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गाजीपुर में शहीद जवान का पार्थिव शरीर पैतृक गांव पहुंचा, सैन्य सम्मान के साथ दी गई अंतिम विदाई

ग़ाज़ीपुर न्यूज़ टीम, गाजीपुर. गाजीपुर के गहमर स्थित पट्टी कुबेर राय में सोमवार की अपराह्न एक बजें शहीद जवान राजेश सिंह का पार्थिव शरीर पहुंचा। जम्मू-कश्मीर के उधमपुर जिले में वीरगति को प्राप्त हुए राजेश सिंह के पैतृक गांव पहुंचते ही पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई।
तिरंगे में लिपटे पार्थिव शरीर को देखने के लिए हजारों की भीड़ उमड़ पड़ी। सेना के जवान एंबुलेंस से पूरे सम्मान के साथ पार्थिव शरीर को गांव लाए थे।

पार्थिव शरीर को देखकर परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। शहीद की माता गौरी सिंह और पत्नी रानी देवी बार-बार बेसुध हो रही थीं। पिता गिरीश नाथ सिंह की आंखों से भी आंसू नहीं थम रहे थे।

45 वर्षीय शहीद जवान राजेश सिंह का अंतिम संस्कार नरावा गंगा घाट पर पूरे सैन्य सम्मान के साथ किया गया। सेना के जवानों ने 21 राउंड की सशस्त्र सलामी देकर अपने वीर साथी को अंतिम विदाई दी। इसके बाद, शहीद के 14 वर्षीय पुत्र पार्थ सिंह (मंगरु) ने अपने पिता को मुखाग्नि दी। यह हृदय विदारक दृश्य देखकर घाट पर मौजूद हजारों लोगों की आंखें नम हो गईं।

पार्थिव शरीर के गांव पहुंचते ही सेना के जवानों ने घर पर सलामी दी। इसके बाद पिता गिरीशनाथ सिंह ने पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। घर से लेकर नरावा गंगा घाट तक 'भारत माता की जय' और 'अमर शहीद राजेश सिंह' के नारों से वातावरण गूंजता रहा।

इस दौरान विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों, जमानिया के सीओ अंकित तिवारी और सेवराई के नायब तहसीलदार पंकज कुमार सहित कई गणमान्य व्यक्तियों ने नरावा घाट पहुंचकर श्रद्धांजलि अर्पित की।

32 बीआरटीएफ ग्रीफ में तैनात शहीद जवान राजेश सिंह लंबे समय से बीमार चल रहे थे। उन्हें साथी जवानों ने जम्मू के उधमपुर स्थित सेना के कमांड अस्पताल में भर्ती कराया था, जहां उनका इलाज चल रहा था। इलाज के दौरान शनिवार शाम 5:30 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके पिता गांव में खेती-किसानी करते हैं, जबकि बड़े भाई अजय सिंह और छोटे लाल सिंह सेना में हैं। अंजनी सिंह और भुटान सिंह व्यवसाय करते हैं।