आंधी-तूफान, बरसात से पूर्वांचल के किसान बेहाल, गेहूं की मड़ाई रुकी, सब्जी की फसल बर्बाद
गाजीपुर न्यूज़ टीम, वाराणसी। शुक्रवार अल सुबह जैसे ही लोग अलसाई आंखों से घरों से बाहर निकले, तभी मौसम में हुए बदलाव ने उन्हें अचरज में डाल दिया। जब तक लोग कुछ समझते तब तक आंधी संग आसमान में घिरे काले बादल बारिश की बूंद बन बरस उठे। मौसम का ऐसा बदला रुख पूर्वांचल के लगभग सभी जिलों में रहा। कहीं आंधी के साथ ही तेज बारिश हुई, तो कहीं रिमझिम फुहारों ने मन मयूर को गर्मी के सितम से कुछ राहत दिला दी। वाराणसी के मौसम वैज्ञानिक एसएन पांडेय के मुताबिक वाराणसी और उसके आसपास के जिलों का मौसम अभी ऐसे ही बना रहेगा। उन्होंने बताया कि पूर्वांचल पर लगातार बंगाल की खाड़ी से आने वाली नम हवाओं का दबाव बना हुआ है। यही कारण है कि वाराणसी और उसके आसपास तक रुक रुक कर बारिश भी हो सकती है। मऊ में शुक्रवार की सुबह 6 बजे तक मौसम सामान्य था।
लेकिन 6.30 बजे अचानक मौसम बदल गया। काले घने बादलों के छाने से अंधेरा हो गया था। बाद में हवा चलने लगी। तेज हवा चलने पर लोग घरों में दुबक गए। इसके बाद बरसात हुई, जो समाचार लिखे जाने तक जारी थी। मौसम के बिगड़े रूप को देखकर सबसे ज्यादा किसान परेशान दिखे। क्योंकि किसानों की फसल अभी भी खेतो और खलिहानों में पड़ी है। बात करने पर किसान अनिल ने बताया कि बरसात होंने से फसल बर्बाद हो गई है। खास तौर से वो फसल जो खलिहानों में पड़ी है।
गाजीपुर जिले में सुबह करीब सात बजे मौसम ने करवट लिया और तेज हवा के साथ बारिश हुई। जिससे किसानों की सब्जी, मूंग की फसल को काफी नुकसान हुआ। सबसे ज्यादा नुकसान गेहूं के मड़ाई को लेकर हुआ क्योंकि किसान अपने गेहूं की फसल कांटकर मडा़ई के लिए बोझा बनाकर खेतों में रखा हुआ है। करीब एक महीने से मौसम की मार झेल रहा है और उसकी फसल बर्बाद हो रही है। इस बारिश ने किसानों की कमर तोड़ दी है।
भदोही में मौसम की मार ने किसानों को बेहाल कर दिया है। कालीन नगरी में शुक्रवार को सुबह ही गरज-चमक के साथ तेज बारिश हुई। इस दौरान तेज हवाएं भी चलीं। लगातार पांचवें दिन आंधी और बारिश से किसान सहम गए। असमय बारिश और ओलावृष्टि से रबी सीजन में उत्पादन 40 फीसदी से अधिक घट गया है। इससे किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें उभर आईं हैं। दो बार की अतिवृष्टि के बाद आंधी और ओलावृष्टि ने गेहूं की फसल को भारी नुकसान पहुंचाया। जिले में 50 हजार हेक्टेयर रकबे में गेहूं की खेती की गई थी। लेकिन उत्पादन का लक्ष्य लड़खड़ा गया है। इसका अंदाजा गेहूं क्रय केंद्रों पर पसरे सन्नाटे को देखकर भी लगाया जा सकता है। सरकारी आंकड़े में गेहूं की उपज 40 प्रतिशत घटने का अनुमान लगाया गया है।
कृषि उप निदेशक अरविंद सिंह कहते हैं कि इस बार मौसम ने खेतीबारी को ज्यादा नुकसान पहुंचाया है। 40 फीसदी उपज घटने का अनुमान है। आजमगढ़ जनपद में तड़के से ही मौसम की मिजाज बदला नजर आया। भोर से ही आसमान में घुप्प कालेबादल छाए रहे। सुबह सात बजते ही तेज हवा के साथ बरसात शुरू हो गई। लगभग डेढ़ घंटे तक जमकर बारिश होती रही। गेहूं की पछैती खेती करने वाले ऐसे किसान जो अपने गेहूं की मड़ाई अभी तक नहीं कर पाए चिंतित नजर आए।
हालांकि जनपद में माना जा रहा है कि लगभग 90 फीसदी गेहूं की कटाई का काम पूरा हो चुका है। सुबह के समय लगने वाली सब्जी आदि के बाजारों में दुकानदारों को परेशानी हुई हो वो छिर छिपाते नजर आए। सोनभद्र जिले के अनपरा, बभनी व कुछ अन्य इलाकों में सुबह तेज हवा चलने के साथ ही काफी देर तक बारिश हुई। इसके अलावा शाहगंज, घोरावल, रामगढ़, मधुपुर आदि में तेज हवा के साथ बूंदाबांदी हुई। बलिया में भी सुबह मौसम बदला और तेज बारिश हुई। वहीं चंदौली जिले में सुबह आसमान में बादल के साथ तेज हवा चली। लेकिन कुछ देर बाद आसमान साफ हो गया । इस समय धूप खिली हुई है।
