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गाजीपुरः वाइल्ड लाइफ की टीम ने कहा, गंगा की तलहटी में जमी है पॉलीथिन की परत

गाजीपुर न्यूज़ टीम, गाजीपुर तीन दिवसीय दौरे पर गाजीपुर में पर्यावरण के हालात जानने देहारादून से पहुंची वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट आफ इंडिया की टीम ने पर्यावरण के हाल को कैद किया। भोर से लेकर सूर्यास्त तक वायु की गुणवत्ता परखी और प्रदूषण का स्तर जाना। जमानियां में तीन जगह गंगा का जलस्तर और पानी की गुणवत्ता जांची। इससे पहले भारतीय वन्य जीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई) और नेशनल ज्योग्राफिक सोसायटी की ओर से गंगाजल में पॉलीथीन, थैलियों और प्लास्टिक की जांच की थी।

जैव विविधता के प्रति जागरूकता बढ़ाने को लेकर वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया देहरादून की टीम गाजीपुर आई है। किसानों, सरपंचों व लोगों को जैव विविधता के बारे में जागरूक किया। गाजीपुर में तीन दिन पहले देहरादून से पहुंची वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट आफ इंडिया, देहरादून की टीम ने मंगलवार को भी अभियान जारी रखा।

टीम द्वारा गंगा के लंबवत ट्रान्जैक्टर डालकर वन्यजीवों, वनस्पतियों,फसलों एवं आबादी व जल स्तर का सर्वेक्षण कार्य किया गया। गंगा और कर्मनाशा के किनारे रिकार्डिंग की। टीम ने बताया कि पौराणिक रूप से यह शहर व क्षेत्र जैव विविधता से जुड़ा हुआ है। इस क्षेत्र में क्या-क्या वस्तुएं, जीव-जंतु, मिट्टी व पेड़-पौधे हुआ करते थे या अब हैं इस सबकी जानकारी रजिस्टर में दर्ज की जाएगी ताकि आने वाली पीढि़यों को इस सब की जानकारी प्राप्त हो सके। 

जांच के बाद अब तक जुटाए डाटा के आधार पर टीम के सदस्यों ने बताया कि वर्तमान समय में कीटनाशक दवाइयों व खादों का अंधाधुंध प्रयोग हो रहा है जोकि गाजीपुर के वातावरण में दिखा। हालात मानव स्वास्थ्य व वातावरण के लिए अत्यंत खतरनाक है और इन दवाइयों का जीव-जंतुओं पर भी गहरा बुरा असर पड़ रहा है।  

जिला वन अधिकारी ने बताया कि केंद्र सरकार ने वर्ष 2002 में जैव विविधता अधिनियम पारित किया था और उसमें निर्देश जारी किए गए थे कि जैव विविधता के स्रोतों को बचाना है। इसको लेकर केंद्र स्तर पर नेशनल बायोडायवर्सिटी अथॉरिटी (एनबीए) तथा प्रदेश स्तर पर स्टेट बायोडायवर्सिटी बोर्ड (एसबीबी) का गठन किया गया था लेकिन इस तरफ कोई ध्यान नहीं दिया गया और ना ही इसके लिए कोई कमेटियां बनाई गई। डीएफओ के अनुसार गाजीपुर आई टीम कई मुद्दों पर डाटा जुटा रही है।

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