गाजीपुर-वाराणसी हाईवे सील; कटरिया गांव छावनी में तब्दील
ग़ाज़ीपुर न्यूज़ टीम, गाजीपुर. गाजीपुर के करंडा थाना क्षेत्र स्थित कटरिया गांव में निशा विश्वकर्मा मौत मामले को लेकर सोमवार को बड़ा प्रशासनिक एक्शन देखने को मिला। पीड़ित परिवार से मिलने जा रहे कांग्रेस के 21 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को गांव पहुंचने से पहले ही रोक दिया गया।
प्रशासन ने एहतियातन वाराणसी-गाजीपुर हाईवे पर कैथी के पास बॉर्डर सील कर दिया। पूरे कटरिया गांव को छावनी में तब्दील कर दिया गया है, जहां भारी पुलिस बल तैनात है। गांव के सभी रास्तों पर बैरिकेडिंग कर बाहरी लोगों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई है। जिला प्रशासन के निर्देश पर इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। किसी भी बाहरी व्यक्ति या राजनीतिक प्रतिनिधिमंडल को पीड़ित परिवार तक पहुंचने की अनुमति नहीं दी जा रही है। प्रशासन का कहना है कि स्थिति को नियंत्रित रखने के लिए यह कदम उठाया गया है।
प्रशासन ने देर रात ही कई स्थानीय कांग्रेस नेताओं को हाउस अरेस्ट कर लिया। इनमें जिलाध्यक्ष सुनील राम, शहर अध्यक्ष संदीप विश्वकर्मा सहित कई पदाधिकारी शामिल हैं। अधिकारियों का कहना है कि यह कदम कानून-व्यवस्था बनाए रखने और संभावित तनाव को रोकने के लिए उठाया गया है। जिला मजिस्ट्रेट अनुपम शुक्ला के निर्देश पर पूरे जिले में धारा 163 लागू कर दी गई है। इसके तहत किसी भी तरह के जुलूस, धरना, कैंडल मार्च या सार्वजनिक प्रदर्शन पर रोक लगा दी गई है। सूत्रों के अनुसार, प्रशासन नहीं चाहता कि बड़ी संख्या में नेता गांव पहुंचकर स्थिति को और संवेदनशील बनाएं।
वहीं कांग्रेस ने इस कार्रवाई को लोकतंत्र पर हमला बताया है। पार्टी का आरोप है कि प्रशासन राजनीतिक दबाव में काम कर रहा है और विपक्ष की आवाज को दबाया जा रहा है। कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल में डॉ. अनिल कुमार यादव, राजेंद्र पाल गौतम, अजय कुमार लल्लू, तनुज पुनिया, राकेश राठौर और कर्मवीर सिंह बौद्ध सहित कुल 21 नेता शामिल थे, जो पीड़ित परिवार से मिलकर न्याय की मांग उठाने जा रहे थे।
पार्टी का कहना है कि उन्हें रोकना उनके संवैधानिक अधिकारों का हनन है, जबकि प्रशासन इसे पूरी तरह कानून-व्यवस्था का मामला बता रहा है।


