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क्या है इथेनॉल और कैसे इसे पेट्रोल-डीजल के विकल्प की तरह किया जा सकता है इस्तेमाल - What is ethanol what is use of ethanol

गाजीपुर न्यूज़ टीम, नई दिल्ली. पेट्रोल-डीजल की कीमतों में पिछले 7 दिनों में तगड़ी बढ़ोतरी देखने को मिली है। इन 7 दिनों में 6 दिन दाम बढ़े हैं। हफ्ते भर में ही पेट्रोल 4 रुपये और डीजल 4.10 रुपये महंगा (Petrol Diesel Price) हो गया है। महंगे होते पेट्रोल-डीजल की सबसे बड़ी वजह है कच्चे तेल के आसमान छूते दाम। ऐसे में पेट्रोल-डीजल के दाम में गिरावट लाने के लिए ही सरकार पिछले कई सालों से एथेनॉल (Ethenol) की ब्लेंडिंग (Blending) पर जोर दे रही है। 2025 तक पेट्रोल में 20 फीसदी तक एथेनॉल मिलाने यानी ब्लेंडिंग का टारगेट रखा गया है। पहले यह लक्ष्य 2030 तक हासिल करने की योजना थी, जिसे बाद में घटा दिया गया। बता दें कि एथेनॉल सिर्फ 62 रुपये प्रति लीटर पड़ेगा, जिस पर नितिन गडकरी खास प्लानिंग कर रहे हैं।

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एथेनॉल से होते हैं क्या-क्या फायदे?

एथेनॉल का सबसे बड़ा फायदा तो यही है कि यह ब्लेंडिंग में इस्तेमाल होगा, जिससे आपकी गाड़ी में पड़ने वाला तेल तुलनात्मक रूप से सस्ता हो जाएगा। वहीं अगर 100 फीसदी एथेनॉल पर चलने वाला इंजन बना लिया जाता है तो ईंधन बेहद सस्ता पड़ेगा। इसके अलावा एथेनॉल से करीब 35 फीसदी कम मोनोऑक्साइड निकलता है। यह कार्बन मोनोऑक्साइड और सल्फर डाईऑक्साइड के उत्सर्जन को भी कम करता है। इससे हाइड्रोकार्बन का उत्सर्जन भी कम होता है। एथेनॉल में 35 फीसदी ऑक्सीजन होता है। सबसे बड़ी बात एथेनॉल का इस्तेमाल बढ़ेगा तो इससे किसानों को भी फायदा होगा, क्योंकि एथेनॉल गन्ने से बनता है।

सरकार क्यों दे रही एथेनॉल पर जोर?

भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है, जो अपनी 85 प्रतिशत से अधिक मांग को पूरा करने के लिए विदेशों से आयात पर निर्भर है। एथेनॉल पर ध्यान केंद्रित करने से पर्यावरण के साथ-साथ किसानों के जीवन पर भी बेहतर प्रभाव पड़ रहा है, क्योंकि यह किसानों को आय का एक और स्रोत उपलब्ध कराता है। एथेनॉल खरीद में आठ गुना वृद्धि के एक बड़े हिस्से से देश के गन्ना किसानों को फायदा मिला है।

एथेनॉल के मामले में ब्राजील को टक्कर देगा भारत

भारत पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने वाला ब्राजील के बाद दूसरा देश बन जाएगा। हालांकि, सरकार का माना है कि निरपेक्ष रूप से हम ब्राजील से आगे होंगे। ब्राजील में करीब 40 फीसदी गाड़ियां 100 फीसदी एथेनॉल पर चल रही हैं और बाकी गाड़ियों के ईंधन में भी करीब 24 फीसदी तक एथेनॉल मिलाया जाता है। भारत में भी अब 100 फीसदी एथेनॉल पर चलने वाली गाड़ियां भी बनाने की दिशा में काम हो रहा है, जिससे कच्चे तेल पर भारत की निर्भरता घटेगी और ईंधन सस्ता होगा। वहीं इस कदम से पर्यावरण को भी फायदा होगा। स्वीडन और कनाडा में भी एथेनॉल पर गाड़ियां चलाई जा रही हैं और इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ा जा रहा है।

