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मंगलवार, 23 जुलाई 2019

गाजीपुर: अपनी मर्जी से आफिस आते-जाते हैं अधिकारी

गाजीपुर न्यूज़ टीम, गाजीपुर जमानियां प्रदेश सरकार कार्यालयों की व्यवस्था सुधारने में जुटी है लेकिन अधिकारियों की कार्यप्रणाली में सुधार नहीं हो रहा है। ये रोजाना विलंब से कार्यालय पहुंच रहे हैं। कुछ घंटे कार्यालय में बिताने के बाद घर के लिए चल पड़ते हैं। ऐसे में सरकार की मंशा पूरी होती नजर नहीं आ रही है।गाजीपुर न्यूज़ टीम ने मंगलवार को आपूर्ति कार्यालय, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र व स्वास्थ्य केंद्र परिसर स्थित महिला प्रसव केंद्र की हकीकत परखी तो सच्चाई सामने आ गई।

समय-दोपहर 1.15 बजे, आपूर्ति विभाग
तहसील परिसर स्थित आपूर्ति कार्यालय में गाजीपुर न्यूज़ टीम पहुंची तो आपूर्ति निरीक्षक मनोज कुमार सिंह की कुर्सी खाली पड़ी थी। कंप्यूटर कक्ष पर भी ताला लटका था। कार्यालय में बाहरी व्यक्तियों का जमावड़ा लगा था। लिपिक शैलेंद्र मौर्या व दो प्राइवेट कर्मी फरियादियों की समस्या व विभागीय कार्यों को निपटा रहे थे। फरियादी राशन कार्ड, आधार लिक की समस्याओं को लेकर इधर-उधर भटकते रहे, क्योंकि उन्हें आपूर्ति निरीक्षक से मिलना था। सुबह 10 बजे से ही आपूर्ति कार्यालय में आम लोगों का आना शुरू हो गया था। 

हर किसी के पास अपनी समस्या थी, जिसे वे जिम्मेदार अधिकारी से निस्तारित करना चाहते थे। मौके पर कार्यालय की कुर्सियां खाली मिलीं। कर्मचारियों से पूछने पर जवाब मिला कि साहब ऑफिस के काम से गए हैं, आ जाएंगे। फिर किसी ने आधा घंटा तो किसी ने घंटे भर तक आपूर्ति निरीक्षक का इंतजार किया लेकिन निराशा हाथ लगी। इसके बाद निराश होकर फरियादी लौट गए। फरियादियों ने बताया कि आपूर्ति कार्यालय भ्रष्टाचार का अड्डा बन गया है।

समय 1.50 बजे, स्वास्थ्य विभाग
गाजीपुर न्यूज़ टीम स्वास्थ्य केंद्र पर पहुंची तो ओपीडी कक्ष से चिकित्सक नदारद थे। स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी की कुर्सी भी खाली पड़ी थी। पूछने पर एक कर्मचारी ने बताया कि कुछ देर पहले आयुष चिकित्सक डा. मनीषा ओपीडी से मरीजों को देखकर निकली हैं। केंद्र प्रभारी अपने निजी आवास में आराम फरमा रहे थे। कोतवाली से मारपीट में घायल चार महिलाओं को मेडिकल के लिए लेकर महिला पुलिस कर्मी भी चिकित्सक ने इंतजार में बैठी थी। कुछ यही हाल महिला प्रसव केंद्र का था। वहां भी कोई महिला चिकित्सक और कर्मचारी नहीं थे। केंद्र पर मौजूद लोगों ने बताया कि स्वास्थ्य केंद्र पर चिकित्सक एवं कर्मचारियों के मनमाने रवैये से आए दिन मरीजों को परेशानी उठानी पड़ती है।

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