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बनारस के दुर्गा मंदिर में उमड़ी भक्तों की भीड़...माता शैलपुत्री का पूजन, जय माता दी के उद्घोष से गूंजा शहर

ग़ाज़ीपुर न्यूज़ टीम, वाराणसी. चैत्र नवरात्रि के पहले दिन बनारस में आदिशक्ति मां दुर्गा के मंदिरों में भक्तों की लंबी-लंबी कतारे लगीं हैं। पहले दिन व्रतियां और आम भक्त गण मां दुर्गा के पहले स्वरूप और माता शैलपुत्री का ध्यान-भजन कर रहे हैं। वाराणसी में वरुणा नदी के किनारे अलईपुर स्थित माता शैलपुत्री के मंदिर भक्तों की भीड़ है। पूरा मंदिर परिसर शेरोवाली के जयघोष से गूंज उठा है। वहीं, दुर्गाकुंड मंदिर से लेकर अन्नपूर्णा देवी तक भोर के 3 बजे से ही भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी है।
चैत्र नवरात्र के पहले दिन अलईपुर स्थित माता शैलपुत्री के मंदिर में दर्शन-पूजन के लिए भक्तों की भीड़ उमड़ी। श्रद्धालुओं ने माता के दर्शन कर घर-परिवार के सुख-समृद्धि की कामना कर रहे हैं । माता शैलपुत्री के दर्शन के भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। वहीं मां अपने भक्तों को भक्ति और शक्ति का आशीर्वाद देती हैं। मंदिर के महंत बताते हैं कि बताया कि नवरात्र के पहले दिन माता शैलपुत्री का दर्शन-पूजन का विधान है। माता के दर्शन से भक्तों के मन की सभी मनोकामना मां पूरी करती हैं। माता भक्तों को अपनी भक्ति प्रदान करती है। बताया कि चैत्र नवरात्र के दौरान मंदिर में भीड़ होती है।

09 अप्रैल को कलश स्थापना के लिए सबसे अच्छा मुहूर्त 11 बजकर 57 मिनट से 12 बजकर 48 मिनट तक रहेगा। क्योंकि यह अभिजीत मुहूर्त है। कलश स्थापना, पूजा-पाठ और शुभ कार्यों के लिए अभिजीत मुहूर्त सर्वश्रेष्ठ होता है।

चैत्र नवरात्रि के पहले दिन हर देवी मंदिरों में देवी भक्तों की भीड़ को देखते हुए शहर के प्रमुख बड़े मंदिरो के बाहर बैरिकेडिंग की गई हैं। मंदिर व्यवस्थापक के साथ पुलिसकर्मी भी श्रद्धालुओं को सहजता से माता के दर्शन कर रहे हैं। वही बड़े मंदिरों के बाहर पुलिस की विशेष निगरानी रखी गई है। लोगों के सामान की सुरक्षा के लिए श्रद्धालुओं को सतर्क किया जा रहा है। शहर के दुर्गाकुंड स्थित दुर्गा मंदिर, भदैनी स्थित नौ दुर्गा, महिषासुर मर्दिनी, कमच्छा स्थित कामाख्या देवी और बड़ी शीतला मंदिर में पहले नवरात्र को भारी भीड़ देखने को मिल रही है।

प्रथम शैलपुत्री - नवरात्र में पहले दिन शैलपुत्री देवी के रूप में मां की पूजा का विधान है। वाराणसी में शैलपुत्री मंदिर अलईपुरा रेलवे स्टेशन के पीछे शक्कर तालाब के पास बना हुआ है।

द्वितीय ब्रह्मचारिणी - नवरात्र में दूसरे दिन देवी ब्रह्मचारिणी की पूजा की मान्‍यता है। वाराणसी में ब्रह्मचारिणी देवी का मंदिर गंगा तट स्थित पंचगंगा घाट और गाय घाट के बीच ब्रम्हाघाट पर बना हुआ है।

तृतीय चंद्रघंटा - नवरात्र में तीसरी देवी के रूप में देवी चंद्रघंटा की पूजा का विधान माना गया है। वाराणसी में चौक में थाने के ठीक सामने चंद्रघंटा गली में देवी विराजती हैं।

चतुर्थ कुष्मांडा - नवरात्र में चतुर्थ देवी के तौर पर देवी कुष्‍मांडा की पूजा करने की मान्‍यता रही है। वाराणसी में दुर्गाकुंड पर देवी का मंदिर कुष्मांडा देवी के रूप में मान्‍य है।

पंचम स्कंदमाता - नवरात्र में पांचवीं देवी के रूप में बागेश्‍वरी देवी की पूजा का विधान है। वाराणसी के जैतपुरा में बागेश्वरी देवी का मंदिर आस्‍था का बड़ा केंद्र है।

षष्‍ठम कात्यायनी - नवरात्र में छठवीं देवी के तौर पर कात्‍यायनी देवी के रूप में मान्‍यता है। वाराणसी में संकठा मंदिर मणिकर्णिका घाट के बगल में सिंधिया घाट के ठीक ऊपर निर्मित है।

सप्‍तम कालरात्रि - नवरात्र में सातवीं देवी के रूप में कालरात्रि की पूजा का विधान है। वाराण्‍सी में माता कालरात्रि का मंदिर कालका गली दशाश्‍वमेध रोड पर बना है।

अष्‍टम महागौरी - नवरात्र में आठवीं देवी के रूप में महागौरी देवी की पूजा की मान्‍यता रही है। वाराणसी में बाबा दरबार के पास स्थित अन्नपूर्णा मंदिर की मान्‍यता महागौरी के रूप में है।

नवम सिद्धिदात्री - नवरात्र में देवी का अंतिम नौंवा स्‍वरूप देवी सिद्धिदात्री के रूप में माना जाता है। वाराणसी में गोलघर स्थित पराड़कर भवन के पीछे सिद्ध माता गली में देवी का मंदिर स्‍थापित है।

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