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गाजीपुर: खेतों में खुलेआम जल रही पराली, इलाका धुआं-धुआं

गाजीपुर न्यूज़ टीम, गाजीपुर में स्माग, पर्यावरण असंतुल और जीवन पर संकट बढ़ता जा रहा है। एक ओर बढ़ते प्रदूषण पर शासन सख्त है और कड़े निर्देश दिए गए हैं इन्हीं में सबसे अहम आदेश पराली जलाने में रोक का है। बावजूद इसके गंगा पार इलाके जैसे सेवराई, भदौरा, देवल आदि में कुछ किसान इस पर अमल नहीं कर रहे हैं। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बावजूद गंगा पार के इलाकों में खुलेआम किसान पराली जला रहे हैं। प्रशासन और पुलिस की नाक के नीचे शाम ढलते ही ग्रामीण इलाकों के खेत आग के हवाले हो जाते हैं। रात भर धान का फूस जलता रहता और सुबह तक खेत में पराली के अवशेष धुआं-धुआं।खेतों में पराली जलाने को लेकर शासन ने पूरी तरह रोक लगा दी है, पराली जलाने पर जुर्माना और सजा का प्रावधान भी रखा गया है। 

बावजूद इसके गाजीपुर के ग्रामीण इलाकों में पराली जलाने की घटनाएं लगातार आ रही है। गंगा पार जमानियां, सेवराई, भदौरा, गहमर समेत इन इलाकों में धान कटाई के बाद बड़े पैमाने पर पराली जलाई जाती है। इसकी वजह से बड़े पैमाने पर धुआं होता है लेकिन यह क्रम सरकार की रोक के बावजूद जारी है। कासिमाबाद, जमानियां, सिधारगरघाट और शहर के किनारे के गांव में लगातार पराली जलाने की शिकायतें पहले भी सामने आई हैं। किसानों के इस कृत्य की जानकारी पुलिस और प्रशासन को नहीं है और खेतों में हर रात पराली जल रही है। धान का कटोरा कहे जाने वाले पूर्वांचल के इस इलाके में बड़ी मात्रा में धान की पैदावार होती है। गाजीपुर में हर साल धान कटाई के बाद बड़े पैमाने पर पराली जलाई जाती है। इसकी वजह से बड़े पैमाने पर धुआं होता है लेकिन यह क्रम सरकार की रोक के बावजूद जारी हे। केंद्र सरकार ने धान की पराली जलाने पर रोक लगा तो दी लेकिन खेती करने वाले किसानों को इसकी कोई परवाह नहीं है।

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