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पढ़ाई छुड़ाकर परिवार करवाना चाहता था शादी, लेकिन घर से अलग रहकर PCS परीक्षा में सफल हुई संजू

गाजीपुर न्यूज़ टीम, मेरठ. हम 'बेटी पढे़गी, बेटी बढ़ेगी' का नारा लगाते हैं. लेकिन समाज का एक ऐसा वर्ग भी है जो बेटी को दूसरे घर की अमानत मानता है. इसलिए कभी उसकी पढ़ाई बीच में ही रुकवा दी जाती है तो कभी जल्द से जल्द उसकी शादी यह कहते हुए कर दी जाती है कि अब जो भी करना है ससुराल जाकर करना. लेकिन उत्तर प्रदेश के मेरठ की एक बेटी ने अपने परिवार की इस सोच को नहीं माना. उसने वर्ष 2004 में ग्रेजुएशन किया. 
इसके बाद घरवाले उसकी शादी करना चाहते थे लेकिन वो आगे पढ़-लिख कर अफसर बनना चाहती थी. संजू नाम की इस लड़की ने अपने करियर को ज्यादा तरजीह दी और परिवारवालों से कहा कि वो अभी शादी नहीं करेगी. घरवालों द्वारा शादी के लिए लगातार बनाए जा रहे दबाव के चलते एक दिन उसने घर छोड़ने का फैसला कर लिया. घर से बगावत कर अलग रहकर संजू ने वर्ष 2013 में सिविल सर्विसेज़ की तैयारी शुरू की. सात साल बाद उसका संघर्ष रंग लाया और उसने अपनी मेहनत और लगन से पीसीएस परीक्षा पास की.

संजू का जन्म ऐसे परिवार में हुआ जहां बेटियों की शिक्षा पसंद नहीं की जाती थी. वो बताती है कि परिवार की इस सोच की वजह से उसकी बड़ी बहन की शादी इंटर पास करने के बाद ही कर दी गई थी. इसलिए जैसे ही उसने इंटर पास किया तो घरवाले उसे आगे पढ़ने से मना करने लगे. संजू ने इसका विरोध किया तो उसे आए दिन घरवालों के गुस्से का सामना करना पड़ता था. लिहाजा एक दिन उसने घर छोड़ने का निर्णय लिया. अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए उसने कभी ट्यूशन पढ़ाया तो कभी प्राइवेट नौकरी की. लेकिन उसने अपनी तैयारी नहीं छोड़ी. आखिरकार उसकी मेहनत रंग लाई और वर्षों की तपस्या का फल उसे इस कामयाबी से मिला. पीसीएस परीक्षा पास करने वाली संजू अब आईएएस की तैयारी कर रही हैं. संजू की ख्वाहिश है कि वो मेरठ में ही एक दिन कलेक्टर बनकर आए.

संजू का कहना है कि किस्मत कह रही थी कि हम आगे बढ़ने नहीं देंगे. लेकिन मैं कह रही थी कि हम अपने हाथ की लकीरों को खुद बनाएंगे और आखिरकार मैंने अपनी तदबीर से अपनी तकदीर लिख दी. वहीं संजू के गुरु अभिषेक शर्मा का कहना है कि उसकी सफलता समाज की उस सोच की हार है जहां बेटियों को बेटों से कमतर आंका जाता है.

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