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उत्तर प्रदेश पुलिस की सीमा के साहस को सलाम : लॉकडाउन में बच्चे को गोद में लेकर सड़क पर कर रहीं ड्यूटी

गाजीपुर न्यूज़ टीम, लखनऊ कोरोना को हराने में हर कोई लगा है। लॉकडाउन के बीच डाक्टर से लेकर पुलिस तक अपने-अपने स्तर पर लोगों की सहायता करने में लगे हैं। इस बीमारी में पुलिस का एक अलग ही चेहरा देखने को मिल रहा है। कोई पुलिसकर्मी लॉकडाउन में भीड़ को नियंत्रित करने में लगा है तो कोई भूखे प्यासे लोगों को खाने खिलाने में जुटा है। यही नहीं लोग पुलिस को फोन करके घर के सामान आदि भी मंगा रहे हैं। इसी बीच लखनऊ के हजरतगंज में तैनात सिपाही सीमा का एक फोटो वायरल हो रहा है। इस फोटो में सीमा अपने बच्चे को गोद में लिए ड्यूटी कर रहीं हैं।  

सीमा ठाकुरगंज में रहती हैं और हजरतगंज में तैनात हैं। सीमा बताती हैं घर में कोई नहीं है। लॉकडाउन के कारण परिवार वाले उनके पास नहीं आ पा रहे हैं। वह यहां अकेल हैं। ऐसे में बच्चे को साथ रखना मजबूरी है, किसी के भरोसे नहीं छोड़ सकती। सीमा कहती हैं कोरोना वायरस को हराने के लिए हम सब लगे हैं। इसलिए लॉकडाउन में ड्यूटी करना हमारी प्राथमिकता है। हम किसी को ऐसे ही नहीं छोड़ सकते हैं। सीमा बताती हैं कि वह साढ़े सात किलोमीटर पैदल आती है। बच्चे को संभालने के लिए महिला कांस्टेबिल की भी  मदद ले रही हैं। 


42 दिन से नहीं गए घर :
कोरोना के चंगुल में फंसे लोगों की जिंदगी बचाने में डॉक्टर के साथ प्रयोगशाला में तैनात रिसर्च साइंटिस्ट और टेक्नीशियन की भूमिका भी अहम है। ये लोग दिन रात मेहनत कर प्रदेश भर से आने वाले नमूनों की जांच कर रहे हैं। जांच ही इलाज की दिशा तय कर रही है।

केजीएमयू प्रशासन ने माइक्रोबायोलॉजी विभाग की बीएसएल थ्री लैब में कार्यरत कर्मचारियों के बेहतर काम को साझा किया। केजीएमयू प्रवक्ता डॉ. सुधीर सिंह और माइक्रोबायोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. अमिता जैन के मुताबिक फरवरी के पहले सप्ताह से बीएसएल थ्री प्रयोगशाला में कोरोना की जांच चल रही है। खास तरीके की इस लैब में बाहर की हवा से लेकर पानी तक साफ होकर जाता है। जरा सी चूक पूरे शहर में वायरस फैला सकती है। इसलिए अत्याधिक सावधानी बरती जा रही है।


केजीएमयू में अब तक कोरोना के शक में 1250 नमूनों की जांच हुई है। कोरोना की पुष्टि से पहले तक उसे एक फ्लू के तौर पर आंका जाता है। खतरनाक वायरस की कई चरणों में जांच होती है। इसमें रिसर्च सांइटस्टि, लैब टेक्नीशियन और प्रयोगशाला सहायक की भूमिका अहम है। ये लोग 42 दिनों से घर नहीं गए हैं। अस्पताल के क्वारेंटाइन में रहकर लोगों की जिंदगी बचा रहे हैं।

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