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मां दुनिया छोड़ गई, पापा मुझे छोड़ गए... अब मैं कहां जाऊं

गाजीपुर न्यूज़ टीम, कन्नौज. कन्नौज के जिला अस्पताल के एसएनसीयू वार्ड में 35 दिन की एक बच्ची भर्ती है। बीमार नहीं है। उसे माता-पिता की गोद में होना चाहिए पर गोद मयस्सर नहीं। जन्म देते ही मां गुजर गई। पिता मां की लाश लेकर चला गया। उसे ठुकरा कर। अस्पताल पर बच्चा बदलने का आरोप लगा कर। अब यह बच्ची अस्पताल कर्मियों के हवाले है। उन्हें देख कर हाथ-पांव चलाती है। मुस्कुराती है। कभी-कभी अचानक खामोश हो जाती है। मानों पूछ रही हो... मां दुनिया छोड़ गई, पापा मुझे छोड़ गए... अब मैं कहां जाऊं? नवरात्र में कन्याओं की पूजा करने वाले समाज को यह घटना आईना दिखा रही है।

ऐसे पिता की गोद से महरूम हुई बच्ची

बीते 11 सितंबर की सुबह कन्नौज सदर कोतवाली के बंसरामऊ गांव की आरती को प्रसव पीड़ा उठी। पति आकाश जिला अस्पताल के महिला विंग लेकर पहुंचा। सुबह करीब 11 बजे आरती ने अपने पहले बच्चे को जन्म दिया। नवजात को कुछ तकलीफ थी। उसे एसएनसीयू वार्ड (सिक न्यूबोर्न केयर यूनिट्स) में भर्ती कर दिया गया। उसी शाम आरती की हालत बिगड़ी और इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। बीवी की मौत से विचलित आकाश ने आंसू पोंछे। बीवी की लाश ले जाने से पहले उसने आरोप लगाया कि अस्पताल में उसकी संतान बदल दी गई है। आरती ने बेटे को जन्म दिया था। अब डॉक्टर उसे बेटी दे रहे हैं। आरोप से हड़कंप मचा। अस्पताल प्रशासन ने जन्म से वार्ड में भर्ती करने तक का ब्योरा पेश किया। लेकिन वह जिद पर अड़ा रहा। अंतत: भर्ती बच्ची को छोड़ पत्नी के शव को लेकर वह चला गया।


डीएनए टेस्ट के बिना इसे बेटी नहीं मानूंगा

आकाश ने अगले दिन पुलिस को प्रार्थना पत्र देकर कहा कि पत्नी ने बेटे को जन्म दिया था, लेकिन अस्पताल में उसे बदल दिया गया। उसने डीएनए टेस्ट करवाने की मांग की। उसकी मांग के मुताबिक सैंपल लिया गया। बच्ची और पत्नी का सैंपल अस्पताल प्रशासन पहले ही ले चुका था। तीनों सैंपल लखनऊ की फोरेंसिक लैब भेजे गए हैं।


नर्सों ने बच्ची को परी नाम दिया

पिता की ठुकराई इस बच्ची का ख्याल अब डॉक्टर और नर्सें रख रही हैं। एसएनसीयू वार्ड में परवरिश हो रही है। देखभाल करने वाले स्टाफ ने उसे परी नाम दिया है। स्वस्थ बच्ची को ज्यादा दिनों तक एसएनसीयू वार्ड में रखना मुनासिब नहीं है। उसे इन्फेक्शन हो सकते हैं। ऐसे में उसे लखनऊ के बाल गृह भेजने की तैयारी की जा रही है। उधर औरेया के बेला गांव का निवासी आकाश गुमसुम है। आरती से उसकी शादी दो साल पहले हुई थी। वह पहले उड़ीसा में काम करता था। इन दिनों गांव में ही है। खेती नहीं है। पहले मजदूरी कर लेता था। पत्नी के निधन के बाद से गुमसुम आकाश ने कहा-अस्पताल वाले बेटे को बदल कर बेटी सौंपना चाहते हैं। डीएनए जांच में मेरी बात ही सच साबित होगी।


डॉ. शक्ति बसू, सीएमएस जिला अस्पताल कहतीं हैं 11 सितंबर को आरती ने कन्या को जन्म दिया था। अस्पताल में इस बात के पूरे प्रमाण हैं। किसी तरह की गड़बड़ी नहीं हुई है। बच्चा बदलने के आरोप बेबुनियाद हैं। डॉ. एमपी सिंह, एसएनसीयू वार्ड प्रभारी का कहना है कि महिला ने बच्ची को ही जन्म दिया। महिला डॉक्टर के बुलावे पर मैंने बच्ची का चेकअप किया और उसे अपने साथ ही एसएनसीयू वार्ड में भर्ती करवाया था।

 
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