साढ़े चार दशक बाद ‘चंद्रशेखर’ के बिना साये में पहली बार होगा बलिया संसदीय सीट का चुनाव - Ghazipur News ✔ | गाजीपुर न्यूज़ | Latest Ghazipur News in Hindi ✔

Ghazipur News ✔ | गाजीपुर न्यूज़ | Latest Ghazipur News in Hindi ✔

गाजीपुर न्यूज़, ग़ाज़ीपुर ब्रेकिंग न्यूज़, खेल समाचार, राजनीति न्यूज़, अपराध न्यूज़

Breaking

Post Top Ad

Post Top Ad

साढ़े चार दशक बाद ‘चंद्रशेखर’ के बिना साये में पहली बार होगा बलिया संसदीय सीट का चुनाव

गाजीपुर न्यूज़ टीम, बलिया संसदीय सीट के लिए साढ़े चार दशक बाद पहला मौका होगा कि वहां के चुनावी रणभूमि के आसमां पर पूर्व प्रधानमंत्री स्‍व. चंद्रशेखर की साया नहीं होगी। आपातकाल के बाद सन् 1977 में पहली बार तत्‍कालीन जनता पार्टी के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष की हैसियत से चंद्रशेखर चुनाव लड़कर जीते थे। उसके बाद 1980 में वह दोबारा जीते, लेकिन इंदरा गांधी की हत्‍या के बाद उनके लिए उपजी सहानुभूति की लहर के कारण 1984 का चुनाव वह हार गए। फिर बाद के चुनाव में वह बलिया संसदीय सीट से लगातार जीतते आए। बलिया का सौभाग्‍य रहा कि वह उसी क्रम में देश के प्रधानमंत्री भी बने। फिर बलिया का दुर्भाग्‍य रहा कि चंद्रशेखर का असामयिक निधन हो गया। तब उनके राजनीति उत्‍तराधिकारी के रूप में छोटे बेटे नीरज शेखर सामने आए। वर्ष 2008 के उपचुनाव में वह सपा के टिकट पर चुनाव लड़े और लोकसभा में पहुंचे। 

फिर 2009 के आमचुनाव में नीरज शेखर दूसरी बार बलिया के सांसद बने, लेकिन 2014 में वह हार गए और इस बार सपा उनकी जगह अपने पूर्व विधायक सनातन पांडेय को मौका दी है। नीरज शेखर का टिकट कटना सपा में हैरानी की बात मानी जा रही है। एक वक्‍त था जब सपा के संस्‍थापक मुलायम सिंह यादव चंद्रशेखर के कद और व्‍यक्तित्‍व का सम्‍मान करते थे। कई ऐसे मौके आए जब चंद्रशेखर ने मुलायम सिंह यादव को संरक्षण दिए और उनकी हैसियत बढ़ाए। मुलायम सिंह यादव भी उनके उपकारों को नहीं भूले। बलिया संसदीय सीट पर चंद्रशेखर और उसके बाद उनके बेटे नीरज शेखर को जीत दिलाने में अपना पूरा दमखम लगाते रहे। यहां तक की नीरज शेखर लोकसभा चुनाव हारे तो उनकी जिद पर उन्‍हें अपनी सपा से राज्‍यसभा तक भेजे, लेकिन उसके बाद खुद सपा में हालात बदले। 

मुलायम सिंह यादव की जगह पार्टी की कमान उनके बेटे अखिलेश यादव ने संभाली। जाहिर है कि सपा में इस बदलाव का असर चंद्रशेखर की अहमियत पर भी पड़ा और इसका ताजा प्रमाण नीरज शेखर का टिकट कटना है। इसको लेकर राजनीतिक हलके में भी बहस शुरू हो गई है। नि:संदेह चंद्रशेखर का बलिया संसदीय क्षेत्र में खुद का भी आधार माना जाता है। चंद्रशेखर के निधन के बाद उनके बेटे नीरज शेखर से वह जनाधार खुद ब खुद जुड़ गया था। उसका लाभ सपा को भी मिलता रहा है, लेकिन राजनीतिक हलके में कहा जा रहा है कि अब जबकि नीरज शेखर चुनाव मैदान में नहीं होंगे तो वह जनाधार किधर पलटी मारेगा यह आगे पता चलेगा। 

वैसे नीरज शेखर का टिकट कटने से भाजपा खेमे में खुशी है। भाजपा के लोग नीरज शेखर की नामौजूदगी में अपने लिए संभावनाएं तलाशने में जुट गए हैं। इसी बीच एक खबर यह भी आ रही है कि टिकट कटने से नीरज शेखर नाराज हैं और वह भाजपा के शीर्ष नेताओं के संपर्क में हैं। हालांकि इस खबर की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

No comments:

Post a Comment

योगदान करें!

सत्ता को आइना दिखाने वाली गाजीपुर समाचार पत्रकारिता जो राजनीति के नियंत्रण से मुक्त भी हो, वो तभी संभव है जब जनता भी हाथ बटाए. फेक न्यूज़ और गलत जानकारी के खिलाफ़ इस लड़ाई में हमारी मदद कीजिये. योगदान करें.

Donate Now
तत्काल दान करने के लिए, "Donate Now" बटन पर क्लिक करें।



Post Top Ad