Ghazipur: अधिकारी और कर्मचारी गोद लेंगे टीबी के मरीज, ट्रैसिंग में जुटी टीम
गाजीपुर न्यूज़ टीम, गाजीपुर. गाजीपुर में टीबी मुक्त जिला बनाने के लिए प्रशासनिक और शासन स्तर पर कवायद जारी है। जिले में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी से लेकर कर्मचारी तक दो-दो टीबी मरीजों को गोद लेकर उनके पोषण और निरोग बनाने के अभियान का हिस्सा बनेंगे। 24 मार्च को विश्व टीबी दिवस कार्यक्रम का आयोजन शासन के निर्देश पर जिला अस्पताल गोराबाजार पर किया जाएगा। इसी आयोजन के मद्देनजर सोमवार को सीएमओ कार्यालय सभागार में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. जीसी मौर्य ने क्षय रोग से संबंधित सभी गतिविधियां मीडिया से साझा किया।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. जीसी मौर्य ने बताया कि राज्यपाल ने अधिकारी, कर्मचारी और जनप्रतिनिधियों से 18 वर्ष तक के टीबी के मरीजों को गोद लिए जाने का निवेदन किया गया था। सीएमओ ने 21 टीबी मरीजों को गोद लिया और टीबी के 2 एमडीआर मरीज को गोद लिया गया, जिनके पोषण की पूरी जिम्मेदारी मेरे द्वारा निभाई जा रही है। उन्होंने बताया कि जिन लोगों में टीबी के लक्षण दिखे, वह तत्काल अपने पास के स्वास्थ्य केंद्र या फिर जिला अस्पताल पहुंच निःशुल्क जांच करा सकते हैं। आशा और आंगनबाड़ी लोगों के घर-घर पहुंच कर टीबी के मरीजों को चिन्हित कर उनकी जांच करा रही है।
जनपद में 32 जगहों पर माइक्रोस्कॉपी जांच किया जाता है, जिसे डीएमसी भी बोला जाता है और इनके जांच उपरांत पुष्टि हो जाने पर इनकी दवा प्रारंभ कर दी जाती है। एसीएमओ डा. उमेश कुमार ने बताया कि जनपद में टीबी मरीजों की सुविधा के लिए 17 टीबी यूनिट स्थापित किए गए हैं। दो अतिरिक्त टीबी यूनिट खानपुर एवं गहमर में बनाया जाना प्रस्तावित है। इसके बन जाने के बाद मरीजों को सुविधा मिलना शुरू हो जाएगी। एमडीआर मरीजों के लिए जिला अस्पताल में चार बेड का डीआरटीबी वार्ड खोला गया है, जिसमें दो महिला और दो पुरुष के लिए आवंटित है। जिला क्षय रोग अधिकारी मनोज कुमार सिंह ने बताया कि जनपद में जिला चिकित्सालय, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मुहमदाबाद पर सीबीनाट जांच लैब है। साथ ही चार स्थान, जिसमें जिला चिकित्सालय, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भदौरा, सैदपुर और जखनिया में ट्रूनेट जांच लैब भी स्थापित किया गया है। उन्होंने बताया कि जिन मरीजों को आशा के द्वारा चिन्हित किया जाता है और उन्हें दवा खिलाया जाता है।
ऐसी आशा वर्कर को 1000 रुपया और एमडीआर के मरीजों को दवा खिलाने पर 5000 रुपए का इंसेंटिव का भी भुगतान किया जाता है। जिला कार्यक्रम समन्वयक मिथिलेश सिंह ने बताया कि टीबी मरीजों को पोषण योजना के अंतर्गत 500 रुपए प्रति माह 6 माह तक विभाग द्वारा भुगतान किया जाता है। जो अब तक जनपद के सभी टीबी मरीजों में एक करोड़ 56 लाख 94 हजार का भुगतान किया जा चुका है। बताया कि टीबी मरीजों की सूचना देने वाले इन्फॉर्मर को भी विभाग के द्वारा 1000 रुपया का इंसेंटिव भुगतान किया जा सकता है। यह इनफार्मर कोई भी हो सकता है। बताया कि वर्ष में दो बार सक्रिय टीबी खोज अभियान चलाया जाता है, जिसमें घर घर जाकर टीबी के लक्षण पूछे जाते हैं। इसी कार्यक्रम के अंतर्गत पिछले दिनों जिला कारागार, बाल सुधार गृह, अनाथालय, मदरसे आदि जगहों पर यह अभियान चलाया गया और इस अभियान में कुल 105 मरीज चिन्हित किए गए। बताया कि साल 2020 में एमडीआर मरीजों की संख्या 156 एवं 2021 में एमडीआर के मरीजों की संख्या 26 है। इस अवसर जिला क्षयरोग विभाग के सभी कर्मचारी मौजूद थे।
विश्व स्वास्थ्य संगठन टीबी मुक्त भारत 2030 तक करने की बात कर रहा है। जबकि प्रधानमंत्री 2025 तक टीबी मुक्त भारत बनाने का सपना देखे हैं। इसी सपने को हकीकत में तब्दील करने के लिए अनेकों कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं।
