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गाजीपुर: मुख्तार अंसारी की हत्या की सुपारी लेने वाले को फांसी

गाजीपुर न्यूज़ टीम, गाजीपुर मऊ विधायक मुख्तार अंसारी की हत्या की सुपारी लेने वाले खूंखार बदमाश लंबू शर्मा को बिहार की आरा कोर्ट ने मंगलवार को फांसी की सजा सुनाई। उसे यह सजा 23 जनवरी 2015 को आरा सिविल कोर्ट में बम ब्लास्ट के मामले में सुनाई गई। उस बम ब्लास्ट में लंबू शर्मा की महिला मित्र नगीना की मौत हो गई थी, जबकि बिहार पुलिस का जवान अमित कुमार भी शहीद हो गया था। उनके अलावा करीब 20 लोग जख्मी हो गए थे। बम ब्लास्ट के बाद मौके पर मची अफरा-तफरी का लाभ उठाते हुए लंबू शर्मा और उसका साथी अखिलेश उपाध्याय न्यायिक हिरासत से भाग निकले थे।

पुलिस विवेचना में बम ब्लास्ट के पीछे लंबू शर्मा की ही साजिश सामने आई थी। वह न्यायिक हिरासत से भागने के लिए ही बम ब्लास्ट कराया था। उसके लिए उसने अपनी ही महिला मित्र नगीना को मानव बम के रूप में इस्तेमाल किया था। दरअसल, लंबू शर्मा के भागने के पीछे उसका मकसद मुख्तार अंसारी का काम तमाम करना था और फरारी के बाद वह अपनी उस योजना में जुट भी गया था। उसकी उस साजिश का खुलासा तब हुआ था, जब लंबू शर्मा दिल्ली पुलिस के हाथ लगा था। पूछताछ में उसकी साजिश सुन खुद दिल्ली पुलिस तक हैरान रह गई थी। उसने बताया था कि मुख्तार अंसारी के कभी करीब रहे चांद मियां को अपनी साजिश का हिस्सा बनाया था। उसके जरिये वह आगरा पहुंच कर वहां केंद्रीय जेल में बंद रहे मुख्तार अंसारी से मिल भी आया था। वह मुख्तार की सुरक्षा व्यवस्था का भी जायजा लिया था।

लंबू शर्मा की प्लानिंग थी कि मानव बम के जरिये ही मुख्तार का वह खात्मा करेगा। इसके लिए उसने एक महिला को झांसे में ले भी लिया था। लंबू शर्मा ने दिल्ली पुलिस को बताया था  कि मुख्तार की हत्या के लिए उसे कुल 50 लाख रुपये की सुपारी देने की बात तय हुई थी। उसमें से उसे 20 लाख रुपये का भुगतान भी कर दिया गया था। वह सुपारी बिहार के ही तत्कालीन जदयू विधायक सुनील पांडेय ने दी थी। लंबू शर्मा ने बताया था कि उस साजिश में मुख्तार के जानी दुश्मन माफिया डॉन ब्रजेश सिंह भी शामिल थे। तब लंबू शर्मा बिहार की जेल में था। मुख्तार की हत्या की प्लानिंग को अंजाम तक पहुंचाने के लिए उसका जेल से बाहर आना जरूरी था। उसी के लिए बिहार की आरा कोर्ट में बम ब्लास्ट की योजना बनी थी। बम ब्लास्ट के बाद पुलिस की जांच की आंच बिहार के पूर्व जदयू विधायक सुनील पांडेय तथा यूपी के माफिया डॉन ब्रजेश सिंह तक भी पहुंची थी।

उस मामले में सुनील पांडेय को जेल भी जाना पड़ा था। संभवतः ब्रजेश सिंह की भी आरा कोर्ट में पेशी हुई थी लेकिन साक्ष्य के अभाव में उनके खिलाफ चार्जशीट दाखिल नहीं हुई थी। बम ब्लास्ट के मामले में आरा कोर्ट जदयू के पूर्व विधायक सुनील पांडेय को भी आरा कोर्ट साक्ष्य के अभाव में बरी कर दी, जबकि अन्य आरोपितों को दोषी मानी और जहां लंबू शर्मा को फांसी, वहीं शेष अखिलेश उपाध्याय, चांद मियां व उसके भाई नईम मियां सहित सात को उम्र कैद की सजा सुनाई।

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