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रावण और समाजवादी पार्टी का फिर होगा गठबंधन! ओमप्रकाश राजभर ने दिया बड़ा बयान

गाजीपुर न्यूज़ टीम, लखनऊ. समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन की बातों पर विराम लगा चुके भीम आर्मी और आजाद समाज पार्टी के मुखिया चंद्रशेखर उर्फ़ रावण पर सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने डोरे डालना शुरू कर दिया है। राजभर ने गठबंधन को लेकर बड़ा बयान दिया है। एक न्यूज चैनल से बातचीत में उन्होंने कहा कि वह हर हालत में चंद्रशेखर रावण के साथ गठबंधन करना चाहते हैं, चाहे उन्हें अपने कोटे से ही टिकट क्यों न देनी पड़े। राजभर ने कहा, मैं रावण को कहीं नहीं जाने दूंगा। 

और क्या बोले राजभर? 

भाजपा ने दलितों को धोखा दिया है। दलितों ने भाजपा को सिर्फ इसलिए वोट दिया था कि उन्हें न्याय मिलेगा। लेकिन भाजपा ने सत्ता में आते ही आरक्षण खत्म कर दिया। इसका सबसे ज्यादा नुकसान अनुसूचित जाति के लोगों को ही हुआ है। 

राजभर ने मुलायम सिंह यादव की बहू अपर्णा के भाजपा में शामिल होने की चर्चाओं को लेकर भी जवाब दिया। बोले, ये तो खबरें हैं, मैंने तो कई भाजपा नेताओं को समाजवादी पार्टी में लाकर खड़ा कर दिया। 13 विधायक आज भाजपा का साथ छोड़ चुके हैं। 

गठबंधन न होने पर चंद्रशेखर ने क्या कहा था? 

चंद्रशेखर आजाद ने शनिवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस करके कहा था, 'एक महीने से मेरी लगातार अखिलेश से बात हो रही है। अखिलेश तय कर चुके हैं वे दलितों से गठबंधन नहीं करेंगे। अखिलेश ने मुझे अपमानित किया है। मुझे लगता है कि वे दलितों की लीडरशिप खड़े नहीं होने देना चाहते। मैंने अखिलेश पर जिम्मेदारी छोड़ी थी कि वे गठबंधन में शामिल करें या नहीं। लेकिन उन्होंने आज तक जवाब नहीं दिया।

वो प्रमोशन में आरक्षण के मुद्दे पर साथ नहीं आ रहे थे। जिस तरह से बीजेपी दलितों के यहां खाना खाकर खेल कर रही हैं। वैसे ही अखिलेश यादव कर रहे हैं। हम चाहते थे कि अखिलेश यादव हमारे मुद्दे रखें लेकिन वह इससे बच रहे थे। इसलिए हमने तय किया है कि हम गठबंधन में नहीं जा रहे हैं।

मुलायम सिंह यादव को कांशीराम ने सीएम बनाया लेकिन उन्होंने धोखा दिया। हम नहीं चाहते थे कि इस बार भी दलित समाज के साथ ऐसा हो। बीजेपी को रोकने के लिए मैंने अपना स्वाभिमान दांव पर लगा दिया।'

अखिलेश यादव क्या बोले थे?

चंद्रशेखर के आरोपों का सपा मुखिया अखिलेश यादव ने खुद जवाब दिया। कहा, 'मैंने चंद्रशेखर को दो सीटें देने की बात कही थी। उसमें एक सीट आरएलडी के पास थी। इसके लिए मैंने आरएलडी नेताओं से बात की थी। उन्होंने मेरी बात मान ली और सहारनपुर की सुरक्षित रामपुर मनिहारान सीट छोड़ दी। इसके बाद ये सीट मैंने चंद्रशेखर को दे दी। साथ-साथ गाजियाबाद की सीट घोषित नहीं थी, उसे भी चंद्रशेखर को दे दिया। बाद में चंद्रशेखर ने कहा कि मैं चुनाव नहीं लड़ सकता है। संगठन के लोग नाराज हैं। वह इतनी कम सीटों पर नहीं मान रहे हैं। इसके बाद मैंने कहा कि हमारे पास इतनी ही सीटें हैं। इसके बाद कोई सीट नहीं है। फिर चंद्रशेखर वापस चले गए।'

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