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गाजीपुर में ऊर्जा मंत्री एके शर्मा बोले-अधिकारी पैसे खा गए, सस्पेंड करिए; लटके तार देख गुस्सा हुए

ग़ाज़ीपुर न्यूज़ टीम, गाजीपुर. गाजीपुर में नगर विकास और ऊर्जा मंत्री एके शर्मा गांव में लटके तार देखकर गुस्सा हो गए। इसे गंभीर लापरवाही करार देते हुए कहा- कब, कहां, किसकी दुर्घटना में मौत हो जाए, कोई नहीं जानता।
गाड़ी में बैठे-बैठे ही पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के MD शंभू कुमार को फोन किया। कहा- मुझे लगता है कि आरडीएसएस (RDSS) का सारा पैसा अधिकारी खा गए हैं, क्योंकि जमीन पर कोई काम नहीं दिख रहा। उन्होंने तुरंत काम शुरू कराने और संबंधित अधिकारियों को निलंबित करने का आदेश दिया।

दरअसल, मंत्री एके शर्मा बुधवार को लखनऊ से बलिया जा रहे थे। गाजीपुर में उनका कोई कार्यक्रम नहीं था। बीच रास्ते महड़ौर गांव की रोड पर उन्होंने बिजली का तार लटकता देखा तो काफिला रोकने के निर्देश दिए। गाड़ी से उतरकर उन्होंने तारों की स्थिति देखी। कई स्थानों पर बिजली के तार अत्यंत नीचे झूल रहे थे।

आबादी वाले इलाकों में भी बिजली व्यवस्था बेहद खराब थी, जिससे किसी बड़े हादसे का खतरा बना हुआ था। इसके बाद उन्होंने पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के MD शंभू कुमार को फोन किया। कहा- सभी जर्जर, लटके और अव्यवस्थित तारों को तत्काल ठीक किया जाए।

मंत्री ने भविष्य में ऐसी स्थिति न बने, इसके लिए सख्त निगरानी और नियमित जांच सुनिश्चित करने के भी आदेश दिए। उन्होंने चेतावनी दी कि आगे से ऐसी लापरवाही सामने आने पर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। उनकी जवाबदेही तय की जाएगी। एके शर्मा बलिया के रसड़ा स्थित नागा जी सरस्वती विद्या मंदिर के वार्षिकोत्सव में शामिल होने जा रहे थे।

अधीक्षण अभियंता विवेक खन्ना की जांच में महड़ौर-रसड़ा मार्ग पर 11 केवी बिजली लाइनें मानक से काफी नीचे लटकी हुई पाई गईं। शुरुआती जांच में अवर अभियंता (जेई) धर्मेंद्र पाल दोषी पाए गए, जिन्हें निलंबित कर दिया गया। वहीं उपखंड अधिकारी मनोज कुमार वर्मा (कासिमाबाद) और अधिशासी अभियंता प्रवीण कुमार तिवारी (जंगीपुर, गाजीपुर) को आरोप पत्र जारी किया गया है।

जानें क्या है RDSS योजना, जिसका मंत्री ने किया जिक्र…
पुनर्गठित वितरण क्षेत्र योजना (RDSS) भारत सरकार की एक प्रमुख योजना है। इसका उद्देश्य 2025-26 तक बिजली वितरण कंपनियों की परिचालन क्षमता और वित्तीय स्थिरता में सुधार करना है। ₹3.03 लाख करोड़ के बजट वाली यह योजना स्मार्ट मीटरिंग, इन्फ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने और 2024-25 तक नुकसान को 12-15% तक कम करने पर केंद्रित है।

योजना का मुख्य उद्देश्य
स्मार्ट मीटरिंग: उपभोक्ताओं के लिए प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगाना।
बुनियादी ढांचा अपग्रेड: कृषि फीडर अलग करना, पुराने तारों को बदलना, और नए सबस्टेशन स्थापित करना।
आईटी/ओटी एकीकरण: एआई (AI) का उपयोग करके बिजली की खपत और मांग का पूर्वानुमान लगाना।