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गाजीपुर में गंगा नदी से 30 घंटे बाद मिला शव, तल में पकड़ रखी थी जमीन

ग़ाज़ीपुर न्यूज़ टीम, गाजीपुर. गाजीपुर में सैदपुर के बूढ़ेनाथ महादेव घाट से गंगा नदी में डूबे युवक का शव एनडीआरएफ और प्रशासन की 30 घंटे की खोजबीन के बाद शनिवार की दोपहर को लोकल गोताखोरों ने आधे घंटे में ढूंढ निकाला। गुरुवार को सुबह एक व्यक्ति गंगा में डूब गया था। जिसके बाद परिजनों और स्थानीय लोगों के आग्रह पर पुलिस ने शव का पंचनामा कर उसे परिजनों को सौंप दिया। शव मिलते ही घाट पर जमा मृतक के परिजनों में चीख पुकार मच गई।
गुरुवार को नदी में डूबा था युवक
सैदपुर नगर के बूढ़ेनाथ महादेव घाट के पास गुरुवार की सुबह लगभग 9 बजे निवासी विश्वजीत सोनकर उर्फ आशीष (24) गंगा नदी में डूब गया। इसके बाद स्थानीय पुलिस प्रशासन द्वारा वाराणसी से एएसआई मनोज कुमार के नेतृत्व में गोताखोरों और तैराकों की 12 सदस्यी टीम, एक रबर रॉफ्टर बोट के साथ एनडीआरएफ बुलाई गई।
गोताखोर और तैराक होने के बावजूद, एनडीआरएफ की टीम सिर्फ अपनी वोट से ही नदी के धारा की दिशा में 5 किलोमीटर दूर तक अपनी वोट दौड़ती रही। डूबने के स्थान के पास ना तो एनडीआरएफ टीम के गोताखोर पानी में उतरे और ना ही तैराक। इसी तरह 28 घंटे तक डूबें युवक की खोज चलती रही।

तब परिजनों ने स्थानीय मछुआरों को बुलाया। जिसके बाद 6 नाव पर सवार होकर 25 मछुआरे घटनास्थल पर पहुंचे। इनमें शामिल 15 गोताखोरों ने नदी में डुबकी लगाकर लगभग आधे घंटे तक खोजबीन किया। इसके बाद कोट घाट के पास से युवक का शव बरामद कर लिया गया। प्राण निकलते समय नदी के तल को पकड़ कर लॉक हो गया था। शरीर लोकल गोताखोरों की टीम में शामिल लोहा, करिया, मोनू निषाद, संतोष निषाद, रामसकल निषाद, संजय आदि से पता चला कि युवक ने प्राण निकलते समय 10 फीट गहराई में नदी के तल पर मौजूद चचरी को दोनों हाथों से पकड़ लिया था। मरने के बाद इसी अवस्था में उसका शरीर लॉक हो गया था।

15 गोताखोर एक साथ जमीन टटोलते हुए, 10 फीट की गहराई में बढ़ रहे थे। शव के शरीर पर कोई कपड़ा नहीं था। हम लोग घटनास्थल से थोड़ा पहले एक कतार में होकर, दो से तीन मिनट पानी के नीचे बिताकर, तल को टटोलते हुए धारा के साथ आगे बढ़ रहे थे। इसी दौरान टीम के एक सदस्य को कुछ होने का एहसास हुआ। जिसके बाद शव को कन्फर्म कर सभी ने मिलकर, उसे बाहर निकाल लिया।युवक की खोजबीन में मुन्ना सोनकर, सभासद सुनील यादव, समाजसेवी अभिषेक शाहा का विशेष योगदान रहा।
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