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Indian Railways: फ्रेट कारिडोर पर दौड़ेंगे पूर्वोत्तर रेलवे के न्यू मोडिफाइड गुड्स वैगन

गाजीपुर न्यूज़ टीम, गोरखपुर. रेलवे के इंजीनियर कंडम हो चुके यात्री ट्रेनों के कोचों को न्यू मोडिफाइड गुड्स वैगन (एनएमजी) में बदलकर रेलवे ही नहीं देश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूत किया है। कोरोना काल में जहां देश की अन्य संस्थाएं व कल-कारखाने संसाधनों और उपकरणों का रोना रो रहे थे, वहीं पूर्वोत्तर रेलवे के गोरखपुर और इज्जतनगर स्थित यांत्रिक कारखाना ने निर्धारित समय में 762 पुराने कोचों को एनएमजी में बदलकर आत्मनिर्भर बनने की कड़ी में एक और अहम कदम बढ़ाया है। अधिकतम 100 किमी प्रति घंटे की रफ्तार वाले इन वैगनों से 20 से 24 रेक तैयार होंगी, जो भारतीय रेलवे के विभिन्न मार्गों के अलावा फ्रेट कारिडोर पर भी दौड़ेंगी।

आटोमोबाइल्स की ढुलाई हुई आसान

न्यू मोडिफाइड गुड्स वैगन बनने से मालगाड़ियों से आटोमोबाइल्स की ढुलाई आसान हो गई है। देश की बड़ी कंपनियों का रुझान बढ़ा है। पूर्वोत्तर रेलवे ही नहीं चेन्नई और सूरत से देश के कोने-कोने और बांग्लादेश तक तक एनएमजी से आटोमोबाइल्स की ढुलाई होने लगी है। उत्साहित रेल मंत्रालय उम्र पूरी कर चुके सभी पुराने कोचों को एनएमजी में बदलने का निर्णय लिया है। इससे पुराने कोचों का उपयोग हो जाएगा, बचत के साथ रेलवे की कमाई भी बढ़ जाएगी।


जानकारों के अनुसार पुराने कोच से एक एनएमजी तैयार करने में करीब 22 लाख की बचत होती है। पूर्वोत्तर रेलवे प्रशासन ने अभी तक लगभग 167 करोड़ की बचत कर लिया है। किया है। यहां जान लें कि पुराने एनएमजी में जहां दो से तीन कारें आती थीं, अब कम से कम आधा दर्जन समा जाती हैं। पुराने की तुलना में एनएमजी सुरक्षित और गतिमान हैं।


20 साल में कंडम घोषित हो जाते हैं कोच

कोचों की आयु 20 वर्ष निर्धारित है। इसके बाद वह कंडम घोषित हो जाते हैं। अब तो परंपरागत कोचों का निर्माण भी बंद हो गया है। जो बचे हैं, उनका उपयोग एनएमजी में होने लगा है। अब सिर्फ अति आधुनिक लिंक हाफमैन बुश (एलएचबी) कोच ही बन रहे हैं।


आटोमोबाइल की ढुलाई के लिए न्यू मोडिफाइड गुड्स वैगन तैयार किए जा रहे हैं। पूर्वोत्तर रेलवे में अभी तक गोरखपुर एवं इज्जतनगर के यांत्रिक कारखाने में 762 एनएमजी बनाए गए हैं। वर्ष 2021- 22 के प्रथम त्रैमासिक में पिछले साल की तुलना में 128 फीसद अधिक लोडिंग की गई है। - पंकज कुमार सिंह, मुख्य जनसंपर्क अधिकारी, पूर्वोत्तर रेलवे। 

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