बड़ी हार मिली और अफजाल अंसारी ने जीत-हार के मतों के अंतर का सबसे बड़ा रिकार्ड बनाया।

तीन बार जीत चुके हैं मनोज सिन्हा
गाजीपुर संसदीय क्षेत्र से मनोज सिन्हा सांसद हैं और वह केंद्र सरकार में मंत्री हैं। मनोज सिन्हा 3 बार यहां से लोकसभा चुनाव जीत चुके हैं। 2014 के लोकसभा चुनाव में मनोज सिन्हा ने सपा की प्रत्याशी शिवकन्या कुशवाहा को 32,452 मतों के अंतर से हराया था। चुनावी समर में 18 उम्मीदवार थे जिसमें मनोज सिन्हा को 31.11 फीसदी यानी 3,06,929 वोट मिले जबकि दूसरे स्थान पर रही शिवकन्या को 2,74,477 (27.82 फीसदी) वोट हासिल हुए थे। वहीं 2009 के लोकसभा चुनाव में सपा के राधे मोहन सिंह ने बसपा के अफजल अंसारी को हराया था। अफजल अंसारी ने 2004 के चुनाव में समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ा था और विजयी रहे थे।
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