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मुख्तार अंसारी के खिलाफ आरोप तय, वीडियो कान्फ्रेसिंग के जरिए व‍िशेष कोर्ट में हुई पेशी

गाजीपुर न्यूज़ टीम, लखनऊ. जियामऊ इलाके में निष्क्रांत सम्पत्ति पर फर्जी दस्तावेजों के जरिए कब्जा कर अवैध निर्माण कराने के एक मामले में सोमवार को एमपी-एमएलए की विशेष मजिस्ट्रेट कोर्ट ने अभियुक्त मुख्तार अंसारी के खिलाफ आरोप तय कर दिया। इस दौरान मुख्तार अंसारी बांदा जेल से वीडियो कान्फ्रेसिंग के जरिए विशेष अदालत के समक्ष उपस्थित थे। विशेष एसीजेएम अम्बरीष कुमार श्रीवास्तव ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 29 अगस्त की तारीख तय की है।

बीती 27 जुलाई को विशेष अदालत ने इस मामले में मुख्तार अंसारी की डिस्चार्ज अर्जी खारिज कर दी थी। 18 अक्टूबर, 2021 को मुख्तार के खिलाफ आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी व कूटरचना आदि के साथ ही सार्वजनिक सम्पति नुकसान निवारण अधिनियम की धारा तीन में आरोप पत्र दाखिल हुआ था। इसके मुताबिक मुख्तार ने जियामऊ इलाके में एक निष्क्रांत जमीन का जबरिया बैनामा करा लिया।

इस सम्पति पर साजिशन फर्जी तरीके से अपने बेटों का नाम दर्ज कराया। जमीन का नक्शा मंजूर कराने के लिए अपने बाहुबल का इस्तेमाल कर अनावश्यक दबाव बनाया। फर्जी दस्तावेजों के जरिए इस जमीन पर मकान का अवैध निर्माण भी कराया गया। इस मामले में मुख्तार अंसारी के बेटे अब्बास अंसारी व उमर अंसारी भी अभियुक्त हैं। 27 अगस्त, 2020 को इस मामले की एफआइआर प्रभारी लेखपाल सुरजन लाल ने हजरतगंज कोतवाली में दर्ज कराई थी।

लाखों के गबन में सहायक डाकपाल व डाक सहायक को 10 साल की सजा : राष्ट्रीय बचत पत्र व किसान तथा इंदिरा विकास पत्र की फर्जी इंट्री दर्ज कर लाखों का गबन करने के मामले में सीबीआइ की विशेष अदालत ने फतेहगढ़ के सहायक डाकपाल अमरनाथ अग्निहोत्री व डाक सहायक प्रदीप कुमार वर्मा को दोषी करार दिया है। विशेष जज विजय चंद यादव ने इन दोनों को 10-10 साल की सजा सुनाई है।

साथ ही इन पर अलग अलग एक लाख 25 हजार का जुर्माना भी लगाया है। सीबीआइ के वरिष्ठ लोक अभियोजन अजय पाल के मुताबिक यह मामला मई, 2006 का है। इस दौरान अभियुक्तों ने आपसी सांठ-गांठ से विभागीय दस्तावेजों में फर्जी इंट्र दर्ज कर 17 लाख 44 हजार का गबन किया था।

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