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भाजपा और निषाद पार्टी का हुआ गठबंधन, संजय निषाद बोले- यूपी में विधानसभा 15 सीटों पर लड़ेगी पार्टी

गाजीपुर न्यूज़ टीम, लखनऊ. उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी का निषाद पार्टी के साथ गठबंधन फाइनल है। उत्तर प्रदेश में भाजपा से विधान परिषद सदस्य और निषाद पार्टी के अध्यक्ष संजय निषाद ने रविवार को इसकी घोषणा की। निर्बल इंडियन शोषित हमारा आम दल (निषाद पार्टी) के संजय निषाद का दावा है कि उनकी पार्टी को भाजपा से 15 सीट मिलेगी।

निषाद पार्टी के अध्यक्ष संजय निषाद ने रविवार को कहा कि वे भाजपा के साथ गठबंधन के तहत उत्तर प्रदेश की 15 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ेंगे, लेकिन सीटों को अंतिम रूप दिया जाना बाकी है। निषाद ने कहा कि वह उन निर्वाचन क्षेत्रों को अंतिम रूप देने के लिए सोमवार को दिल्ली में अमित शाह सहित भाजपा के वरिष्ठ नेताओं से मिलेंगे, जहां पार्टी अपने उम्मीदवार उतारेगी। उन्होंने कहा कि हमें भाजपा के साथ गठबंधन में लडऩे के लिए 15 सीटें (403 सीटों में से) मिली हैं। सीटें फाइनल है। इनमें अधिकांश सीटें पूर्वांचल में हैं और कुछ पश्चिमी उत्तर प्रदेश की भी हैं। संजय निषाद ने कहा कि कुछ सीटें हैं जिन्हें हम बदलते समीकरणों के कारण बदलना चाहते हैं। हम न केवल सीट पर बल्कि जीत पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। इसी कारण गृह मंत्री अमित शाह से मिलकर सीट बदलने की बात करेंगे।

निर्बल इंडियन शोषित हमारा आम दल यानी निषाद पार्टी का गठन 2016 में किया गया था। इसके नेता ने कहा कि हमें निषाद समुदाय के समर्थन से जीत मिलती है। निषाद समुदाय अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) में से एक है। संजय निषाद ने कहा कि उनकी पार्टी ने पूरे राज्य में अपनी पैठ बना ली है। गोरखपुर, बलिया, संत कबीर नगर, अंबेडकर नगर, जौनपुर, भदोही, सुल्तानपुर, फैजाबाद, चित्रकूट, झांसी, बांदा, हमीपुर और इटावा जिलों में इसका काफी प्रभाव है। निषाद पार्टी ने पिछले विधानसभा चुनाव 2017 में पीस पार्टी ऑफ इंडिया, अपना दल और जन अधिकार पार्टी के साथ गठबंधन में 100 उम्मीदवार खड़े किए, लेकिन वह भदोही जिले के ज्ञानपुर में सिर्फ एक सीट जीत सकी। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय निषाद गोरखपुर ग्रामीण से विधानसभा चुनाव लड़े थे और तीसरे स्थान पर आए थे।

संजय निषाद के बेटे प्रवीण कुमार निषाद 2018 के लोकसभा उपचुनाव में गोरखपुर से समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार थे। उन्होंने भाजपा के प्रत्याशी को हराया था। भाजपा तो गोरखपुर से 1989 से चुनाव नही हारी थी। और उन्होंने गोरखपुर निर्वाचन क्षेत्र भाजपा से छीन लिया, जो 1989 से सीट जीत रही थी। निषाद पार्टी के प्रवीण कुमार निषाद अब संत कबीर नगर से भाजपा सांसद हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की कर्मस्थली गोरखपुर में निषाद समुदाय के लोग बड़ी संख्या में रहते हैं।

प्रतिद्वंद्वी दलों के निषाद पार्टी के कोटे से भाजपा के आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोगों को मैदान में उतारने के सवाल पर संजय निषाद ने कहा कि हम हर उम्मीदवार की छवि व पार्टी कार्यकर्ताओं और लोगों के बीच उनकी स्वीकृति के माध्यम से जाएंगे। अगर लोग और कार्यकर्ता एक उम्मीदवार को पसंद करते हैं। उसे तो एक मौका दिया जा सकता है।

भाजपा के कुछ विधायकों और पिछड़ी जातियों के मंत्रियों के चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी में शामिल होने पर निषाद ने कहा कि उनकी कोई लोकप्रियता नहीं थी। वह कार्यक्रमों के दौरान प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के लिए सकारात्मक रिपोर्ट कार्ड की प्रशंसा कर रहे थे। चुनाव आयोग की आदर्श आचार संहिता लागू होने के कारण वे शक्तिहीन हो गए, उन्होंने पार्टी छोड़ दी। लोग अब ऐसे लोगों को समझते हैं।

भाजपा के लिए कौन सी पार्टी के मुख्य चुनौती पर उन्होंने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि सपा का सीधा मुकाबला भाजपा से है, लेकिन उन्होंने कहा कि सत्तारूढ़ गठबंधन 300 से अधिक सीटें जीतेगा। उन्होंने कहा कि भाजपा सभी जातियों को साथ लेती है। उम्मीदवारों की पहली सूची में अधिकांश ओबीसी को टिकट दिया गया था। केन्द्र और राज्य सरकारों के कार्यों के कारण जमीन पर भी इसकी स्वीकृति अच्छी है। उन्होंने सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (एसबीएसपी) के नेता ओम प्रकाश राजभर पर भी कटाक्ष करते हुए कहा उनके क्षेत्र के लोग भी उन्हें महत्व नहीं देते हैं। एसबीएसपी समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ रही है।

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