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गोरक्षपीठाधीश CM योगी 3 दिनों तक शक्ति की आराधना में लीन रहेंगे

ग़ाज़ीपुर न्यूज़ टीम, गोरखपुर. शारदीय नवरात्र में शक्ति की आराधना के लिए गोरक्षपीठ आगामी तीन दिन विशेष आनुष्ठानिक कार्यक्रमों के लिए तैयार है। इन तीन दिनों में मुख्यमंत्री और गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ विशेष अनुष्ठान और शक्ति की आराधना में लीन रहेंगे। गोरक्षपीठाधीश्वर योगी रविवार 22 अक्टूबर को नवरात्र की अष्टमी तिथि में विधि विधान से महानिशा पूजन और हवन कर लोक मंगल की प्रार्थना करेंगे। इसके पूर्व नवरात्र के प्रथम दिन गोरखनाथ मंदिर मठ के प्रथम तल पर स्थित शक्ति मंदिर में सीएम योगी ने कलश स्थापना की थी।

अष्टमी की रात वह यहीं आदिशक्ति की आराधना कर महानिशा पूजन करेंगे। नाथ संप्रदाय की परंपरा के अनुसार अष्टमी की रात में सात्विक बलि देकर विशेष हवन किया जाता है। सोमवार (23 अक्टूबर) को सुबह 8:30 बजे से मातृ शक्ति के प्रतीक स्वरूप में कन्या पूजन का अनुष्ठान होगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ कन्या पूजन कर मातृ शक्ति के प्रति गोरक्षपीठ की परंपरा को आगे बढ़ाएंगे।

योगी करेंगे बटुक पूजन

गोरक्षपीठाधीश्वर नौ दुर्गा स्वरूपा नौ कुंवारी कन्याओं के पांव पखारेंगे, उनके माथे पर रोली, चंदन, दही, अक्षत का तिलक लगा विधि विधान से पूजन करेंगे। पूरी श्रद्धा से भोजन कराकर दक्षिणा और उपहार देकर उनका आशीर्वाद भी लेंगे। इस दौरान परंपरा के अनुसार बटुक पूजन भी किया जाएगा। जबकि मंगलवार (24 अक्टूबर) को गुरु गोरक्षनाथ के विशिष्ट पूजन व गोरक्षपीठाधीश्वर के तिलकोत्सव के बाद सायंकाल विजयदशमी की भव्य शोभायात्रा निकाली जाएगी।

गोरक्षपीठाधीश्वर की विजयदशमी शोभायात्रा

विजयदशमी के दिन साइकिल गोरखनाथ मंदिर से निकलने वाली शोभायात्रा जाति, धर्म और पंथ का भेदभाव मिटाकर सामाजिक समरसता की स्थापना और लोक कल्याण की कामना गोरक्षपीठ का ध्येय रहा है। सामाजिक समरसता की एक बड़ी मिशाल याज शोभायात्रा प्रतिवर्ष विजयादशमी के अवसर पर निकली जाती है इस शोभायात्रा में हर वर्ग के हजारों लोग तो शामिल होते ही हैं, इसका स्वागत मुस्लिम व बुनकर समाज के लोगों द्वारा पूरी भव्यता और भाव के साथ किया जाता है। शोभायात्रा गोरखनाथ मंदिर से निकलकर मानसरोवर रामलीला मैदान पर जाकर समाप्त होती है। जहां श्री राम लक्ष्मण और सीता जी की आरती उतारी जाती है और तिलक लगाकर स्वागत किया जाता है।

सामाजिक सौहार्द की एक मिसाल है यह पीठ

गोरक्षपीठ ने कभी भी किसी को जाति या मजहब के चश्मे से नहीं देखा। मंदिर परिसर में अल्पसंख्यक समुदाय के ऐसे दुकानदार बहुतायत में हैं जो पीढ़ियों से यहीं रोजी रोजगार में रत हैं। सांसद के रूप में योगी आदित्यनाथ रोजाना सुबह फरियादियों की समस्याओं का समाधान कराते थे तो उसमें बहुत सारे अल्पसंख्यक समुदाय के पुरुष-महिलाओं की होती थी। आज भी जब यहां सीएम का जनता दर्शन कार्यक्रम होता है तो भी यह नजारा देखने को मिलता है। 

दशहरे के दिन गोरखनाथ मंदिर की विजयादशमी शोभायात्रा का इंतजार तो पूरे शहर को होता है। सबसे अधिक उत्साह अल्पसंख्यक समुदाय के उन लोगों में दिखता है जो मंदिर के मुख्य द्वार से थोड़ी दूर घंटों पहले फूलमाला लेकर गोरक्षपीठाधीश्वर के स्वागत को खड़े रहते हैं। गोरक्षपीठाधीश्वर का काफिला जब यहां रुकता है तो सामाजिक समरसता की वह तस्वीर साफ दिखाई देती है, जहां मजहब और धर्म की दीवारें टूट जाती हैं।

दंडाधिकारी की भूमिका में होंगे गोरक्षपीठाधीश्वर

गोरक्षपीठ में विजयादशमी का दिन एक और मायने में भी खास होता है। इस दिन यहां संतों की अदालत लगती है और गोरक्षपीठाधीश्वर दंडाधिकारी की भूमिका में होते हैं। नाथपंथ की परंपरा के अनुसार हर वर्ष विजयादशमी के अवसर पर गोरखनाथ मंदिर में पीठाधीश्वर द्वारा संतों के विवादों का निस्तारण किया जाता है। गोरक्षपीठाधीश्वर योगी आदित्‍यनाथ नाथपंथ की शीर्ष संस्था अखिल भारतवर्षीय अवधूत भेष बारह पंथ योगी महासभा के अध्‍यक्ष भी हैं। 

इसी पद पर वह दंडाधिकारी की भूमिका में होते हैं। गोरखनाथ मंदिर में विजयादशमी को पात्र पूजा का कार्यक्रम होता है। इसमें गोरक्षपीठाधीश्वर संतो के आपसी विवाद सुलझाते हैं। विवादों के निस्तारण से पूर्व संतगण पात्र देव के रूप में योगी आदित्यनाथ का पूजन करते हैं। पात्र देवता के सामने सुनवाई में कोई भी झूठ नहीं बोलता है। पात्र पूजा संत समाज में अनुशासन के लिए भी जाना जाता है।

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