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सोमवार, 4 नवंबर 2019

गाजीपुर: मछुआरों की दबंगई प्रशासन पर भारी

गाजीपुर न्यूज़ टीम, गाजीपुर लौवाडीह रोम जल रहा था और नीरो वंशी बजा रहा था। यह कहावत जिला प्रशासन पर सटीक लागू होता है। मगई नदी के जल से प्रभावित किसानों की मदद करने के बजाय कार्रवाई के नाम पर खानापूर्ति हो रही है। नदी के प्रवाह को बाधित करने में मछुआरों के साथ ही दबंगों और सफेदपोशों का भी हाथ है। 15 हजार बीघे खेतों में पानी भरा है। किसान खेती को लेकर परेशान हैं और प्रशासन ठोस कार्रवाई नहीं कर रहा है।

क्षेत्र के महेंद, सोनवानी और जगदीशपुर के पास नदी में जाल लगा है, जो कुछ लोगों की अच्छी आमदनी का मुख्य जरिया बना है। बीते 10 अक्टूबर को किसानों के धरना के बाद मुहम्मदाबाद प्रशासन की कुंभकर्णी नींद खुली। अधिकारियों ने जगह-जगह जाल को हटवाया लेकिन प्रशासन और मछुआरों के बीच लुकाछिपी का खेल जारी है। बार-बार जाल लगा दिया जा रहा है। प्रशासन ने इसे लेकर 18 लोगों के विरुद्ध नामजद प्राथमिकी दर्ज करवाकर खानापूर्ति कर दी गई। अंत में आजिज आकर ग्राम प्रधान अश्वनी राय ने हाईकोर्ट में अवमानना का वाद दायर किया। हाईकोर्ट ने डीएम को 19 नवंबर तक कार्रवाई न करने पर जवाब देने को कहा है।

करइल में इस बार परती रहेगी भूमि
मगई नदी का प्रवाह रोकने और शारदा नहर द्वारा पानी छोड़े जाने से लौवाडीह, जोगामुसाहिब, परसा, रघुवरगंज, राजापुर, रेड़मार, पारो, देवरिया, मसौनी, गोंड़उर, सोनवानी, सियाड़ी, सरदरपुर, महेन्द, लट्ठूडीह, करीमुद्दीनपुर सहित कई गांवों की लगभग पांच हजार बीघे धान बाजरा और सब्जी की फसल नष्ट हो चुकी है। इसके अतिरिक्त 15 हजार बीघे तक खेत मे बोआई नहीं हो पाएगी। ऐसे में करइल का सबसे उपजाऊ इलाका खेती विहीन हो जाएगा।

सख्त कार्रवाई की जरूरत
मगई के प्रवाह को बाधित करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। इस बार शारदा नहर से पानी भी छोड़ा गया और जाल बांधने वालों के विरुद्ध कार्रवाई भी नहीं हुई। यह समस्या प्रतिवर्ष की है लेकिन प्रशासन केवल खानापूर्ति करता है। - विजय शंकर पांडेय, पारो।

ध्यान नहीं दे रहा प्रशासन
अब भी समस्या जस की तस बनी हुई है। जाल अभी भी बहुत जगह लगा है लेकिन प्रशासन का मौन रूप समझ के परे है। अगर खेतों से पानी निकल भी जाए तो उसे सूखने में एक माह लग सकता है। ऐसे में खेती कैसे होगी? मछुआरों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। - धनंजय राय, सियाड़ी।

सड़क पर उतरेंगे किसान
इसके लिए जनप्रतिनिधि भी कम जिम्मेदार नहीं हैं। उनके द्वारा भी कोई उचित प्रयास नहीं किया जा रहा है। बीमा में भी किसानों के साथ छल हो रहा है। अब किसान अन्याय बर्दाश्त नहीं करेंगे। इसके विरोध में सड़क पर उतरने को बाध्य होंगे। - राजेश राय पिटू।

कब मिलेगा न्याय
हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद प्रशासन द्वारा जाल को नहीं हटाया जा रहा है सबसे बड़ी समस्या बलिया जिले में दौलतपुर है, जहां अभी भी जाल लगा हुआ है। अगर यही स्थिति रही तो किसान दाने-दाने को मोहताज हो जाएंगे। आखिरकार किसानों को कब न्याय मिलेगा। - अश्वनी राय, प्रधान प्रतिनिधि, राजापुर।

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