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Ghazipur: वसंत पंचमी आज, 328 स्थानों पर स्थापित होंगी प्रतिमाएं

गाजीपुर न्यूज़ टीम, गाजीपुर. नगर सहित ग्रामीण क्षेत्रों में वसंत पंचमी का पर्व मंगलवार को श्रद्धा के साथ मनाया जाएगा। ऐसे में सोमवार को विद्या की देवी मां सरस्वती पूजन की तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा चुका है। सभी स्कूलों और शिक्षण संस्थानों में मां सरस्वती की पूजा के साथ विद्यार्थियों द्वारा घरों में भी पूजा की जाएगी। जिले में कुल 328 स्थानों पर वाग्देवी की प्रतिमाएं स्थापित होंगी तो 744 स्थानों पर होलिका गाड़ी जाएंगी।

नए स्थान पर होलिका नहीं स्थापित हो इस पर नजर रखी जा रही है। कोविड को देखते हुए इस बार प्राय: घरों में ही पंडाल बनाकर मां सरस्वती की मूर्तियां रखी जाएंगी। उधर, विद्यालयों में भी वसंत पंचमी के मौके होने वाली पूजा को लेकर उत्साह रहा। नगर के सकलेनाबाद स्थित निर्माण स्थल से सोमवार की सुबह से ही मां सरस्वती की मूर्तियों को ले जाने का क्रम शुरू हो गया जो देर शाम तक चलता रहा। भक्त ट्रैक्टर ट्रालियों पर रखकर माता की मूर्ति को ले जा रहे थे। लोगों की पहली पसंद हंस पर बैठी माता की प्रतिमा होती है, जिसके बाद कमल के फूल पर विराजमान माता हैं। बंगाली संप्रदाय में इस शुभ दिन को लोग अपने बच्चे के पढ़ने और लिखने के लिए बेहद ही शुभ मानते हैं। छोटे बच्चे बड़ों की देखरेख में देवी सरस्वती की मूर्ति के सामने बैठकर पहला अक्षर लिखने की शुरुआत करते हैं। विद्यार्थी अपनी किताबें, नोटबुक और पेन मां की मूर्ति के सामने रखते हैं और सभी भक्तों के बीच मिठाई बांटते हैं।


शरद ऋतु का समापन

वसंत पंचमी के आते ही शरद ऋतु का समापन होता है। वसंत के साथ ही प्रकृति एक बार फिर खिल उठती है उसका सौंदर्य देखने लायक रहता है। पेड़-पौधों पर नई पत्तियां और फूल आते हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, वसंत पंचमी के दिन ही विद्या की देवी मां सरस्वती का जन्म हुआ था इसलिए वसंत पंचमी के दिन वाग्देवी की पूजा की जाती है।


शुभ मुहूर्त में पूजी जाएंगी विद्या की देवी

खानपुर : माघ माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी को मां सरस्वती का पूजन किया जाएगा। ज्योतिषाचार्य शुभम पांडेय बताते हैं कि शुभ मुहूर्त में सरस्वती पूजन के लिए कुल पांच घंटे 37 मिनट का समय मिल रहा है। मंगलवार को सुबह 6 बजकर 59 मिनट से दोपहर 12 बजकर 35 मिनट के बीच सरस्वती पूजा का मुहूर्त बन रहा है।


ऐसे करें पूजन-अर्चन

मां सरस्वती को पीले फूल अर्पित कर पूजा के समय मां सरस्वती की वंदना करें। वाद्ययंत्र और कापी किताबें रख बच्चों को भी पूजा स्थल पर बिठाएं। इस दिन बच्चों को प्रसाद स्वरूप उपहार में पुस्तक देना चाहिए। प्रकृति के छह ऋतुओं में वसंत ऋतु का विशेष महत्व है। ऋतुराज या मधुमास वसंत पंचमी प्रकृति के अद्भुत सौंदर्य, श्रृंगार और संगीत की मनमोहक ऋतु के आगमन की संदेश वाहक है।


बिजली तारों के नीचे कदापि न लगाएं होलिका, विवादित स्थल या बीच सड़क पर भी है मनाही

वसंत पंचमी के दिन कई स्थानों पर होलिकाएं गाड़ी जाएंगी। इसे लेकर पुलिस और बिजली विभाग सतर्क है। बिजली विभाग ने साफ किया है कि तारों के नीचे होलिका न गड़े,वहीं पुलिस प्रशासन नए स्थान पर होलिका न स्थापित हो इसे लेकर सजग है। इसकी अवहेलना करने पर सख्त कार्रवाई होगी। पुलिस प्रशासन ने साफ किया है कि किसी भी विवादित स्थल या बीच सड़क, बिजली तारों के नीचे दुकान गुमटी या रिहायशी मकानों के नजदीक होलिका नहीं बनाया जाएगा।


कुछ होलिकाएं लोग बिजली तारों के नीचे ही लगा देते हैं जिसे उनके जलाने के समय पर हादसा होने का खतरा बना रहता है। इसे लेकर इस बार विद्युत विभाग सतर्क हो गया है। अधीक्षण अभियंता विजय राज सिंह ने कहा कि सभी लाइनमैनों को जरूरी निर्देश दे दिए गए हैं। वे लोगों को सचेत करें कि बिजली के तार के नीचे होलिका न गाड़ें। अगर वे नहीं मानते हैं तो उनकी शिकायत जिला प्रशासन से की जाएगी। ऐसे करें पूजन-अर्चन


खानपुर: पंडित सुभाष दीक्षित के अनुसार होलिका दहन स्थान पर उत्तर मुखी होकर पूजन के समय रक्षा,रोली आम्र पल्लव के साथ गाय के गोबर के उपले और आम की सूखी लकड़ी रखकर पूजन किया जाता है। होलिका निर्माण में सरकंडे और अन्य लकड़ी डालकर सात बार परिक्रमा करके प्रतिदिन चालीस दिनों तक फाग गायन यानी होली के गीत गाए जाते हैं।

 
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