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उत्तर प्रदेश के हर सरकारी कर्मचारी को लिखकर देना होगा- शादी में नहीं लिया दहेज

गाजीपुर न्यूज़ टीम, लखनऊ. दहेज की विभीषिका आए दिन समाज में सामने आती है। इस पर रोकथाम के लिए लगातार कवायद चलती है। खासकर युवक सरकारी नौकरी में हो तो, दहेज की मांग और बढ़ने के कई केस पुलिस थानों में दर्ज मुकदमों के रूप में सामने आते हैं। इस पर लगाम लगाने के लिए प्रदेश सरकार ने पूर्व में कागजों पर बने हुए नियमों काेे जमीन पर उतारने की कवायद तेज कर दी है। इसके तहत सरकारी कर्मचारी को लिखकर देना होगा कि शादी में दहेज नहीं लिया है। शासनादेश के बाद पिछले हफ्ते उप मुख्य परिवीक्षा अधिकारी नीता अहिरवार ने मंडल स्तर के सभी अधिकारियों, विभागों को इस बाबत पत्र जारी कर दिया है।

वर्ष 1999 में बना था अधिनियम, 2004 में संशोधन : उत्तर प्रदेश दहेज प्रतिषेध अधिनियम की नियमावली वर्ष 1999 में बनी थी। इसके बाद वर्ष 2004 में प्रदेश सरकार ने अधिनियम में संशोधन हुआ था। तब अधिनियम के नियम पांच में दर्ज हुआ था कि प्रत्येक सरकारी सेवक अपने विवाह के समय यह उल्लेख करेगा कि उसने अपने विवाह में कोई दहेज नहीं लिया है। अब विभागों में वर्ष 2004 के बाद जिन लोगों का विवाह हुआ है उनसे स्व हस्ताक्षरित घोषणा पत्र लिया जा रहा है। जिला अस्पताल में ऐसे 10 सरकारी स्वास्थ्यकर्मी हैं।

विभाग को रखना होगा रिकार्ड, भेजेंगे महिला कल्याण निदेशालय : करीब पंद्रह साल पहले अधिनियम में बदलाव होने के बावजूद अभी तक दहेज प्रथा रोकने के लिए सरकारी विभागों के स्तर पर विशेष प्रयास नहीं हुए थे। लेकिन सरकार के आदेश पर उप मुख्य परिवीक्षा अधिकारी नीता अहिरवार ने सभी विभागों को पत्र जारी कर दिया है। अब विभाग अपने-अपने कर्मचारियों का घोषणा पत्र लेकर इसे निदेशालय महिला कल्याण की ई-मेल आइडी dowryprohibitionup@gmail.com पर मेल करेंगे। इसमें वर्ष 2004 के बाद विवाहित सरकारी सेवकों से स्व हस्ताक्षरित घोषणा पत्र लिया जाएगा।

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