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Ghazipur: अस्पताल खुद बीमार, मरीजों का कैसे करें उपचार

गाजीपुर न्यूज़ टीम, गाजीपुर. जमानियां, गंधु तालुका क्षेत्र लगातार स्वस्थ्य सुविधाओं के मामले में पिछड़ता जा रहा है। यहां कोई बड़ा अस्पताल नहीं होने से मरीजों को काफी परेशानी झेलनी पड़ती है। वहीं अभईपुर गांव स्थित न्यू प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र खुद बीमार पड़ा है। इसे सुधारने के तमाम दावे विभागीय उच्चाधिकारियों द्वारा किए जा रहे हैं, लेकिन आज तक कोई सुधार नहीं हो सका। वहीं मरीजों को 12 किमी की दूरी तय कर जमानियां उपचार के लिए आना पड़ता है।

गंधु तालुका क्षेत्र के अभईपुर गांव स्थित न्यू प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का लोकार्पण जब 15 जनवरी 2011 को तत्कालीन मुख्यमंत्री मायावती ने किया तो ग्रामीण सहित क्षेत्रवासियों में उम्मीद जगी थी कि अब स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए इधर-उधर जाना नहीं पड़ेगा, लेकिन विभागीय उच्चाधिकारियों व जनप्रतिनिधियों की उदासीनता से ग्रामीणों की उम्मीद पर पानी फिर गया। धीरे-धीरे अस्पताल बदहाली की ओर अग्रसर होने लगा। स्थिति यह हो गई है कि अस्पताल पर न तो पर्याप्त दवा और न ही कर्मचारी। केवल फार्मासिस्ट के भरोसे ही अस्पताल चल रहा है। ग्राम प्रधान बबलू सिंह ने बताया कि बदहाल अस्पताल के स्वरूप को ठीक करने के लिए कई बार अधिकारियों से लिखित व मौखिक रूप में कहा गया लेकिन उनके ऊपर कोई फर्क नहीं पड़ रहा है।

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दरवाजा और खिड़की भी टूटा

अभईपुर न्यू प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की बाउंड्रीवाल वर्षो से गिरी हुई है। मुख्य द्वार पर लगा लोहे का गेट दीवार संग कब गिर जाए, यह कहना बड़ा मुश्किल है। खिड़कियों के शीशे और दरवाजे भी टूट चुके हैं। भवन भी जर्जर हो गया है। भगवान भरोसे ही अस्पताल का संचालन हो रहा है। परिसर में घास फूंस उग गए है। अस्पताल परिसर में बना आवास भी रहने लायक नहीं रह गया है।


एक वर्षो से चिकित्सक विहीन केंद्र

अभईपुर स्वास्थ्य केंद्र पर तैनात चिकित्सक का स्थानांतरण बीते नवंबर 2019 में हो गया। इसके बाद आज तक किसी चिकित्सक की तैनात विभागीय उच्चाधिकारियों ने नहीं की । चिकित्सक के नहीं होने से फार्मासिस्ट के भरोसे ही केंद्र संचालित हो रहा है। संविदा पर वार्ड ब्वाय व सफाईकर्मी की तैनाती हुई हैं।


पानी की व्यवस्था नहीं, शौचालय भी बदहाल

स्वास्थ्य केंद्र पर तैनात फार्मासिस्ट धर्मेंद्र सिंह ने बताया कि केंद्र पर प्रतिदिन 40 से 50 की संख्या में मरीज पहुंचते हैं, लेकिन पेयजल की व्यवस्था नहीं होने से मरीजों को सड़क पर पानी के लिए जाना पड़ता है। शौचालय की स्थिति तो ऐसी है कि कोई उसमें शौच के लिए जा नहीं सकता है।