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गाजीपुर: पीएम किसान निधि का लाभ ले रहे फर्जी किसानों पर शिकंजा - जिला कृषि अधिकारी

गाजीपुर न्यूज़ टीम, गाजीपुर। किसानों की मदद के लिए केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई पीएम किसान निधि योजना में भी खूब फर्जीवाड़ा हो रहा है। बहुत से पात्र किसानों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है, जबकि उनकी जगह तमाम अपात्र लोगों के खाते में इसका पैसा भेजा जा रहा है। लगातार आ रही शिकायतों के बाद अब इसकी जांच शुरू हो गई है। ब्लाक स्तर पर अधिकारियों व कर्मचारियों को इसमें लगाया गया है। फर्जी तरीके से योजना का लाभ लेने वाले लोगों से इसकी रिकवरी की जाएगी।

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत किसानों को 500 रुपये प्रति महीना दिया जाता है। यह राशि हर चार महीने पर दो हजार रुपये पात्र किसानों के बैंक खाते में सीधे भेजी जाती है। यह पूरी प्रक्रिया आनलाइन हे लेकिन इसमें भी जालसाजों ने गड़बड़ी करनी शुरू कर दी। इसके चलते बहुत से किसान पात्र होते हुए भी इससे वंचित हो गए और अन्य लोग अपात्र होते हुए भी इसका लाभ ले रहे हैं। पीएम के निर्देश पर चुनाव से पहले यह धनराशि आनन-फानन में किसानों के खाते में भेजी गई थी। जिसका सत्यापन ढंग से नहीं हो पाया था। इसके लेकर किसान जब विभाग में शिकायत करते हैं तो तकनीकी गड़बड़ी बताकर ठीक करने का आश्वासन दिया जाता है। इसके बाद भी यह सिलिसला बना हुआ है। 

हालांकि कुछ लोगों के गड़बड़ डाटा ठीक भी कर दिए गए लेकिन अभी भी सैकड़ों किसान इसके लिए विभाग का चक्कर काट रहे हैं। लेकिन अब ऐसे 'फर्जी किसानों' पर सरकार सख्त है। वो ऐसे लोगों से यह रकम वापस लेने के लिए तैयारी कर ली है ताकि इसका पैसा सही किसानों तक पहुंचे। पीएम किसान सम्मान निधि की पांच किस्त मिल चुकी है। जबकि छठवी किस्त अगस्त माह में मिलने वाली है, लेकिन अब सरकार ने फर्जी रूप से इस योजना में लाभ लेने वाले लोगों से रिकवरी करने का आदेश दे दिया है। इस योजना का लाभ चार लाख 18 हजार किसान ले रहे हैं। जिसमें से करीब एक लाख किसानों के फर्जी दस्तावेज लगे हैं। इनमें से अधिकतर नौकरी पेशा वाले लोग या फिर गलत तरीके से एक ही परिवार में कई लोग लाभ ले रहे हैं। जांच के आदेश के बाद ऐसे लोगों में खलबली मची हुई है।

पीएम किसान सम्मान निधि योजना का पैसा जिन अपात्रों के खाते में पैसा चला गया है, वह बैंक में चालान के माध्यम से सरकारी कोष में जमा कर सकते हैं। यदि ऐसे लोग धन वापसी नहीं करते है, तो उनको नोटिस भेजकर रिकवरी की जाएगी। - मृत्युंजय सिंह, जिला कृषि अधिकारी

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