गाजीपुर से सपा सांसद अफजाल अंसारी को शस्त्र लाइसेंस मामले में राहत
ग़ाज़ीपुर न्यूज़ टीम, गाजीपुर. गाजीपुर सपा सांसद अफजाल अंसारी ने शस्त्र लाइसेंस मामले में राहत मिली है। मूल पत्रावलियां और पुराने रिकॉर्ड नहीं मिलने को लेकर दर्ज तीन मुकदमों पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कार्रवाई को पूर्वाग्रह और अधिकारों के गलत इस्तेमाल का नतीजा बताया। सांसद का कहना है कि शस्त्र लाइसेंस की मूल फाइलें उनके घर या कार्यालय में नहीं, बल्कि सरकारी विभाग के रिकॉर्ड रूम में रहती हैं। ऐसे में सरकारी दस्तावेज गायब होने की जिम्मेदारी भी उसी विभाग की बनती है, जहां रिकॉर्ड सुरक्षित रखा गया था। इस मामले में उन्हें अदालत से राहत मिल चुकी है और अब आगे की सुनवाई में अपना पक्ष रखने की बात कही है।
अफजाल अंसारी ने बताया कि मोहम्मदाबाद थाने से जुड़ा 1188 पी सेकेंड शस्त्र लाइसेंस तत्कालीन जिलाधिकारी के आदेश से वर्ष 1983 में सुरक्षा के लिए जारी हुआ था। उनके मुताबिक, इसके बाद इसी लाइसेंस पर समय-समय पर हथियारों की खरीद और बिक्री हुई और लाइसेंस का नवीनीकरण भी होता रहा।
सांसद के अनुसार वर्ष 2015 में शस्त्र लाइसेंसों का कंप्यूटरीकरण किया गया और उनकी आईडी जनरेट हुई। उनका सवाल है कि जब लाइसेंस सरकारी प्रक्रिया के तहत लगातार चलता रहा और बाद में उसका कंप्यूटरीकरण भी हुआ, तो दशकों पुराने रिकॉर्ड नहीं मिलने के आधार पर उनके खिलाफ आपराधिक मुकदमा कैसे बनता है उन्होंने बताया कि उनके शस्त्र लाइसेंस से जुड़े अलग-अलग रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने को लेकर तीन मुकदमे दर्ज किए गए हैं। इनमें संबंधित आपराधिक धाराओं के साथ आर्म्स एक्ट की धाराएं भी लगाई गई हैं।
अफजाल अंसारी ने कहा कि लाइसेंस की मूल पत्रावली सरकारी कार्यालय में रखी जाती है। अगर फाइल गायब होती है, उसमें कोई बदलाव होता है या वह नष्ट हो जाती है तो इसकी जिम्मेदारी उस अधिकारी या विभाग की होनी चाहिए, जिसके पास रिकॉर्ड की देखरेख थी।
उन्होंने दावा किया कि इन मामलों में कुछ सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों को भी सहअभियुक्त बनाया गया है। साथ ही उन्होंने यह सवाल उठाया कि तीनों मुकदमों में नामजद सहअभियुक्तों में पांच ऐसे लोग हैं, जिनकी मृत्यु हो चुकी है। सांसद के मुताबिक, इससे जांच की प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े होते हैं।
अफजाल ने यह भी बताया कि एक मामले में पुराने हथियार की बिक्री से जुड़े रिकॉर्ड अरुणाचल प्रदेश की एक फर्म से संबंधित बताए गए हैं। उनके अनुसार फर्म की ओर से बताया गया कि वर्ष 2001 में ओल्ड मार्केट में भीषण आग लगी थी, जिसमें दुकान और पुराने दस्तावेज जल गए थे। उनका कहना है कि इतने पुराने रिकॉर्ड उपलब्ध न होने के लिए उन्हें जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है।
अफजाल अंसारी ने अपनी उन संपत्तियों का भी जिक्र किया, जिन्हें गैंगस्टर एक्ट के तहत कुर्क किया गया था। उन्होंने कहा कि खरड़ीहा में पंपिंग सेट और बोरिंग, धनेटा में बगीचा और खेत, माचा में खेत व फार्म हाउस, नरसिंहपुर में खेत-बाग और शकरपुर की जमीन समेत कई संपत्तियां कार्रवाई की जद में आई थीं।
उनके मुताबिक, इनमें उनकी पत्नी और बेटियों के नाम की संपत्तियां भी शामिल थीं। सांसद ने दावा किया कि अदालत के आदेश के बाद इन संपत्तियों को कुर्की से मुक्त किया गया है। हालांकि, उनका कहना है कि कुर्की के दौरान संपत्तियों को जो नुकसान हुआ, उसकी भरपाई के लिए वह अलग कानूनी लड़ाई लड़ेंगे।
उन्होंने अपने पुराने गैंगस्टर मामले का भी जिक्र किया। सांसद के अनुसार, निचली अदालत से सजा होने के बाद उनकी संसद सदस्यता चली गई थी और शस्त्र लाइसेंस भी निलंबित किए गए थे। बाद में हाईकोर्ट से दोषमुक्त होने के बाद सदस्यता बहाल हुई और संपत्तियों को भी मुक्त करने की प्रक्रिया हुई।
शस्त्र लाइसेंस से जुड़े मामले में अफजाल अंसारी ने कहा कि गिरफ्तारी से उन्हें अदालत से राहत मिली है और संबंधित पक्षों को अपना जवाब दाखिल करने का मौका मिला है। उनका कहना है कि अब मामले की अगली सुनवाई में वह अपना पक्ष रखेंगे।
उन्होंने कहा, "अब हाईकोर्ट में सुनवाई होगी और दूध का दूध और पानी का पानी होगा।" सांसद ने आरोप लगाया कि उनके खिलाफ राजनीतिक साजिश और उन्हें बदनाम करने की नीयत से मुकदमे दर्ज किए गए हैं। हालांकि, ये उनके आरोप हैं और इस पर पुलिस-प्रशासन का पक्ष सामने आना बाकी है।
अफजाल ने कहा कि जांच में यह भी साफ होना चाहिए कि सरकारी पत्रावली आखिरी बार किसके पास थी, उसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी थी और रिकॉर्ड गायब होने पर विभागीय स्तर पर क्या कार्रवाई हुई। उन्होंने कहा कि उन्हें न्यायपालिका पर भरोसा है और वह अदालत में पूरे मामले की सच्चाई सामने आने की उम्मीद कर रहे हैं।
