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महिलाएं सोलर लालटेन से बनाएंगी टॉर्च, दी जा रही ट्रेनिंग

गाजीपुर न्यूज़ टीम, बलिया. नारी शक्ति को आत्मनिर्भर, सशक्त व समृद्ध बनाने के लिए उनके हुनर को तराशने की पहल तेज हो गई है। गांव की महिलाएं अब सोलर लाइट से लेकर सोलर टॉर्च, चार्जर आदि का निर्माण करेंगी। इससे उन्हें रोजगार मिलेगा, उनकी आमदनी बढ़ेगी और वे आर्थिक रूप से शक्तिशाली बन सकेंगी। 'ओजस' परियोजना के तहत उन्हें सोलर उत्पादों के अलग-अलग पार्ट उपलब्ध कराए जाएंगे, जिसे ये महिलाएं असेम्बल करेंगी। इसके एवज में उन्हें प्रति असेम्बल के हिसाब से मेहनताना दिया जाएगा। परियोजना पर काम के लिए प्रदेश के तीन जनपदों का चयन किया गया है, उनमें फतेहपुर व प्रतापगढ़ के अलावा पूर्वांचल का बलिया भी है। परियोजना पर अमल करते हुए पहले चरण में जिले में 30 महिलाओं का चयन कर उनका प्रशिक्षण भी किया जा चुका है। करीब पांच दिन पहले विभागीय स्तर पर इसका प्रस्तुतिकरण भी किया गया है। असेम्बल स्थल के रूप में शहर से सटे हनुमानगंज ब्लाक परिसर के हॉल को चयनित किया गया है। जल्द ही वहां काम भी शुरू हो जाएगा। 

रोजाना दो से तीन सौ तक की होगी आमदनी

परियोजना के तहत जिले में नोडल ग्राम संगठन अथवा क्लस्टर लेवल फेडरेशन (सीएलएफ) स्तर पर एसेम्बली एंड डिस्ट्रीब्यूशन सेंटर स्थापित किया जाना है। असेम्बल सेंटर के संचालन के लिए कम्प्यूटर, प्रिंटर, स्कैनर, इंटरनेट कनेक्शन, फर्नीचर आदि की व्यवस्था सीएलएफ स्टार्ट फंड या अपने द्वारा अर्जित धनराशि से किया जाना है। यहा काम करने वाली महिलाओं को 15 रुपये प्रति प्रॉडक्ट दिया जाएगा। अनुमान है कि एक महिला एक दिन में कम से कम 15 से 20 उत्पादों को असेम्बल कर देगी। इस प्रकार रोजाना वह 200 रुपये तक कमा सकेगी।


स्कूली बच्चों में वितरण, 'सोलर एस मार्ट शॉप' में बिक्री 

राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के जिला प्रबंधक राजीव रंजन सिंह के अनुसार उत्तर प्रदेश ग्रामीण आजीविका मिशन, आईटीआई मुम्बई तथा एनर्जी एफीसिएंसी सर्विसेज के बीच सौर ऊर्जा कार्यक्रम के क्रियान्वयन के लिए पार्टनरशिप किया गया। इसका उद्देश्य विद्यालय जाने वाले विद्यार्थियों को सोलर लैम्प उपलब्ध कराने के साथ ही ग्रामीण महिलाओं को सोलर लैम्प की एसेम्बली व वितरण द्वारा आजीविका के साधन उपलब्ध कराना है। प्रबंधक के अनुसार स्कूलों में सोलर उत्पादों के वितरण के अलावा 'सोलर एस मार्ट शॉप' भी खोले जाएंगे। वहां उत्पादों की बिक्री महिलाएं ही करेंगी। इससे अतिरिक्त आय हो सकेगी। 


'झांसी रानी संकुल' के अनुभव से लाभ 

जिला मिशन प्रबंधक के अनुसार योजना का क्रियान्वयन मिशन द्वारा चयनित नोडल झांसी रानी संकुल समिति द्वारा मिशन के सहयोग में किया गया है। वहां से मिले अनुभवों को देखने के बाद अन्य जिलों में इसे लागू करने के उद्देश्य से ओजस (आर्गनाइजेशन ऑफ ज्वाइंट एक्शन फॉर इकोलॉजिकल ससटेंनेबिलिटी) परियोजना का निर्माण किया गया है। राजीव रंजन सिंह, जिला मिशन प्रबंधक (राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशनका कहना है कि  'ओजस' परियोजना के तहत सोलर उत्पादों को एसेम्बल करने का कार्य महिलाएं करेंगी। हनुमानगंज ब्लाक परिसर स्थित हाल को एसेम्बल स्थल के रूप में चयनित किया गया है। 30 महिलाओं का चयन भी किया जा चुका है। जल्द ही काम शुरू हो जाएगा। उत्पादों के सामान महिलाओं को उपलब्ध कराए जाएंगे, जिन्हें वह एसेम्बल करेंगी।

 
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