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एलिवेटेड कॉरिडोर पर नई दिल्ली से वाराणसी तक चलेगी बुलेट ट्रेन

गाजीपुर न्यूज़ टीम, वाराणसी. पूर्वांचल के विकास को रफ्तार देने के लिए दिल्ली से इसकी कनेक्टिविटी तेज करने की तैयारी है। इसके तहत वाराणसी-नई दिल्ली रेल रूट पर बुलेट ट्रेन का संचालन होगा। इसका शुरुआती मॉडल तैयार किया गया है। ट्रेन संचालन के लिए वाराणसी से नई दिल्ली तक अलग कॉरीडोर बनेगा। यह एलिवेटेड (खंभों पर) होगा। लिडार सर्वे के जरिये रेलवे ट्रैक के लिए विशेष तौर पर एलिवेटेड पुल भी तैयार होंगे। नेशनल हाईस्पीड रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड की प्रवक्ता सुषमा गौड़ ने रविवार को दूरभाष पर हुई बातचीत में बताया कि शुरुआती मॉडल में पूरा कॉरीडोर एलिवेटेड है। यह आम ट्रैक से अलग होगा, इस पर सिर्फ हाईस्पीड वाली ट्रेनें चलेंगी।

उन्होंने बताया कि इसे जेवर एयरपोर्ट से जोड़ने की योजना है। इस कारण वहां पर इसे अंडरग्राउंड किया जा सकता है। सर्वे के बाद नक्शा स्पष्ट हो जाएगा। नेशनल हाईस्पीड रेल कॉरपोरेशन लिमिटेड के एमडी अचल खरे के मुताबिक नई दिल्ली-वाराणसी हाई स्पीड रेल कॉरिडोर से दिल्ली का एनसीटी, आगरा, मथुरा, लखनऊ, इटावा, रायबरेली, प्रयागराज, वाराणसी, भदोही और अयोध्या सेंटर बनाये गये हैं। लिडार सर्वे के बाद ड्राइंग, एलाइनमेंट निकाली जाएगी, फिर डीईएम यानी डिजिटल एलीवेशन मॉडल तैयार किया जाएगा।


एक दिन पहले अभ्यास, निश्चित तारीख पर नहीं हो पाया सर्वे

13 दिसंबर को नई दिल्ली में लिडार तकनीक से सर्वे होना था लेकिन मौसम खराब होने के कारण इसे नहीं किया जा सका। इसके एक दिन पहले 12 दिसंबर को सर्वेक्षण के लिए अभ्यास किया गया। इसमें सर्वे अधिकारी हितेश खन्ना और प्रवक्ता मौजूद रहीं।


क्या जरूरी है एलिवेटेड कॉरीडोर

  • एलिवेटेड कॉरीडोर पुल की तरह होता है। वैसे इसे उन इलाकों में प्राथमिकता दी जाती है, जहां घनी आबादी के कारण भूमि अधिग्रहण मुश्किल होता है।
  • जमीन अधिग्रहण कर अधिक धनराशि खर्च करने से भी बचा जा सकेगा। पिलर वाले स्थानों के लिए ही भूमि अधिग्रहित कीनी होगी।
  • सबसे महत्वपूर्ण सुरक्षा कारण हैं। बुलेट ट्रेन के परिचालन में कोई बाधा न आये, सुरक्षित यात्रा हो, इसके लिए कहीं से भी सड़क मार्ग या सीधे जमीन से जुड़ाव नहीं किया जाता।
  • 800 किमी वाले रेल कॉरीडोर पर 300 से 350 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से बुलेट ट्रेन दौड़ेगी, ऐसे में इसमें किसी भी तरह की बाधा न आनी पाये।


प्रमुख तथ्य :

कॉरीडोर में कुल 86 मास्टर कंट्रोल प्वाइंट होंगे।

350 सेकेंड्री कंट्रोल प्वाइंट होंगे।