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रेलवे ने 5 साल से अधिक उम्र के बच्चों से भी वसूला स्लीपर का पूरा किराया

गाजीपुर न्यूज़ टीम, लखनऊ। गुजरात के आणंद में आगरा के रहने वाले ऋषि मार्बल लगाने का काम करते हैं। लॉकडाउन में उनका भी पूरा परिवार फंस गया। रेलवे ने आणंद से लखनऊ के लिए श्रमिक स्पेशल ट्रेन चलायी। ऋषि ने परिवार के सभी सदस्यों का नाम दे दिया। कुल आठ सदस्यों में पांच साल से अधिक उम्र का यश और उसकी बहन साक्षी भी थी। रेलवे ने छह और सात साल के इन बच्चों का टिकट भी फुल फेयर पर छाप दिया। जब आणंद में तहसीलदार ने उनको यह टिकट सौंपा तो दोनों बच्चों का भी 560 रुपये की दर से पूरा किराया ले लिया गया। लॉकडाउन में फंसे प्रवासी श्रमिकों को लेकर गुजरात से तीन और पंजाब के जालंधर से एक श्रमिक स्पेशल ट्रेनें लखनऊ आयीं। इन श्रमिक स्पेशल ट्रेनों से करीब 4600 प्रवासी लखनऊ आए। यहां से उनको परिवहन निगम की बसों से खोजा गया।

आणंद से सुबह आठ बजे प्रवासी श्रमिकों को लेकर ट्रेन चारबाग स्टेशन पहुंची। इस ट्रेन से आने वाले श्रमिकों का पंजीकरण कर गुजरात सरकार ने उनके क्वारांटाइन वाले स्थानों पर अपनी बसें खोजी। वहां से बसों से आणंद स्टेशन लाया गया। यहां उनको खाना व पानी के साथ छाछ भी पीने को दिया गया। श्रमिकों के साथ आए सभी पांच से 11 साल के बच्चों का भी पूरा स्लीपर क्लास का किराया और 30 रुपये सुपरफास्ट चार्ज व 20 रुपये अतिरिक्त शुल्क भी किराए में जोड़ा गया। दरअसल रेलवे का नियम है कि यदि किसी बच्चे को सीट आवंटित की जाती है तो उसका पूरा किराया लिया जाता है। सीट न लेने की दशा में पांच से 11 साल तक की उम्र के बच्चों का किराया आधा ही होता है। रेलवे ने गुजरात के आणंद, वीरमगाम और बड़ोदरा और पंजाब के जालंधर जिला प्रशासन से जो लिस्ट ली। उसके अनुसार छोटे बच्चों को भी सीटों का आवंटन कर उनका फुल किराए का टिकट छाप दिया। यह टिकट जिला प्रशासन को सौंपा गया। जिस पर दर्ज किराया वहां के जिला प्रशासन ने यात्रियों से वसूला।

सरकार की सराहना की
इटावा के अवधेश सिंह तोमर ने बताया कि मैं वहां पिछले एक महीने बुरी तरह फंसा हुआ था। मेरे पास कोई काम नहीं था। पास में कुछ रुपया था जो खत्म हो गया था। यूपी सरकार ने जो नंबर जारी किए उसपर संपर्क किया और फिर किराया देकर ही सही मैं लखनऊ तक पहुंच सका।

मजदूरी भी बंद
कासगंज के घनश्याम बताया कि गुजरात में रहकर मजदूरी करते थे। वहां पर काम तो बंद हो गया है। अब अपने घर वापस आकर कुछ महीने यहीं पर ही काम की तलाश करूंगा। यदि कुछ दिन और रुक जाते तो शायद हालत और बिगड़ सकती थी।

घरवालों की बढ़ी थी चिंता
कासगंज के रूप सिंह ने बताया कि गुजरात में कई दिनों से कोरोना के मामले भी सामने आ रहे थे। यहां घर पर सभी मुझे लेकर परेशान थे। लेकिन सरकार इतनी जल्दी बिना किसी असुविधा के हमको बाहर ले आएगी यह सोचा भी न था।


नहीं जाऊंगा वापस
शामली के गुरफान  ने बताया कि जिन हालातों में मैं वहां से निकलकर अपने घर आया हूं। ऐसे में अब वापस तो नहीं जाऊंगा। अपने ही प्रदेश में रोजगार के लिए कोशिश करूंगा। कुछ भी काम करके अपने परिवार का पालन करूंगा।

रास्ते में थे पानी के इंतजाम
प्रयागराज  के रविशंकर ने बताया कि लंबी दूरी की ट्रेन थी रेलवे ने हमको इंतजार नहीं कराया। रास्ते में पानी की भी व्यवस्था थी। खाने के पैकेट हम साथ लेकर चले थे। लखनऊ में भी हमको खाना और पानी दिया गया।

भूखे व प्यासे यात्रियों के लिए लखनऊ राहत जंक्शन
बुधवार को चारबाग स्टेशन खासा व्यस्त रहा। यहां गुजरात के आणंद और फिर वीरमगाम से श्रमिक स्पेशल ट्रेन आयी तो वहीं गुजरात और महाराष्ट्र के अलग अलग क्षेत्रों से गोरखपुर व बिहार की ओर ट्रेनें भी रवाना हुई। इन ट्रेनों के यात्रियों के लिए चारबाग स्टेशन राहत जंक्शन बना रहा। सूरत से गोरखपुर जा रहे 1200 यात्रियों के लिए लखनऊ में इतनी ही एक लीटर रेल नीर की पानी की बोतल और खाने के पैकेट मुहैया कराए गए। स्टेशन निदेशक सुदीप सिंह ने मौके पर सभी को खाना और पानी की व्यवस्था सुनिश्चित करायी। जबकि जीआरपी इंस्पेक्टर सोमवीर सिंह और आरपीएफ पोस्ट कमांडर डीएस राणा ने भी यहां उतरकर बाहर जाने का प्रयास करने वाले लोगों को नियंत्रित करने के लिए कानून व्यवस्था को बनाए रखने में अहम जिम्मेदारी निभायी।

आज आएंगी तीन और ट्रेनें
प्रवासी श्रमिकों को लेकर सुबह छह बजे बेंगलूर, सुबह आठ बजे खुसावल और फिर सुबह 10 बजे एर्नाकुलम से श्रमिक स्पेशल ट्रेनें लखनऊ आएंगी। इन ट्रेनों से प्रदेश के करीब 3500 श्रमिक लखनऊ आ रहे हैं।

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