गाजीपुर में MDM खाते से शिक्षामित्र ने 4.65 लाख रुपये निकाले, बीएसए ने शुरू कराई जांच
ग़ाज़ीपुर न्यूज़ टीम, गाजीपुर. गाजीपुर के देवकली ब्लॉक के पीएम श्री कंपोजिट विद्यालय बरहपुर में मिड डे मील (एमडीएम) खाते से 4.65 लाख रुपये निकाले जाने का मामला सामने आया है। मंगलवार को मामला सामने आने के बाद यह रकम वापस खाते में जमा कर दी गई। बैंक की रसीद और स्टेटमेंट भी सामने आए हैं। बेसिक शिक्षा विभाग ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
मंगलवार सुबह बरहपुर गांव के कई लोगों के घर रजिस्टर्ड डाक से बंद लिफाफे पहुंचे। इनमें बैंक स्टेटमेंट समेत अन्य दस्तावेज थे। पत्र में एमडीएम खाते से लाखों रुपये निकाले जाने के आरोप लगाए गए थे।
पत्र के मुताबिक, मार्च 2026 में 63,830 रुपये के खर्च के मुकाबले 4,63,830 रुपये निकाले जाने का आरोप है। वहीं जून में सिर्फ चार दिन स्कूल संचालित होने के बावजूद 74,812 रुपये निकालने की बात कही गई है। विद्यालय का एमडीएम खाता यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की नंदगंज शाखा में है।
मामला विभाग तक पहुंचने के बाद अधिकारियों ने बैंक खाते की जानकारी जुटाकर रिकॉर्ड का मिलान शुरू किया। इसी बीच मंगलवार को एमडीएम खाते में 4 लाख 65 हजार रुपये जमा किए जाने की रसीद और बैंक स्टेटमेंट सामने आया।
ग्राम प्रधान प्रतिनिधि प्रतीक सिंह ने रकम वापस जमा होने का वीडियो भी साझा किया। प्रधानाध्यापक अशोक कुमार यादव ने भी फोन पर खाते में रकम वापस जमा होने की पुष्टि की।
प्रधानाध्यापक अशोक कुमार यादव ने बताया कि उन्होंने 16 जनवरी 2026 को विद्यालय में कार्यभार संभाला था। उनके मुताबिक, इससे पहले शिक्षामित्र उमेश कुशवाहा एमडीएम का संचालन कर रहे थे।
प्रधानाध्यापक का आरोप है कि उन्होंने करीब 63 हजार रुपये के चेक पर हस्ताक्षर किए थे। इसके बाद शिक्षामित्र ने प्रधान के हस्ताक्षर कराए और चेक में रकम बढ़ाकर अपनी मां के नाम से संचालित खाते में ट्रांसफर करा ली। बैंक स्टेटमेंट निकलवाने पर उन्हें खाते से रकम ट्रांसफर होने की जानकारी मिली।
हालांकि, ये आरोप प्रधानाध्यापक के फोन पर दिए गए बयान पर आधारित हैं। इसकी पुष्टि विभागीय जांच और बैंक रिकॉर्ड के मिलान से होगी।
प्रधान प्रतिनिधि प्रतीक सिंह के अनुसार, एमडीएम खाते से रकम जिस ट्रेडर्स के नाम ट्रांसफर हुई, वह निर्मला ट्रेडर्स है। उनका दावा है कि यह फर्म शिक्षामित्र उमेश कुशवाहा की मां के नाम से पंजीकृत है। इसी दुकान से विद्यालय के एमडीएम के लिए राशन आने की बात भी उन्होंने कही।
प्रतीक सिंह ने प्रधान के स्तर से किसी गड़बड़ी से इनकार किया। उन्होंने कहा कि करीब ढाई साल से एमडीएम खर्च का हिसाब प्रधान स्तर पर नहीं लिया जा रहा था। उनके मुताबिक, शिक्षामित्र चेक लेकर आते थे और प्रधान उस पर हस्ताक्षर कर देते थे।
बीएसए उपासना रानी वर्मा ने बताया कि मामला उनके संज्ञान में है। अभी तक किसी व्यक्ति ने उनके सामने लिखित शिकायत नहीं दी है। एक पत्र जरूर मिला है, लेकिन उसमें शिकायतकर्ता का नाम और पता स्पष्ट नहीं है।
बीएसए ने बताया कि फिलहाल विभाग अपने स्तर से मामले की जांच करा रहा है। लिखित शिकायत मिलने पर नियमानुसार विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
मामले में अभी यह स्पष्ट होना बाकी है कि एमडीएम खाते से रकम किस प्रक्रिया के तहत निकाली गई और इसके लिए वास्तविक जिम्मेदारी किसकी थी। बैंक रिकॉर्ड, चेक और अन्य दस्तावेजों के मिलान के बाद ही स्थिति साफ होगी। विभागीय जांच के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
