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कोरोना माई की अफवाह, बारिश में भींगते हुए महिलाओं ने की पूजा

गाजीपुर न्यूज़ टीम, गाजीपुर. जहां एक ओर कोविड-19 से निपटने के लिए वैज्ञानिक वैक्सिन बनाने में जुटे हैं। कोरोना का प्रसार रोकने के लिए मंदिर-मस्जिद, चर्च-गुरुद्वारे तक बंद हैं। वहीं कुछ लोग अंधविश्वास के चक्कर में पड़ गए हैं। कोरोना महामारी को कोरोना माई मानते हुए अजीब तरह से पूजा पाठ में जुट गए हैं। आजमगढ़ में एसकेपी इंटर कालेज में शुक्रवार की सुबह ऐसा ही कुछ नजारा दिखाई दिया। यहाँ कई महिलाओं ने कोरोना को माई (मां) मानते हुए पूजा अर्चना की। बारिश में भीगते हुए महिलाएं पूजा में जुटी रहीं।

नगर के एसकेपी इंटर कालेज में शुक्रवार की सुबह बारिश हो रही थी। इसी बीच कई महिलाएं हाथ में पूजा की थाली लिये मैदान में पहुंच गयी। सभी महिलाएं एक लाइन लगाकर जमीन पर बैठ गयी। महिलाओं के हाथ में पूजन सामग्री के साथ खुरपी भी थी। जिससे महिलाएं मिट्टी को खोदकर छोटा गड्ढा कर रही थी। इसके बाद साथ में लाये लड्डू, फूल व अन्य पूजन सामग्री से पूजन अर्चन शुरू कर दिया।

महिलाओं का कहना था कि दो सप्ताह तक सोमवार व शुक्रवार को कोरोना माई की पूजा अर्चन करने से महामारी भाग जायेगी। पूजा में नौ लवंग, नौ फूल, लड्डू चढ़ाने से करोना महामारी दो सप्ताह में भाग जाएगी। आज से हमने पूजा शुरू किया है, जो प्रत्येक सोमवार व शुक्रवार को करने के बाद कोरोना माई खुश होगी है और महामारी से मुक्ति मिल जायेगी। महिलाओं के पूजन अर्चन की क्षेत्र में खूब चर्चा हो रही है।

सोशल मीडिया से मिला अंधविश्वास को बल
सोशल मीडिया से इस तरह के अंधविश्वास को बढ़ावा मिल रहा है। बताया जाता है कि सबसे पहले इस अंधविश्‍वास की शुरुआत बिहार हुई। वहां सोशल मीडिया पर इस तरह की पूजा करती महिलाओं की फोटो और वीडियो शेयर हुए। इसके बाद यूपी के बलिया और कुशीनगर में मामला पहुंचा। अब आजमगढ़ समेत अन्य जगहों पर यह अंधविश्‍वास फैल गया है। महिलाओं का कहना है कि पूजा से 'कोरोना माई' प्रसन्‍न होंगी और उनके गांव पर इस बीमारी का असर नहीं पड़ेगा। 

लोगों का मानना है कि सोशल मीडिया से कोई भी बात कम समय में लोगों तक पहुंच जाती है। व्हाटसएप और फेसबुक के अलावा तमाम सोशल मंचों पर इस पूजा के विषय में कुछ लोगों ने पोस्ट कर दिया। शेयर इतनी तेजी से हुआ कि यह बात घर में बैठी गृहणी महिलाओं तक पहुंच गई। रात में ही पूजन सामग्री की खरीदारी कर ली गई थी और सुबह होते ही शुरू हो गया अंधविश्वास का दौर। भारी बारिश भी महिलाओं ने नहीं डिगा पाई। 

लोगों का कहना है कि प्रशासन को अंधविश्वास से जुड़े वीडियो और संदेशों पर तत्‍काल अंकुश लगाना चाहिए ताकि कोरोना के नाम पर लोग जाने-अनजाने गलत धारणाओं के शिकार न बनें। इस बीमारी का अब तक कोई इलाज नहीं खोजा जा सकता है। सोशल डिस्‍टेसिंग और साफ-सफाई रखकर ही इससे बचा जा सकता है।