Today Breaking News

एक सप्ताह बाद बनारस की गंगा में नहीं गिरेगी शाही नाले की गंदगी, गेट लीकेज का कार्य जारी

गाजीपुर न्यूज़ टीम, वाराणसी. आखिरकार वह घड़ी आ गई जिसका इंतजार गंगा प्रेमी कर रहे थे। अंग्रेजों के शासनकाल में बने शाही नाले से गिर रही गंदगी अब थम जाएगी। इसके लिए बस एक सप्ताह की देरी बताई जा रही है। मुहाने के गेट से लीकेज का कार्य किया जा रहा है जो जल्द ही पूरा कर लिया जाएगा। इसके बाद गंगा में शाही नाले से गंदगी नहीं गिरेगी क्योंकि कबीरचौरा से डायवर्जन का कार्य पूरा हो चला है।

जल निगम के कर्मचारी काम समेटने लगे हैं। खोदी सड़क को दुरुस्त किया जा रहा है। सोमवार रात तक वाहनों का आवागमन भी चालू हो गया। इससे छह माह की जाम भरी सांसत से लोगों को राहत मिली है। माना जा रहा है कि सप्ताह भर में खोदी हुई सड़कें भी सरपट कर दी जाएंगी। जल निगम के परियोजना प्रबंधक एसके रंजन ने बताया कि डायवर्जन कार्य पूरा हो गया है। हालांकि, अब भी मुहाने से शाही नाला का पानी गंगा में गिर रहा है जिसे रोकने के लिए गेट के लीकेज को दुरुस्त किया जा रहा है।

बता दें कि पुराने शहर में जनसंख्या घनत्व बढऩे के साथ ही शाही नाले पर सीवेज फ्लो का बोझ बढ़ता गया। अंग्रेजों के जमाने में जब शाही नाला का निर्माण हुआ था तो उसकी क्षमता 80 एमएलडी थी जो वर्तमान में 120 एमएलडी हो गई है। शाही नाले से निकलने वाले सीवेज को शोधन करने के लिए दीनापुर में 80 एमएलडी का एसटीपी स्थापित किया गया है जिसे अपग्रेड करने के बाद भी ओवरलोड के कारण 40 एमएलडी सीवेज बिना शोधित गंगा में गिर रहा है। 

इसे देखते हुए कबीरचौरा से चौकाघाट तक नई पाइप लाइन बिछाकर शाही नाले के डायवर्जन का प्रस्ताव बनाया गया। यह कार्य भी वर्ष 2019 में प्रारंभ हुआ है। करीब 11 करोड़ का बजट आवंटित किया गया। इस कार्य को एक वर्ष में पूरा कर लेना था लेकिन ऐसा नहीं हुआ। मियाद पर मियाद बढ़ती गई। मुख्यमंत्री से लेकर शासन प्रशासन से जुड़े जिम्मेदार चेतावनी पर चेतावनी देते गए लेकिन कोई फर्क नहीं पड़ा।

शाही नाला का मुहाना बनेगा सेल्फी प्वाइंट

जल निगम जब गंगा में गिर रहे सीवेज को रोक देगा तो शाही नाला के मुहाने को सेल्फी प्वाइंट बनाया जाएगा। यह कार्य स्मार्ट सिटी कंपनी की ओर से किया जाएगा। इसे खिड़किया घाट पुनरुद्धार कार्य में शामिल किया गया है। शाही नाला के मुहाने को पार करने के लिए हेरिटेज लुक का ब्रिज बनाया जाएगा ताकि शाही नाला का ऐतिहासिक लुक प्रभावित न हो।


'