फ्लेक्स फ्यूल में भी होगा एथेनॉल का इस्तेमाल

फ्लेक्स-फ्यूल, गैसोलीन और मेथेनॉल या एथेनॉल के मिश्रण से तैयार एक वैकल्पिक ईंधन है। नितिन गडकरी ने हाल ही में कहा था कि आने वाले दिनों में ‘फ्लेक्स-फ्यूल इंजन’ (Flex-Fuel Engine) अनिवार्य कर दिए जाएंगे। टीवीएस मोटर और बजाज ऑटो जैसी कंपनियों ने पहले ही दोपहिया और तिपहिया वाहनों के लिए फ्लेक्स-फ्यूल इंजन का विनिर्माण शुरू कर दिया है।

सिर्फ 62 रुपये में मिलेगा 1 लीटर तेल

नितिन गडकरी बोल चुके हैं वह फ्लेक्स इंजन वाली कारों पर काम कर रहे हैं, जिसमें 100 फीसदी पेट्रोल या एथेनॉल का इस्तेमाल हो सकेगा। फ्लेक्स इंजन का मतलब है, जिसमें 100 प्रतिशत पेट्रोल या एथेनॉल का उपयोग किया जा सके। गडकरी तो हल्के-फुल्के अंदाज में यह भी कह चुके हैं- 'पेट्रोल का इस्तेमाल न करें... ईंधन की बढ़ती कीमतों पर आपको आंदोलन करने की जरूरत नहीं है... (एथेनॉल की) कीमत 62 रुपये होगी और यह आयात का एक विकल्प होगा और यह लागत प्रभावी और प्रदूषण मुक्त है।'

पेट्रोल-डीजल सस्ता करने के लिए घटाई एथेनॉल पर जीएसटी

एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल प्रोग्राम (Ethanol Blended Petrol) के तहत प्रयोग किए जाने वाले एथेनॉल पर अब 18 फीसदी की जगह 5 फीसदी जीएसटी (5 pc gst on ethanol) लगेगी। पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर काबू पाने के लिए ही पिछले दिनों एथेनॉल पर जीएसटी की दरें घटाने का फैसला किया गया था। इससे आम जनता को बड़ा फायदा होगा, क्योंकि लागत घटेगी।

दूसरे विश्व युद्ध के वक्त से हो रहा है एथेनॉल पर काम

बजाज हिंदुस्तान शुगर लिमिटेड ने दूसरे विश्व युद्ध के बाद 1944 से ही एथेनॉल पर काम शुरू कर दिया था। उस दौर में एथेनॉल बहुत ही कम मात्रा में मिलता था, जिसे पावर एल्कोहल भी कहा जाता था। तब बजाज हिंदुस्तान शुगर लिमिटेड ने एल्कोहल मिला पेट्रोल सेना को भी सप्लाई किया था। यानी एथेनॉल कितने काम की चीज है, इसका पता करीब 8 दशक पहले ही चल गया था और इसके इस्तेमाल पर काम भी शुरू हो गया था।

जानिए क्या होती है ब्लेंडिंग

पेट्रोल और डीजल में एथेनॉल की ब्लेंडिंग का मतलब है कि इन तेलों में एथेनॉल मिलाया जाता है। 2022 तक पेट्रोल-डीजल में 10 फीसदी एथेनॉल मिलाने का टारगेट रखा गया था, जो 2021 तक करीब 8.5 फीसदी था। 2014 में सिर्फ 1-1.5 फीसदी एथेनॉल ही पेट्रोल-डीजल में मिलाया जाता था। एथेनॉल की खरीद सालाना 38 करोड़ लीटर से बढ़कर अब 320 करोड़ लीटर हो गई है।

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कितना महंगा हो गया पेट्रोल-डीजल

हफ्ते भर से पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ रहे हैं। 28 मार्च सोमवार को पेट्रोल 30 पैसे और डीजल 35 पैसे प्रति लीटर महंगा हो गया। 22 मार्च से पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ना शुरू हुए हैं और तब से लेकर अब तक सिर्फ एक दिन छोड़कर हर रोज कीमतों में कुछ ना कुछ बढ़ोतरी हुई है। पिछले 7 दिनों में पेट्रोल 4 रुपये और डीजल 4.10 रुपये महंगा हो गया है। दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 99.41 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत 90.77 रुपये प्रति लीटर हो गई है।

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