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बुधवार, 25 मार्च 2020

वैकल्पिक गर्भगृह में चांदी के सिंहासन पर विराजमान हुए रामलला, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी रहे मौजूद

गाजीपुर न्यूज़ टीम, अयोध्या, श्रीराम जन्मभूमि परिसर में नवनिर्मित वैकल्पिक गर्भगृह में रामलला को शिफ्ट कर दिया गया। रामलला की स्थापना के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मंगलवार को ही अयोध्या पहुंच गए थे। सीएम योगी आदित्यनाथ ब्रह्ममुहूर्त में साढ़े चार बजे श्रीराम जन्मभूमि परिसर में पहुंचे और लगभग एक घंटा वहां रहे। रामजन्मभूमि परिसर में चल रहे अनुष्ठान में सीएम योगी के साथ प्रधान पुजारी सत्येंद्र दास व ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपालदास के उत्तराधिकारी कमल नयन दास, श्रीराम जन्मभूमि तीथ क्षेत्रट्रस्ट के महामंत्री चंपतराय भी मौजूद रहे।

नवनिर्मित वैकल्पिक गर्भगृह में रामलला को विराजमान करने के बाद सीएम योगी आदित्यनाथ ने देशवासियों को चैत्रशुक्ल प्रतिपदा और नवसंवत्सर की बधाई दी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यना ने कहा कि श्रीरामलला अपने नए आसन पर विराजमान होकर हम सब पर अपनी कृपा और आशीर्वाद निरंतर प्रदान करते रहेंगे। कहा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेत्रत्व में प्रदेश वर्तमान में जिस नई वैश्विक बीमारी से सामना करने के लिए तैयार हुआ है उसका दुनियाभर के तमाम संगठनों ने इसकी सराहना की है।
रामलला अखिल ब्रह्मांड के नायक और सृष्टि नियंता के रूप में शिरोधार्य हैं, पर ऐतिहासिक तथ्य यह है कि उनकी जन्मभूमि की अस्मिता 492 वर्ष से संक्रमित रही है। गत नौ नवंबर को सुप्रीम फैसला आने के साथ श्रीराम जन्मभूमि की स्वायत्तता-संप्रभुता सुनिश्चित हुई और इसी क्रम में बुधवार को रामलला को टेंट के अस्थाई मंदिर से स्थानांतरित कर साज-सुविधा युक्त वैकल्पिक गर्भगृह में स्थापित कर दिया गया। इसके लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मंगलवार की शाम साढ़े छह बजे अयोध्या पहुंच गए थे।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रामलला को शिरोधार्य कर अधिगृहीत परिसर के नवनिर्मित वैकल्पिक गर्भगृह में पहुंचाया। सर्किट हाउस में रात्रि विश्राम के उपरांत भोर में रामलला की शिफ्टिंग के कार्यक्रम में हिस्सा लेने पहुंचे। इसके लिए सोमवार से अनुष्ठान आरंभ हो चुका था। 10 वैदिक आचार्यों का समूह ने वेद मंत्रों के साथ रामलला को वैकल्पिक गर्भगृह में स्थापित किया। यह वैदिक विद्वान दिल्ली, प्रयागराज, काशी और अयोध्या के है।
हालांकि रामलला के दिव्य-दैवी वैभव और उनसे जुड़ी अप्रतिम आस्था से न्याय तभी संभव होगा, जब भव्य मंदिर निर्माण के साथ प्रभु श्रीराम इस मंदिर के नियोजित-संयोजित भव्य और स्थाई गर्भगृह में विराजमान होंगे। विशेषज्ञों की मानें तो यह सब होने में ढाई से तीन वर्ष का समय लग सकता है। साढ़े नौ किलो चांदी के सिंहासन पर होंगे विराजमान 432 वर्ग फीट के वैकल्पिक गर्भगृह में रामलला की गरिमा व सुरक्षा के पुख्ता प्रबंध और दर्शनार्थियों की सुविधा का पूरा ध्यान रखा गया है।

सोमवार को ही श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के सदस्य एवं अयोध्या राजपरिवार के मुखिया बिमलेंद्रमोहन मिश्र ने साढ़े नौ किलो चांदी का भव्य सिंहासन भेंट किया। रामलला वैकल्पिक गर्भगृह में इसी सिंहासन पर विराजमान कराए जाएंगे।

रामलला की शिफ्टिंग के बाद सीएम योगी गोरखपुर रवाना हो गए। पहले भी यह उम्मीद थी कि रामलला की शिफ्टिंग के समय मुख्यमंत्री मौजूद रह सकते हैं लेकिन, कोरोना की वजह से सीएम का यह दौरा बेहद गोपनीय रखा गया। यहां तक कि कई अधिकारियों को भी इसकी सूचना उनके आगमन के चंद घंटे पहले ही दी गई। लाइव प्रसारण की तैयारी वैकल्पिक गर्भगृह में रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा उल्लासपूर्ण समारोह के रूप में प्रस्तावित थी लेकिन, कोरोना वायरस के संक्रमण की आशंका के चलते यह आयोजन वैदिक कर्मकांड तक सीमित रखा गया है। तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने प्राण-प्रतिष्ठा के लाइव प्रसारण की व्यवस्था जरूर कर रखी है, ताकि मौके पर पहुंचने से वंचित श्रद्धालु टीवी पर इस अहम अवसर को देख सकें।
30 अप्रैल को राम मंदिर के लिए भूमि पूजन रामलला को शिफ्ट करने के बाद यहां पर भव्य राम मंदिर निर्माण के लिए जमीन का समतलीकरण शुरू हो जाएगा। अब अप्रैल के आखिरी सप्ताह में भूमि पूजन भी किया जा सकता है। यहां पर चार अप्रैल को अयोध्या में आयोजित ट्रस्ट की बैठक में इस पर निर्णय लिया जाना है। रास्ते का भी शुद्धिकरण होगा रामलला के प्रधान पुजारी आचार्य सत्येंद्र के अनुसार किसी भी नए मंदिर में भगवान को विराजमान कराने से पहले उसकी धर्म संगत मान्यताएं हैं। भगवान को विराजमान करने से पहले जमीन और मंदिर दोनों को पवित्र कराया जाएगा।

रामलला को शिफ्ट करने से पहले रास्ते का भी शुद्धिकरण होगा और वैदिक मंत्रोचार के साथ रामलला पुराने मंदिर से नए आस्था मंदिर में विराजमान होने के लिए निकलेंगे। राम जन्मोत्सव भी होगा साधारण राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महामंत्री चंपत राय के अनुसार अब इस पूरे कार्यक्रम को बहुत ही साधारण प्रक्रिया से संपन्न कराया जाएगा। देश में श्रद्धालुओं और देशवासियों की सुरक्षा की भावना को प्राथमिकता देते हुए इस कार्यक्रम को सीमित किया गया है। अब आगे का कार्यक्रम भी अब परिस्थितियों पर ही निर्भर करेगा। उन्होंने कहा कि सब कुछ ठीक रहा तो अगले वर्ष भव्यता के साथ राम की नवमी मना लेंगे। रामलला के शिफ्टिंग पर बोलते हुए कहा कि सारे कार्यक्रम होंगे, लेकिन जैसी परिस्थितियां होंगी उसी के अनुरूप कार्य होगा।

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