पिता की सम्पत्ति बनी भाई-बहनों के रिश्तों में कच्ची डोर, जानिए कारण
गाजीपुर न्यूज़ टीम, गाजीपुर. हर वर्ष रक्षाबंधन और भैयादूज के दिन रिश्ते को अटूट बनाने का संकल्प लेने वाले भाइयों में सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले से अजीब घबराहट देखी जा रही है। पैतृक संपत्ति में बेटियों को भी हक संबंधी सुप्रीम फैसले के बाद रजिस्ट्री कार्यालयों में भाइयों की भागदौड़ बढ़ गई है। वे पैतृक संपत्ति की वसीयत कराने पहुंच रहे हैं। विभाग का फीडबैक है कि पिछले तीन माह के दौरान वसीयत कराने वालों की संख्या बढ़ी है। बनारस के रजिस्ट्री कार्यालय में हर हफ्ते वसीयत कराने कोई न कोई पहुंच रहा है।
यह स्थिति पूर्वांचल के सभी जिलों में है। अकेले आजमगढ़ में बीते दिसंबर में 30 आवेदन आए हैं जबकि दिसंबर-2019 में 15 आवेदन आए थे। मऊ में प्रतिमाह औसतन 20, गाजीपुर में 17, मिर्जापुर में 25, बलिया में 50 और चंदौली में 15 आवेदन आ रहे हैं। पिछले दिनों की तुलना में यह आंकड़ा दोगुना से अधिक हुआ है।
हिंदू उत्तराधिकार (संशोधन) कानून-2005 9 सितंबर 2005 से लागू है। इसके तहत पिता की संपत्ति में बेटी का बेटे के बराबर हक है। अगर पिता की मौत 9 सितंबर, 2005 से पहले हो गई हो तब भी बेटियों को पैतृक संपत्ति (खेती की जमीन) में अधिकार होगा। पहले पिता की मौत पर बेटी का पैतृक जमीन-जायजाद में अधिकार नहीं होता था। अगस्त-2020 में सर्वोच्च अदालत की तीन जजों की पीठ ने पिता की सभी सम्पत्तियों में बेटी को बराबर का हक देने का फैसला दिया। इसके बाद वसीयत कराने वालों की संख्या तेजी से बढ़ी है। पहले खेती की जमीन को छोड़ अन्य सम्पत्तियों पर हक होता था। लेकिन नये कानून में पिता की सभी सम्पत्तियों में बहन का अधिकार मिलने से भाई पैतृक सम्पत्तियों की वसीयत कराने लगे हैं। एआईजी-निबंधन एसके तिवारी बताया कि पिछले तीन-चार माह में वसीयत कराने वाले आवेदक बढ़े हैं।
बेटी कब पैदा हुई, कोई फर्क नहीं
हिंदू उत्तराधिकार (संशोधन) कानून, 2005 के अनुसार कोई फर्क नहीं पड़ता है कि बेटी का जन्म 9 सितंबर, 2005 से पहले हुआ है या बाद में। पिता की संपत्ति में उसका हिस्सा भाई के बराबर ही होगा। वह संपत्ति चाहे पैतृक हो या फिर पिता की अपनी कमाई से अर्जित। हिंदू लॉ में संपत्ति को दो श्रेणियों में बांटा गया है- पैतृक और स्व अर्जित। पैतृक संपत्ति में चार पीढ़ी पहले तक पुरुषों की वैसी अर्जित संपत्तियां आती हैं जिनका कभी बंटवारा नहीं हुआ हो। ऐसी संपत्तियों पर संतानों का, वह चाहे बेटा हो या बेटी, जन्मसिद्ध अधिकार होता है। यह भी प्रावधान है कि अगर बेटी की मृत्यु 9 सितंबर, 2005 से पहले हो जाए तो भी पिता की पैतृक संपत्ति में उसके बच्चों को हक मिलेगा।
