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गाजीपुर: सरकार से सुरक्षा मांग रहे अधिवक्ताओं ने नहीं किया काम

गाजीपुर न्यूज़ टीम, गाजीपुर न्यायालय में दूसरों को न्याय दिलाने वाले अधिवक्ता आज खुद अपनी सुरक्षा को लेकर डरे हुए हैं। वह सरकार से अधिवक्ताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ न्याय करने की मांग कर रहे हैं। इसको लेकर वह गुरुवार को न्यायिक कार्य से विरत रहे। पूरे दिन कोई न्यायिक कार्य नहीं हुआ। इससे लोगों को निराश होकर लौटना पड़ा। जिला मुख्यालय सहित मुहम्मदाबाद, सैदपुर, जमानियां, जखनियां, कासिमाबाद व सेवराई तहसीलों पर भी अधिवक्ता न्यायिक कार्य से विरत रहे।


वक्ताओं ने कहा कि आए दिन अधिवक्ताओं की हत्याएं और उनके साथ मारपीट की घटनाएं हो रही हैं। पुलिस प्रशासन इस पर रोक नहीं लगा पा रहा है जिससे लोगों का विश्वास इस सरकार से उठता जा रहा है। लखनऊ व इलाहाबाद में दिन दहाड़े दो अधिवक्ताओं की हत्या ने उन्हें झकझोर कर रख दिया है। इसके अलावा अधिवक्ताओं के हित से जुड़ीं और कई मांगें लंबित पड़ी हुई हैं जिसे सरकार पूरा करने में आनाकानी कर रही है। अगर शीघ्र ही इन मांगों पर विचार नहीं किया जाता है तो उग्र आंदोलन किया जाएगा। इसमें टैक्स बार एसोसिएशन के बसंत सेठ, गुलाब चंद्र कुशवाहा, सीताराम गुप्ता, राघवेंद्र दत्त तिवारी, सुनील राम, अमिताभ श्रीवास्तव, विनय सिंह व बसंत शर्मा आदि रहे।


प्रमुख मांगें

- लखनऊ के अधिवक्ता शिशिर त्रिपाठी व इलाहाबाद के अधिवक्ता सनाउल्लाह खां के हत्यारों को शीघ्र गिरफ्तार किया जाए।

- दोनों पीड़ित परिवारों को 50 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाए।

- पूर्व में भी जितने अधिवक्ताओं की हत्या हुई है, उनके आश्रितों को भी 50 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाए।

- 70 वर्ष तक के मृतक अधिवक्ताओं के आश्रितों को दिए जाने वाले पांच लाख रुपये की आर्थिक सहायता के लिए उत्तर प्रदेश अधिवक्ता कल्याण निधि न्यासी समिति को 500 करोड़ रुपये की निधि जारी की जाए ताकि भुगतान अविलंब हो।

- एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट बनाकर लागू किया जाए, जिससे अधिवक्ताओं की सुरक्षा हो सके।

- प्रदेश के सभी न्यायालयों में चहारदीवारी बनाई जाए और परिसर में सुरक्षा व्यवस्था की जाए ताकि न्यायालय परिसर में आए दिन हो रहीं हत्याओं को रोका जा सके।


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