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आंखों के सामने कट रही भूमि

रफीपुर गावं के पास हो रहा गंगा में कटान।
क्षेत्र में कटान का क्रम जारी है। कभी सोकनी, बड़हरिया, तो कभी रफीपुर में कटान अपना प्रभाव दिखा रही है। दो दिनों से रफीपुर में कटान का सिलसिला जारी है। शुक्रवार को जहां डेढ़ बिस्वा भूमि कटकर गंगा में समाहित हो गई, वहीं शनिवार को भी विभिन्न किसानों की करीब 17 बिस्वा भूमि कटान की भेंट चढ़ गई। गंगा भूमि को काटते हुए तेजी से पूजन बाबा के आश्रम की तरफ बढ़ रही है। कटान की रफ्तार नहीं रुकी तो आश्रम भी गंगा की गोंद में समा जाएगा।

वर्षों पहले क्षेत्र के पुरैना से कटान का क्रम शुरू हुआ। ऐसी कटान हुई कि पुरैना के सैकड़ों बिस्वा कृषि योग्य भूमि सहित दर्जनों लोगों के मकान के साथ ही शिव मंदिर गंगा में समाहित हो गया। प्रशासन ने बोल्डर आदि लगाकर यहां के कटान को तो रोक लिया, लेकिन रफीपुर, सोकनी और बड़हरिया वर्षों से कटान का सिलसिला जारी है।

यहां के कटान को रोकने के नाम पर प्रशासन द्वारा सिर्फ निरीक्षण ही किया जा रहा है। पिछले वर्षों की तरह इस वर्ष भी गंगा के जलस्तर में वृद्धि होने पर इन स्थानों पर कटान का क्रम भी जारी हो गया। पिछले दो दिनों से रफीपुर में कटान का क्रम जारी है। शुक्रवार को कटान पीड़ितों के आंखों के सामने ही करीब डेढ़ बीघा भूमि कटकर गंगा में गिर गई।

शनिवार को भी कटान का सिलसिला जारी रहा। शनिवार की सुबह करीब साढ़े आठ बजे कटान शुरू हो गया। देखते ही देखते करीब डेढ़ घंटे में 17 विस्वा भूमि कटान की भेंट चढ़ गई। शनिवार को जिन लोगों की भूमि कटकर गंगा में समाहित हुई, उनमें रामअवतार सिंह, कृष्णा सिंह, राधेश्याम सिंह, रामदेव सिंह, रामा सिंह, उमाशंकर सिंह, गोपाल सिंह, धनंजय सिंह, नर्वदेश्वर यादव, मुन्ना, नरेंद्र. शिवपूजन सिंह, रामपूजन सिंह, दिनेश सिंह, जनार्दन सिंह, कुबेर सिंह, रामकुमार सिंह, सिरी सिंह, रामप्रबोध सिंह आदि शामिल हैं।

गंगा नदी भूमि को काटते हुए तेजी से रफीपुर में स्थित पूजन बाबा आश्रम की तरफ बढ़ रही है। वह आश्रम से महज 50 मीटर पर बह रही है। अगर कटान की रफ्तार ऐसे ही बनी रही तो आश्रम को गंगा में समाने के साथ ही तुलसीपुर और महाबलपुर गांव भी कटान की जद में आ जाएगा।
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